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Indian tradition: दस का अंक भारतीय संस्कृति में है बेहद खास महत्व, गंगा दशहरा पर जानें क्या है इसके मायने?

Thu, 09 Jun 2022 12:59 PM IST
रेनू सकलानी कौशल सिखौला, संवाद न्यूज एजेंसी, हरिद्वार
कौशल सिखौला, संवाद न्यूज एजेंसी, हरिद्वार Published by: रेनू सकलानी Updated Thu, 09 Jun 2022 12:59 PM IST
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Ganga Dussehra 2022, Ten number special significance in Indian culture, See Photos
गंगा दशहरा 2022 - फोटो : अमर उजाला
कायिक वाचिक और मानसिक तापों से मुक्ति दिलाने वाली मां गंगा शिव की जटाओं से निकलकर गंगा दशहरे के दिन हरिद्वार के मैदान में पहुंची थी। आगे-आगे शंख बजाते अयोध्या के महा तपस्वी राजा भगीरथ के पीछे-पीछे चलते हुए गंगा ने शिवलोक से मायापुरी तक की यात्रा 33 दिन में पूरी की।


यहां से गंगासागर तक तभी से समस्त तीर्थों पर ज्येष्ठ शुक्ल दशमी के दिन लाखों श्रद्धालु डुबकी लगाते हैं। अनेक तीर्थ नगरों में मेले भी भरते हैं। भारतीय संस्कृति में 10 का अंक व्यापक महत्व रखता है। दशहरे के दिन दस योग पड़ते हैं और गंगास्नान से तीन कायिक, चार वाचिक और तीन मानसिक पाप नष्ट हो जाते हैं। शास्त्रों के व्याख्याता पंडित प्रमोद शुक्ला बताते हैं कि इस बार गंगा दशहरे पर चार महायोग भी पड़ रहे हैं।

ब्रह्मलोक में विष्णु चरणोदक के रूप में बहने वाली मां गंगा राजा सगर के पुत्रों की राख बहाने के प्रयोजन से भगीरथ की तपस्या से प्रसन्न होकर वैशाख शुक्ल सप्तमी के दिन कैलाश पर विराजमान शिव के जटाजूटों में समा गई थी। राजा भगीरथ ने फिर तपस्या की और गंगा को शिव की जटाओं से बहाकर धरती पर ले आए। 

 

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स्कंद पुराण के केदारखंड के अनुसार कलयुग और द्वापर युग से पहले यह आगमन त्रेतायुग में करीब नौ लाख वर्ष पूर्व हुआ था। राजा भगीरथ ब्रह्मलोक में बहने वाली गंगा को धरतीवासियों के कल्याणार्थ त्रेता युग के अंत में धरती पर लाए थे। तब तक भगवान राम का अवतरण नहीं हुआ था।

 

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पूरा द्वापर बीता और कलयुग के भी पांच हजार वर्ष बीत गए। गंगा मैया धरती को सींचती हुई अनवरत बह रही है। स्कंद पुराण के अनुसार हरिद्वार से गंगा को लेकर भगीरथ गंगासागर स्थित कपिल मुनि के आश्रम के लिए चले, वहां भगीरथ के पुरखे राजा सगर के साठ हजार शापग्रस्त पुत्रों की राख पड़ी थी। 

 

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भगीरथ रास्ते में जहां जहां से गुजरे, तीर्थ बसते चले गए। इनमें गढ़मुक्तेश्वर, सोरों, काशी, प्रयाग, गंगासागर आदि प्रमुख हैं। गोमुख से गंगासागर तक गंगा की यह 2525 किमी लंबी यह यात्रा आज भी जारी है।

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गंगा आगमन के दशहरे पर्व का प्रारंभ राजा भगीरथ के सामने हुआ था। लाखों प्रतीक्षारत यात्रियों ने उस दिन डुबकी लगाई। अब तो गंगा दशहरा सभी तीर्थों पर मनाया जाता है।

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