{"_id":"62a19daef2254324af4e8293","slug":"ganga-dussehra-2022-ten-number-special-significance-in-indian-culture-see-photos","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"Indian tradition: दस का अंक भारतीय संस्कृति में है बेहद खास महत्व, गंगा दशहरा पर जानें क्या है इसके मायने?","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Indian tradition: दस का अंक भारतीय संस्कृति में है बेहद खास महत्व, गंगा दशहरा पर जानें क्या है इसके मायने?
कौशल सिखौला, संवाद न्यूज एजेंसी, हरिद्वार
Published by: रेनू सकलानी
Updated Thu, 09 Jun 2022 12:59 PM IST
विज्ञापन
1 of 5
गंगा दशहरा 2022
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
Link Copied
कायिक वाचिक और मानसिक तापों से मुक्ति दिलाने वाली मां गंगा शिव की जटाओं से निकलकर गंगा दशहरे के दिन हरिद्वार के मैदान में पहुंची थी। आगे-आगे शंख बजाते अयोध्या के महा तपस्वी राजा भगीरथ के पीछे-पीछे चलते हुए गंगा ने शिवलोक से मायापुरी तक की यात्रा 33 दिन में पूरी की।
यहां से गंगासागर तक तभी से समस्त तीर्थों पर ज्येष्ठ शुक्ल दशमी के दिन लाखों श्रद्धालु डुबकी लगाते हैं। अनेक तीर्थ नगरों में मेले भी भरते हैं। भारतीय संस्कृति में 10 का अंक व्यापक महत्व रखता है। दशहरे के दिन दस योग पड़ते हैं और गंगास्नान से तीन कायिक, चार वाचिक और तीन मानसिक पाप नष्ट हो जाते हैं। शास्त्रों के व्याख्याता पंडित प्रमोद शुक्ला बताते हैं कि इस बार गंगा दशहरे पर चार महायोग भी पड़ रहे हैं।
ब्रह्मलोक में विष्णु चरणोदक के रूप में बहने वाली मां गंगा राजा सगर के पुत्रों की राख बहाने के प्रयोजन से भगीरथ की तपस्या से प्रसन्न होकर वैशाख शुक्ल सप्तमी के दिन कैलाश पर विराजमान शिव के जटाजूटों में समा गई थी। राजा भगीरथ ने फिर तपस्या की और गंगा को शिव की जटाओं से बहाकर धरती पर ले आए।
2 of 5
स्कंद पुराण के केदारखंड के अनुसार कलयुग और द्वापर युग से पहले यह आगमन त्रेतायुग में करीब नौ लाख वर्ष पूर्व हुआ था। राजा भगीरथ ब्रह्मलोक में बहने वाली गंगा को धरतीवासियों के कल्याणार्थ त्रेता युग के अंत में धरती पर लाए थे। तब तक भगवान राम का अवतरण नहीं हुआ था।
3 of 5
पूरा द्वापर बीता और कलयुग के भी पांच हजार वर्ष बीत गए। गंगा मैया धरती को सींचती हुई अनवरत बह रही है। स्कंद पुराण के अनुसार हरिद्वार से गंगा को लेकर भगीरथ गंगासागर स्थित कपिल मुनि के आश्रम के लिए चले, वहां भगीरथ के पुरखे राजा सगर के साठ हजार शापग्रस्त पुत्रों की राख पड़ी थी।
विज्ञापन
विज्ञापन
4 of 5
भगीरथ रास्ते में जहां जहां से गुजरे, तीर्थ बसते चले गए। इनमें गढ़मुक्तेश्वर, सोरों, काशी, प्रयाग, गंगासागर आदि प्रमुख हैं। गोमुख से गंगासागर तक गंगा की यह 2525 किमी लंबी यह यात्रा आज भी जारी है।
गंगा आगमन के दशहरे पर्व का प्रारंभ राजा भगीरथ के सामने हुआ था। लाखों प्रतीक्षारत यात्रियों ने उस दिन डुबकी लगाई। अब तो गंगा दशहरा सभी तीर्थों पर मनाया जाता है।
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे| Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
विज्ञापन
विज्ञापन
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।