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तस्वीरों में देखें, देवभूमि उत्तराखंड का महाभारत काल से 'महा' कनेक्शन

Wed, 14 Dec 2016 04:18 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, देहरादून
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 14 Dec 2016 04:18 PM IST
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mahabharat connection from uttarakhand
महाभारत

देवभूमि उत्तराखंड का महाभारत काल से गहरा नाता रहा है। उत्तराखंड में मौजूद ऐसी बहुत सी जगह हैं जो महाभारत काल की गवाह होने की तस्दीक करती हैं।

mahabharat connection from uttarakhand
mahabharat vyas pothi situated in mana village

उत्तराखंड के मांणा गांव में महाभारत काल की सबसे बड़ा गवाह है। यहां महाभारत ग्रंथ के रचयिता मुनि व्यास का निवास स्‍थान है। इस जगह को व्यास पोथी के नाम से जाना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार व्यास जी ने गणेश जी को अपनी बातों में उलझा दिया और गणेश जी को पूरी महाभारत कथा मांणा गांव में ‌स्थित व्यास गुफा में बैठकर लिखनी पड़ी थी। जहां यह कथा लिखी गई थी वह गुफा अलकनंदा और सरस्वती नदी के संगम तट पर मौजूद है। यह पवित्र स्थान देवभूमि उत्तराखंड में बद्रीनाथ धाम से करीब तीन किलोमीटर की दूरी पर भारतीय सीमा के अंतिम गांव माणा में स्थित है।
 

mahabharat connection from uttarakhand
hanuman chatti

उत्तराखंड में जोशीमठ से लगभग 25 क‌िलोम‌‌ीटर दूर हनुमान चट्टी है। यहां भीम और हनुमान जी की भेंट हुई थी और हनुमान जी ने भीम को महाभारत युद्ध में व‌िजयी होने का आशीष द‌िया था।
 

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pandukeshwar

माना जाता है की उत्तराखंड में मौजूद पांडुकेश्वर तीर्थ में अपनी इच्छा से राज्य त्याग करने के बाद महाराज पांडु अपनी रानियों कुंती और मादरी संग निवास करते थे। इसी स्थान पर पांचों पांडवों का जन्म हुआ था।
 

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mahabharat connection from uttarakhand
lakhamandal

प्राकृतिक सुंदरता के बीच सुन्दर वादियों में बसा लाखामंडल गांव यमुना नदी के किनारे स्थित है। यह स्थान गुफाओं और भगवान शिव के मंदिर के प्राचीन अवशेषों से घिरा हुआ है। इस गांव के लोगों के मुताबिक दुर्योधन ने लाख से लाक्षागृह का निर्माण पांडवों को जिंदा जलाने के एक षड़यंत्र को अंजाम देने के इरादे से किया था। लोगों का मानना है कि लाक्षागृह, लाखामंडल के आस-पास ही निर्मित हुआ था। जिस सुरंग से बचकर पांडवों ने अपनी जान बचाई थी ऐसी मान्यता है कि वह सुरंग एक गुफा के मुहाने पर जा कर खुलती है, जो अभी भी लाखामंडल में मौजूद है।
 

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