देवभूमि उत्तराखंड का महाभारत काल से गहरा नाता रहा है। उत्तराखंड में मौजूद ऐसी बहुत सी जगह हैं जो महाभारत काल की गवाह होने की तस्दीक करती हैं।
तस्वीरों में देखें, देवभूमि उत्तराखंड का महाभारत काल से 'महा' कनेक्शन
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उत्तराखंड के मांणा गांव में महाभारत काल की सबसे बड़ा गवाह है। यहां महाभारत ग्रंथ के रचयिता मुनि व्यास का निवास स्थान है। इस जगह को व्यास पोथी के नाम से जाना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार व्यास जी ने गणेश जी को अपनी बातों में उलझा दिया और गणेश जी को पूरी महाभारत कथा मांणा गांव में स्थित व्यास गुफा में बैठकर लिखनी पड़ी थी। जहां यह कथा लिखी गई थी वह गुफा अलकनंदा और सरस्वती नदी के संगम तट पर मौजूद है। यह पवित्र स्थान देवभूमि उत्तराखंड में बद्रीनाथ धाम से करीब तीन किलोमीटर की दूरी पर भारतीय सीमा के अंतिम गांव माणा में स्थित है।
उत्तराखंड में जोशीमठ से लगभग 25 किलोमीटर दूर हनुमान चट्टी है। यहां भीम और हनुमान जी की भेंट हुई थी और हनुमान जी ने भीम को महाभारत युद्ध में विजयी होने का आशीष दिया था।
माना जाता है की उत्तराखंड में मौजूद पांडुकेश्वर तीर्थ में अपनी इच्छा से राज्य त्याग करने के बाद महाराज पांडु अपनी रानियों कुंती और मादरी संग निवास करते थे। इसी स्थान पर पांचों पांडवों का जन्म हुआ था।
प्राकृतिक सुंदरता के बीच सुन्दर वादियों में बसा लाखामंडल गांव यमुना नदी के किनारे स्थित है। यह स्थान गुफाओं और भगवान शिव के मंदिर के प्राचीन अवशेषों से घिरा हुआ है। इस गांव के लोगों के मुताबिक दुर्योधन ने लाख से लाक्षागृह का निर्माण पांडवों को जिंदा जलाने के एक षड़यंत्र को अंजाम देने के इरादे से किया था। लोगों का मानना है कि लाक्षागृह, लाखामंडल के आस-पास ही निर्मित हुआ था। जिस सुरंग से बचकर पांडवों ने अपनी जान बचाई थी ऐसी मान्यता है कि वह सुरंग एक गुफा के मुहाने पर जा कर खुलती है, जो अभी भी लाखामंडल में मौजूद है।