लांसनायक चंद्रशेखर हर्बोला का पार्थिव शरीर पहुंचा तो अन्य दो शहीदों के परिवारों की भी उम्मीद जग गई। बुधवार को लांसनायक चंद्रशेखर हर्बोला को श्रद्धांजलि देने पहुंचे सीएम धामी को शहीदों के परिजनों ने रोक लिया। शहीद नायक दया किशन जोशी और शहीद सिपाही हयात सिंह की पत्नी ने मुख्यमंत्री धामी से अपने पतियों के पार्थिव शरीर तलाशने की मांग की।
सीएम को रोका: लांसनायक चंद्रशेखर का पार्थिव शरीर पहुंचा तो दो शहीदों के परिवार की जगी आस, बेबस परिजन बोले..
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करीब एक महीने बाद पहुंचे दूसरे टेलीग्राम को पढ़ने के बाद तो मानो दुखों का पहाड़ ही टूट पड़ा था। उसमें उनके पति के शहीद होने की खबर थी लेकिन पार्थिव शरीर मिलने की पुष्टि नहीं हुई थी।
पिता की शहादत के पांच माह बाद पुष्पा इस दुनिया में आई थी। बच्ची देवी ने बताया कि वह मूल रूप से रीठा साहिब की हैं।
लांसनायक चंद्रशेखर: परिजनों को नहीं देखने दिया गया चेहरा, अंतिम दर्शन के लिए मिले केवल दस मिनट
16 साल से हल्द्वानी के भट्ट विहार स्थित कृष्णा कॉलोनी में रह रही हैं। वर्ष 1978 में शहीद हयात सिंह फौज में भर्ती हुए थे और 29 मई 1984 को सियाचिन में शहीद हो गए।