रिजर्व बैंक की ओर से जारी की गए 2000 रुपये के नोट को दृष्टिहीन 20 और 500 रुपये को 10 रुपये का समझ रहे हैं। यह समस्या नोट के छोटे साइज की वजह से आ रही है।
देखिए कैसे? दृष्टिहीनों के लिए मुसीबत बनी PM मोदी की नई करेंसी
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अब तक प्रचलित भारतीय नोटों की खासियत यह रही है कि मूल्य बढ़ने के साथ-साथ उनकी साइज भी बढ़ती जाती थी, दृष्टिहीन इसी साइज के आधार पर नोटों की कीमत का अनुमान लगाते थे। दृष्टिहीनों को इन नए नोटों से परिचित कराने के क्रम में राष्ट्रीय दृष्टिबाधित संस्थान(एनआईवीएच) में यह समस्या सामने आई है। संस्थान ने इस बाबत रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को भी पत्र लिखा है।
अमर उजाला ने सोमवार को दृष्टिबाधितों के बीच इस समस्या को प्रायोगिक तौर पर देखा। 20 दृष्टिबाधितों के समूह में सोमवार को 20, 50, 100 और 2000 के नोट वितरित किए गए और उनसे पूछा गया कि उनके पास कितने-कितने मूल्य के नोट हैं। सभी दृष्टिबाधितों ने 2000 रुपये को दस या बीस रुपये ही बताया।
इस मौके पर 500 रुपये का नोट न उपलब्ध होने की वजह से उसका अनुमान नहीं लगवाया जा सका। हालांकि एनआईवीएच इंटर कॉलेज के प्राचार्य कुलबीर सिंह ने बताया कि दृष्टिबाधितों को जब 500 रुपये के नए नोट दिए गए थे, उनमें से कुछ ने उसे 10 तो कुछ ने 20 रुपये के रूप में पहचाना।
प्रशिक्षणार्थी दृष्टिहीन अंकित कहते हैं कि नए नोट के बारे में हमें लगातार बताया और समझाया तो जा रहा है लेकिन अब भी हाथ में पकड़कर इसकी पहचान मुश्किल हो रही है। इसका छोटा साइज होने की वजह से अंदाजा नहीं लगा पा रहे हैं। इसी तरह दृष्टिहीन सुंदरलाल कहते हैं कि पहचान में गड़बड़ी होने की वजह से हम जैसे लोगों को तो बड़ा नुकसान हो सकता है।