अखाड़े में वापसी के साथ ही बहुचर्चित महिला संत राधे मां का पूरा मिजाज ही बदला हुआ नजर आएगा। दस नाम संन्यासियों के सबसे बड़े जूना अखाड़े को उन्होंने लिखकर दिया है कि वे अब न तो भक्तों को फ्लाइंग किस देंगी और न ही चौकी लगाते हुए उछलकर भक्तों की गोद में बैठेंगी।
जल्द बदल जाएगा राधे मां का मिजाज, अब न गोद में बैठेंगी, न नाचेगी, अपनी पोशाक भी बदल देंगी
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यही नहीं वे अपनी लाल रंग की पोशाक भी बदल देंगी। प्रयाग अर्द्धकुंभ में जाने से पूर्व भगवा धारण कर लेंगी और फिर जीवन भर भगवा ही पहनेंगी। महिला साध्वियों की भगवा पोशाक धारण कर वे कुंभ में हाथी पर सवारी करेंगी। अखाड़े ने राधे मां को साफ कह दिया है कि यदि उन्होंने पूर्व की भांति इस बार भी नियम तोड़ा तो उन्हें दोबारा माफी नहीं दी जाएगी। अखाड़ा परिषद की ओर से घोषित फर्जी संत की सूची से उनका नाम बाहर कराने का काम भी जूना अखाड़ा करेगा।
मालूम हो कि राधे मां को वर्ष 2012 में हरिद्वार के जूना अखाड़े में सभी नियम तोड़कर आधी रात के समय जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि ने महामंडलेश्वर पद की उपाधि प्रदान की थी। अगले ही दिन उन्हें महामंडलेश्वर बनाने को लेकर तमाम अखाड़ों और षड़दर्शन साधु समाज में तूफान खड़ा हो गया था। राधे मां का जीवन दर्शन जिस प्रकार का रहा है, वह कभी भी संत जगत को नहीं भाया। राधे मां का अखाड़े में प्रवेश जूना अखाड़े के ही महामंडलेश्वर स्वामी पंचदेवानंद गिरि ने अखाड़ा परिषद के महामंत्री और जूना अखाड़े के संरक्षक श्रीमहंत हरि गिरि से कराया था।
जूना अखाड़ा सूत्रों के अनुसार महामंडलेश्वर उपाधि के बदले राधे मां ने हरिद्वार की अधिष्ठात्री देवी मायादेवी के जीर्णोद्धार का वचन दिया था। लेकिन भारी विरोध के कारण जूना अखाड़े को दो दिन बाद ही दी गई महामंडलेश्वर की उपाधि वापस लेनी पड़ी थी। अब प्रयाग कुंभ से पूर्व राधे मां ने जूना अखाड़े के संरक्षक श्रीमहंत हरि गिरि को पत्र लिखकर दिया है।
पत्र के अनुसार वे उन तमाम गतिविधियों से दूर रहेंगी जिसके कारण वे चर्चित रही हैं। उन्होंने लिखित माफीनामा देते हुए माना कि वे माता की चौकी में भक्तों को फ्लाइंग किस देती थी और उनकी गोद में जा बैठती थी। भविष्य में संतोचित शालीन वस्त्र धारण करेंगी और कभी भी अखाड़े की मर्यादा को भंग नहीं करेंगी।