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केदारनाथ आपदा में तबाह हो चुके रामबाड़ा की अब आखिरी निशानी भी हुई खत्म, तस्वीरें

Tue, 31 Oct 2017 08:28 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रुद्रप्रयाग
ब्यूरो/अमर उजाला, रुद्रप्रयाग Updated Tue, 31 Oct 2017 08:28 PM IST
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rudraksha plant destroyed in rambada after kedarnath disaster
rambada after kedarnath disaster - फोटो : amarujala

केदारनाथ धाम में अपना अस्तित्व खो चुके रामबाड़ा की आखिरी निशानी भी अब चार साल बाद खत्म हो चुकी है। वहीं अब वहां सिवाए पत्थरों के कुछ नहीं रह गया है।

rudraksha plant destroyed in rambada after kedarnath disaster
rambara

आपदा के बाद से आज तक रामबाड़ा में स्मृति वन की स्थापना नहीं हो पाई है। चार वर्ष पूर्व यहां  निशानी के तौर पर रोपा गया रुद्राक्ष का पौधा भी देखरेख नहीं होने से सूखकर नष्ट हो चुका है। पूरी तरह से उजड़े रामबाड़ा को शासन, प्रशासन भूल चुका है।

rudraksha plant destroyed in rambada after kedarnath disaster
rambada before kedarnath disaster - फोटो : amarujala

16/17 जून 2013 की केदारनाथ आपदा में तबाह हो चुके रामबाड़ा को बाबा केदार के भक्तों की यादों में रखने के लिए वर्ष 2014 में तत्कालीन सीएम हरीश रावत ने यहां पर स्मृति वन की स्थापना की घोषणा की थी। तब, तत्कालीन केबिनेट मंत्री डा. हरक सिंह रावत व स्वामी चिदानंद जी महाराज ने रामबाड़ा में रुद्राक्ष का पौधा रोपा था।

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rudraksha plant destroyed in rambada after kedarnath disaster
rambara - फोटो : amarujala

इस स्थान पर रुद्राक्ष, देवदार, पीपल, बरगद सहित अन्य प्रजातियों के डेढ़ हजार पौधों का रोपण कर स्मृति वन तैयार करने की बात कही गई थी। तत्कालीन सीएम हरीश रावत ने कहा था कि इस वन से बाबा केदार के भक्तों के दिलों में रामबाड़ा जिंदा रहेगा। लेकिन यहां स्मृति वन के नाम पर आज तक दूसरा पौधा नहीं रोपा गया।

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rudraksha plant destroyed in rambada after kedarnath disaster
rambara (file photo)

वयोवृद्ध तीर्थ पुरोहित श्रीनिवास पोस्ती व केदार सभा के अध्यक्ष विनोद शुक्ला, कुबेरनाथ पोस्ती, राहुल सेमवाल आदि का कहना है कि केदारनाथ यात्रा में रामबाड़ा सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव था। यहां पर केदारघाटी के हजारों लोगों को रोजगार मिलता था। वहीं, बाबा केदार के दर्शनों को पहुंचे श्रद्धालु अपना सुख-दुख साझा करते थे। लेकिन आपदा के बाद से इस स्थान को भुला दिया गया है। स्मृति वन स्थापना तो दूर शासन, प्रशासन द्वारा रामबाड़ा में सुरक्षा के इंतजाम तक नहीं किए गए हैं।

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