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चमोली आपदा: अब ऐसे पता लगाई जाएगी ऋषिगंगा में बनी झील की गहराई, हेलीपैड भी हुआ तैयार, तस्वीरें...

Fri, 19 Feb 2021 08:43 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Fri, 19 Feb 2021 08:43 PM IST
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Uttarakhand Chamoli News: Government Teams will Know Rishi Ganga Lake Depth by Raft or sonar system
ऋषिगंगा में झील के पास बनाया गया हेलीपैड - फोटो : अमर उजाला

उत्तराखंड के चमोली जिले में धौलीगंगा और ऋषिगंगा के मुहाने पर बनी प्राकृतिक झील की गहराई का पता लगाने के लिए उसमें राफ्ट उतारी जा सकती है। अभियान दल के पास गहराई की थाह लेने के लिए झील की सोनार कार्यविधि के जरिये या झील में राफ्ट उतारने का विकल्प है। सरकार दोनों ही विकल्पों पर विचार कर रही है। एसडीआरएफ को राफ्ट झील स्थल तक पहुंचाने के निर्देश जारी हो गए हैं। 

Uttarakhand Chamoli News: Government Teams will Know Rishi Ganga Lake Depth by Raft or sonar system
ऋषि गंगा में बनी झील - फोटो : अमर उजाला

झील 50 मीटर चौड़ी और करीब 750 मीटर लंबी बताई जा रही है, लेकिन गहराई अभी अबूझ पहेली है। जानकारों के अनुसार, झील की गहराई का पता लगने से उसमें पानी की मात्रा का अंदाजा लगाया जा सकता है। देहरादून से वैज्ञानिकों की एक टीम झील स्थल के लिए रवाना कर दी गई है। वैज्ञानिकों का दल रैणी से पैदल मुरंडा पहुंच गया है। यहां से पांच किमी का फासला तय करने के बाद टीम शनिवार दोपहर बाद तक झील स्थल पर पहुंचेगी।

Uttarakhand Chamoli News: Government Teams will Know Rishi Ganga Lake Depth by Raft or sonar system
झील तक पहुंची एसडीआरएफ - फोटो : अमर उजाला

प्रदेश सरकार जल्द झील की वास्तविक स्थिति का पता लगाना चाहती है ताकि उससे होने वाले संभावित खतरे का अंदाज लगाया जा सकती है। 24 फरवरी से मौसम खराब होने की संभावना है। अभी राहत वाली बात यह है कि झील से पानी का निरंतर रिसाव हो रहा है। झील में तीन चैनलों से पानी की निकासी हो रही है। इन तीन चैनलों में एक चैनल की गहराई नदी के वास्तविक तल के बराबर हो गई है। इससे पानी की अधिक निकासी हो पा रही है। 

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Uttarakhand Chamoli News: Government Teams will Know Rishi Ganga Lake Depth by Raft or sonar system
ऋषिगंगा में झील से मलबा हटाते आईटीबीपी के जवान - फोटो : अमर उजाला

झील की वास्तविक स्थिति जानने के बाद ही इसे खाली कराने के विकल्पों के बारे में विचार किया जाएगा। कोशिश यही है कि जितना हो सके, झील से पानी की अधिकतम निकासी हो। इसके लिए आईटीबीपी के जवान झील से रिस रहे पानी के चैनलों को चौड़ा करने के लिए वहां से मलबा हटाने का प्रयास कर रहे हैं। तीन और नए चैनल बनाए जाने के भी प्रयास हो रहे हैं ताकि पानी की अधिकतम निकासी हो सके।

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मुरंडा पहुंची शासन की टीम - फोटो : अमर उजाला

शासन स्तर पर गठित विशेषज्ञ का एक दल रैणी से मुरांडा गांव में पहुंच गया है। दल के सदस्य शुक्रवार को वहीं रात्रि विश्राम करेंगे। शनिवार को दल सुबह रवाना हो जाएगा। करीब पांच घंटे की लगातार पैदल यात्रा के बाद दल झील स्थल पर पहुंचेगा। झील की गहराई का पता लगाने के लिए हेलीकॉप्टर से एक राफ्ट झील स्थल के लिए भेजी जा सकती है।

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