केंद्र सरकार के अध्यादेश के खिलाफ गैर भाजपा दलों को एकजुट करने की कड़ी में आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को सीपीआई (एम) के महासचिव सीताराम येचुरी से मुलाकात की। इस दौरान येचूरी ने केंद्र के अध्यादेश के खिलाफ दिल्ली की जनता का साथ देने की घोषणा की और गैर भाजपा दलों से अध्यादेश का विरोध करने की अपील की, वहीं केजरीवाल ने उनका धन्यवाद करते हुए कहा कि दिल्ली में केंद्र सरकार तानाशाही चला रही है और अध्यादेश लाकर दिल्ली की जनता के हक छीन रही है।
Delhi: सीपीएम नेता सीताराम येचुरी से मिले अरविंद केजरीवाल, केंद्र के अध्यादेश के खिलाफ मांगा समर्थन
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उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार अध्यादेश के तहत संसद के अंदर मानसून सत्र में विधेयक प्रस्तुत करेगी, मगर राज्यसभा में भाजपा का बहुमत नहीं है। राज्यसभा में वर्तमान में 238 सदस्य हैं, इसमें भाजपा के केवल 93 सदस्य ही हैं। इसलिए अगर सभी गैर भाजपा राजनीतिक दल एक साथ आ जाएं तो विधेयक को राज्यसभा में गिराया जा सकता है। इसलिए वह एक-एक कर सभी राजनीतिक पार्टियों के अध्यक्ष से मिलकर समर्थन मांग रहे है।
उन्होंने कांग्रेस के समर्थन को लेकर सवाल का जवाब देते हुए कहा कि मीडिया से मिल रही जानकारी के मुताबिक कांग्रेस उनका समर्थन नहीं करेगी, लेकिन यहां केजरीवाल महत्वपूर्ण नहीं है। यह मुद्दा देश के जनतंत्र, संविधान और दिल्ली के लोगों से जुड़ा है। इस कारण वह कांग्रेस से कहना चाह है कि वह केजरीवाल को छोड़ दे, उनका समर्थन मत कीजिए, लेकिन केंद्र सरकार ने दिल्ली के लोगों का अपमान किया है और उनकी शक्ति छीन ली है। इसलिए आप दिल्ली की जनता के साथ खड़े हों। आज केंद्र सरकार ने दिल्ली के साथ ये किया है, कल अगर ये राजस्थान में इस तरह का अध्यादेश लाते हैं तो हम राजस्थान के साथ खड़े होंगे। तब हम ये नहीं कहेंगे कि यह भाजपा-कांग्रेस का मामला है।
केंद्र के अध्यादेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे
वहीं, अरविंद केजरीवाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की 19 मई को छुट्टी हुई और उसी रात अध्यादेश लाया गया। इसका मतलब है कि केंद्र सरकार के दिल में खोट है। उसे पता है कि कोर्ट में यह अध्यादेश नहीं टिकेगा। इस तरह केंद्र सरकार ने एक माह बर्बाद किया है। अब हम इस अध्यादेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे, लेकिन जब ये राज्यसभा में आए तब सभी गैर भाजपा दलों को साथ मिलकर ये संदेश देना चाहिए कि हम चाहे किसी भी पार्टी से हों, देश सुप्रीम है। जब देश, जनतंत्र और संविधान की बात आएगी तो कोई पार्टी अलग नहीं है। हम सभी मिलकर इनका विरोध करेंगे।
राज्य सरकारों के अधिकारों पर हमले कर केंद्र-राज्य के रिश्ते किया जा रहा है खत्म: येचुरी
सीताराम येचुरी ने कहा कि हमने पहले दिन ही केंद्र सरकार ने अध्यादेश का विरोध किया है, क्योंकि यह हमारे देश की संवैधानिक व्यवस्था और जनतंत्र के खिलाफ है। एक तरह से देखा जाए तो यह न्यायालय की अवमानना का भी मामला है, क्योंकि देश के सर्वोच्च न्यायालय ने कोई आदेश जारी किया और आप उसे अध्यादेश के जरिए पलट रहे हैं।
उन्होंने कहा कि हमारे देश के संविधान के बुनियादी स्तंभों में से एक 'संघवाद' है। यानी केंद्र और राज्य की सरकार की शक्तियां अलग हैं, मगर केंद्र सरकार की ओर से केंद्र और राज्य के बीच के रिश्ते को पूरी तरह से नष्ट कर रही है। अब राज्य की सरकारों के अधिकारों के ऊपर कई तरह के हमले हो रहे हैं। यह अध्यादेश हमारे संविधान का उल्लंघन है।
उन्होंने सभी गैर भाजपा दलों से अपील करते हुए कहा कि यहां राजनीतिक दलों का सवाल नहीं है, यह कोई सीपीआई (एम) या आम आदमी पार्टी और अन्य पार्टी का सवाल नहीं है। यहां देश की संवैधानिक व्यवस्था के ऊपर हो रहे हमले का सवाल है। आज अगर हम उसका डटकर मुकाबला नहीं करेंगे तो हमारे देश के अंदर एक तानाशाही व्यवस्था ही नहीं, बल्कि उससे भी बुरा फांसीवादी रुझान के साथ देश को चलाने की कोशिश हो रही है। इसलिए इस अध्यादेश का विरोध किया जाए।
बता दें कि केजरीवाल ने येचुरी से पहले बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, महाराष्ट्र में शिवसेना-यूबीटी के नेता उद्धव ठाकरे, राकांपा नेता शरद पवार से मुलाकात की और इन नेताओं ने उन्हें समर्थन भी दिया। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और राज्य के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव भी समर्थन दे चुके हैं।
क्या है दिल्ली अध्यादेश का मामला
दिल्ली में प्रशासन के मुद्दे पर केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार में खींचतान चल रही है। मामला सुप्रीम कोर्ट भी गया। जहां बीती 11 मई को सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि अफसरों के ट्रांसफर, पोस्टिंग के अधिकार दिल्ली सरकार के पास रहेंगे। वहीं जमीन, पुलिस और कानून व्यवस्था पर केंद्र सरकार का नियंत्रण रहेगा। इसके बाद दिल्ली सरकार ने वरिष्ठ अधिकारियों के तबादले का एक आदेश जारी किया लेकिन इसके खिलाफ केंद्र सरकार एक अध्यादेश ले आई है, जिसके तहतत अफसरों के ट्रांसफर, पोस्टिंग और विजिलेंस से जुड़े मामलों के लिए केंद्र सरकार नेशनल कैपिटल सिविल सर्विसेज अथॉरिटी का गठन करेगी। इस अथॉरिटी में दिल्ली के मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, प्रधान गृह सचिव होंगे। यही अथॉरिटी अधिकारियों के ट्रांसफर, पोस्टिंग पर फैसले लेगी और एलजी को सिफारिश भेजेगी। उपराज्यपाल इन्हीं सिफारिशों के आधार पर फैसले लेंगे। अगर उपराज्यपाल सहमत नहीं होंगे तो वह इसे लौटा भी सकते हैं। मतभेद की स्थिति में उपराज्यपाल का फैसला अंतिम माना जाएगा।