लुटियंस दिल्ली के बीचों-बीच स्थित जंतर-मंतर आज सिर्फ एक ऐतिहासिक स्मारक नहीं, बल्कि लोकतंत्र की धड़कनों का प्रतीक बन चुका है। करीब 300 साल पहले जिस स्थान का निर्माण ग्रहों और सितारों की चाल समझने के लिए किया गया था, आज वहीं देशभर से आने वाले लोग अपनी मांगों, अधिकारों और न्याय की आवाज बुलंद करने के लिए जुटते हैं। इतिहास, विज्ञान और लोकतंत्र का ऐसा अनोखा संगम शायद ही देश में कहीं और देखने को मिले। जंतर-मंतर एक बार फिर सुर्खियों में है। यहां चल रहे विरोध-प्रदर्शनों के बीच यह सवाल भी चर्चा में है कि आखिर कैसे एक खगोलीय वेधशाला देश के सबसे बड़े लोकतांत्रिक आंदोलन स्थल में बदल गई।
Jantar Mantar History: कैसे देश का सबसे बड़ा विरोध-प्रदर्शन स्थल बना जंतर-मंतर? क्यों हुआ था 1731 इसका निर्माण
नितिन राजपूत, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: विकास कुमार
Updated Sat, 25 Jul 2026 05:10 PM IST
सार
जंतर-मंतर का निर्माण वर्ष 1731 में जयपुर के महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने कराया था। उस समय मुगल बादशाह मुहम्मद शाह का शासन था। यह भारत में बनाई गई उनकी पांच प्रमुख वेधशालाओं में से एक है। यहां स्थापित सम्राट यंत्र, जय प्रकाश यंत्र, राम यंत्र और मिश्र यंत्र जैसे विशाल उपकरणों की मदद से समय, ग्रहों की स्थिति और खगोलीय घटनाओं का सटीक अध्ययन किया जाता था।
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