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आपत्ति के बाद चुटकुले पढ़ने को मजबूर हुए सुप्रीम कोर्ट के जज

Wed, 04 Nov 2015 04:48 PM IST
Updated Wed, 04 Nov 2015 04:48 PM IST
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आपत्ति के बाद चुटकुले पढ़ने को मजबूर हुए सुप्रीम कोर्ट के जज

Jokes on sardars that supreme court judges are reading

एक सिख आदमी ने एक डॉक्टर को फ़ोन किया, “डॉक्टर मेरी पत्नी प्रेग्नेंट हैं. उन्हें अभी दर्द हो रहा है।” डॉक्टर ने पूछा, “क्या यह उनका पहला बच्चा है?” आदमी ने जवाब दिया, “नहीं, मैं उनका पति बोल रहा हूँ।”


अधिकांश लोगों को यह एक सामान्य और भोला भाला मज़ाक लगे लेकिन यह वैसा ही चुटकुला है जिससे हरविंदर चौधरी को सख़्त नफ़रत है। यह उन 60 चुटकुलों में से एक है जिनपर पाबंदी की मांग करते हुए दिल्ली की इस 54 वर्षीय सिख वकील ने सुप्रीम कोर्ट में एक अपील दायर की है।

आपत्ति के बाद चुटकुले पढ़ने को मजबूर हुए सुप्रीम कोर्ट के जज

Jokes on sardars that supreme court judges are reading

पिछले हफ़्ते शीर्ष अदालत में दायर अपने अनोखे अपील में चौधरी ने कहा है कि इंटरनेट पर पांच हज़ार वेबसाइट हैं जो सिखों पर चुटकुले बनाकर बेचती हैं। इन चुटकुलों में सिखों को बुद्धू, पागल, मूर्ख, बेवकूफ़, अनाड़ी, अंग्रेज़ी भाषा की अधूरी जानकारी रखने वाला और मंद बुद्धि और मूर्खता की मूर्ति के रूप में दिखाया जाता है। (आलेख व फोटो साभारः सौतिक बिस्वास/बीबीसी संवाददाता)

आपत्ति के बाद चुटकुले पढ़ने को मजबूर हुए सुप्रीम कोर्ट के जज

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वो कहती हैं, “ये चुटकुले जीने के बुनियादी अधिकार और सम्मान से जीने के अधिकार का उल्लंघन करते हैं, इसलिए जिन वेबसाइटों पर ये प्रकाशित होते हैं, उनपर प्रतिबंध लगना चाहिए।” इस अपील से हैरान जज इस पर सुनवाई के लिए तैयार तो हो गए लेकिन उन्हें इस बात पर ताज्जुब हुआ कि आखिर वो क्यों इस तरह का प्रतिबंध चाहती हैं।

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आपत्ति के बाद चुटकुले पढ़ने को मजबूर हुए सुप्रीम कोर्ट के जज

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जजों ने कहा, “हम ऐसे बहुत से लोगों को जानते हैं जो इन चुटकुलों को बहुत मज़ाक में लेते हैं। यह किसी के लिए अपमान नहीं हो सकता, बल्कि ये केवल मज़े के लिए कहे जाते हैं। आप चाहती हैं कि इस तरह के सभी चुटकुलों को रोका जाए लेकिन सिख खुद इसका विरोध कर सकते हैं।”

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आपत्ति के बाद चुटकुले पढ़ने को मजबूर हुए सुप्रीम कोर्ट के जज

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सुप्रीम कोर्ट के पास अपने चेंबर में बैठीं चौधरी कहती हैं कि वो इसे और लंबे समय तक यूं ही चलते नहीं रहने देंगी। चौधरी गुस्से में कहती हैं, “किसी भी चीज की हद होती है. हम सिखों की पूरी ज़िंदगी हंसी का पात्र बना दिया गया है। मेरे बच्चे अपने सिख नाम छोड़ना चाहते हैं क्योंकि उन्हें खुद का मज़ाक बनाया जाना दुख पहुंचाता है।

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