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सुषमा स्वराज ने इसलिए बेटी का नाम रखा था 'बांसुरी', बेहद रोचक है पूरी कहानी

Thu, 08 Aug 2019 05:15 PM IST
पूजा त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Thu, 08 Aug 2019 05:15 PM IST
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sushma swaraj keeps her daughter name bansuri and this is the reason
sushma swaraj - फोटो : अमर उजाला

देश ने अपनी ओजस्वी वक्ता और प्यारी बेटी को खो दिया है। 67 साल की उम्र में पूर्व विदेश मंत्री दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री और सबसे कम उम्र में मंत्री बनने वाली सुषमा स्वराज ने मंगलवार को दिल्ली के एम्स में अंतिम सांस ली। उनका जाना न सिर्फ भाजपा बल्कि पूरे देश के लिए बहुत बड़ी क्षति है। आज आपने उनके बारे में कई बातें सुनी होंगी लेकिन आप ये नहीं जानते होंगे कि उनका उनकी बेटी के साथ बहुत गहरा संबंध था। यही वजह है कि आज उनकी इकलौती बेटी ने ही उनका अंतिम संस्कार किया। उनकी बेटी का नाम बांसुरी है जिसके रखे जाने के पीछे भी बेहद दिलचस्प कहानी है। जानिए क्या है वह....



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sushma swaraj - फोटो : पीटीआई
सुषमा स्वराज भगवान कृष्ण की बहुत बड़ी भक्त थीं। उनकी भगवान कृष्ण पर अपार श्रद्धा थी। वह उनके जीवन से इतनी प्रभावित थीं कि कहा जाता है कि वह भगवान की तरह की कई रूपों में अपनी भूमिका निभाना चाहती थीं। इसे आसान शब्दों में समझें तो उन्होंने एक मां, एक बेटी, एक पत्नी, एक राजनीतिज्ञ के रूप में जिंदगी को भरपूर जिया। उनके जीवन में उनकी बेटी बहुत खास स्थान रखती थीं और इसीलिए उसका नामकरण भी उन्होंने सोच समझकर किया।
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sushma swaraj - फोटो : ani
जिस तरह भगवान कृष्ण को उनकी बांसुरी बहुत प्रिय थी सुषमा जी को बेटी भी बहुत प्रिय थी। यही वजह है कि उन्होंने बेटी का नाम 'बांसुरी' रख दिया।

 
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sushma swaraj bansuri - फोटो : ani
बांसुरी ने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन की है और इनर टेम्पल से कानून की डिग्री ले चुकी हैं। अपने पिता की भांति वे भी आपराधिक मामलों की वकील हैं और दिल्ली हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट में वकालत करती हैं।

बेटी बांसुरी के अलावा भी कई ऐसे पहलू हैं जो सुषमा के जीवन में बेहद खास रहे। अपनी हर प्रिय चीज के साथ उन्होंने एक अलग ही संबंध बनाए रखा।  
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सुषमा स्वराज फाइल फोटो - फोटो : सोशल मीडिया

साल 2009 में सुषमा विदिशा लोकसभा से सांसद चुनी गई थीं। सांसद रहते हुए उन्होंने एक पुस्तकालय बनवाया था। उन्हें अपने लोगों से इतना प्यार था कि लाइब्रेरी में विदिशा के लोगों के लिए एक विशेष सुविधा रखवाई गई थी। सुषमा स्वराज ने अपनी लाइब्रेरी में बड़े अक्षरों में लिखवा रखा था कि, 'विदिशा के लोग इस लाइब्रेरी से अपने पसंद की कोई भी एक पुस्तक लेकर जा सकते हैं।'

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