आपको क्या लगता है सफलता पाने के लिए सबसे ज्यादा जरुरी क्या है? आपके लिए सफलता के क्या मायने हैं? अगर आप खुद से यह प्रश्न पूछेंगे तो हर व्यक्ति के लिए इसका जवाब अलग हो सकता है। पर एक बात जिसपर सब सहमत होंगे। वो है खुद पर विश्वास। अगर आप खुद पर विश्वास नहीं करेंगे तो आप कभी सफलता हासिल नहीं कर पाएंगे। आज हम आपको बताएंगे एक ऐसे ही शख्स के बारे में, जिन्होंने खुद पर विश्वास किया और एक वेटर से लेकर आईएएस अधिकारी तक का सफर तय किया।
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कभी होटलों में करते थे वेटर का काम, आज हैं IAS अधिकारी, सातवीं बार में मिली सफलता
Tue, 07 Jan 2020 07:09 PM IST
Mohit Mudgal
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
Published by: Mohit Mudgal
Updated Tue, 07 Jan 2020 07:09 PM IST
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- जिनके कहानी हम आपको बता रहे हैं, उनका नाम है - के जयगणेश। जयगणेश का जन्म तमिलनाडु के उत्तरीय अम्बर के पास एक छोटे से गांव के एक गरीब परिवार में हुआ। उनके पिता एक फैक्ट्री में काम करके किसी तरह परिवार का गुजारा चलाते थे।
- जयगणेश चार भाई-बहन हैं, जिनमें वे सबसे बड़े हैं। जयगणेश पढ़ने में शुरू से ही बहुत होशियार थे। उन्होंने बारहवीं की परीक्षा 91 प्रतिशत अंकों के साथ पास की। इसके बाद उनका तांथी पेरियार इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में एडमिशन हो गया। जहां उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। इसके बाद उनकी नौकरी एक कंपनी में लग गई, जहां उन्हें हर महीने 2500 रुपये तनख्वाह मिलने लगी।
- जयगणेश का मन नौकरी में नहीं लगा। उन्हें ये बात समझ में आ चुकी थी कि इस नौकरी के सहारे वो अपना और परिवार का गुजारा नहीं चला पाएंगे। उनके गांव मे भी स्थिति कुछ ठीक नहीं थी।
- वो अपने गांव के लिए भी बहुत कुछ करना चाहते थे। इसके लिए अच्छा तरीका सरकारी ओहदा पाना जरूरी था। उनके मन में विचार आया कि क्यों न सिविल सेवा की तैयारी की जाए। उन्होंने जोर-शोर से पढ़ाई शुरू कर दी और इसकी परीक्षा भी दी। लेकिन कई बार असफल ही रहे। उनके लिए अपना खर्च चलाना भी मुश्किल हो रहा था।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : File photo
- अपना खर्च चलाने के लिए उन्होंने एक छोटे से होटल में वेटर की नौकरी करनी शुरू कर दी। वो दिन के समय वेटर का काम करते थे और रात के समय पढ़ाई।
- इसी दौरान उन्होंने इंटेलीजेंस ब्यूरो की परीक्षा दी और उसमें सफल भी हो गए। उनके सामने एक विकट समस्या खड़ी हो गई थी। वो समझ नहीं पा रहे थे कि नौकरी ज्वॉइन करें या फिर 7वीं बार सिविल सेवा की परीक्षा दें।
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- अंत में उन्होंने निर्णय लिया कि वो नौकरी नहीं करेंगे बल्कि अपनी तैयारी आगे जारी रखेंगे। उन्होंने सातवीं बार सिविल की परीक्षा दी और इस बार उन्हें सफलता हाथ लगी।
- उन्होंने इस परीक्षा में 156वीं रैंक हासिल की। उनकी मेहनत रंग लाई।खुद पर विश्वास और निरंतर मेहनत ही उनकी सफलता की वजह बना।
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