विज्ञान अनोखा है और वैज्ञानिकों द्वारा किए गए नए-नए प्रयोग भी हमें समय-समय पर दुनिया को चौंका देते हैं। ऐसा ही एक प्रयोग फिनलैंड में किया जा रहा है। यहां के वैज्ञानिक हवा से प्रोटीन बना रहे हैं। उनका दावा है कि इस दशक में ये सोयाबीन के दामों को टक्कर देगा।
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हवा से प्रोटीन बना रहा है ये देश, जानें कैसे
Tue, 14 Jan 2020 11:27 AM IST
रत्नप्रिया रत्नप्रिया
बीबीसी हिंदी
बीबीसी हिंदी
Published by: रत्नप्रिया रत्नप्रिया
Updated Tue, 14 Jan 2020 11:27 AM IST
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finland (File Photo)
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : PIXABAY
- इस महंगे प्रोटीन आटे जिसे सॉलेन भी कहा जाता है, के अनाज को चखने पर उसमें कोई स्वाद नहीं मिला। यही वैज्ञानिकों की योजना है। वो हर तरह के खाने को स्वाद के बिना रखना चाहते हैं।
- आइसक्रीम, बिस्कुट, पास्ता, नूडल्स, सॉस या ब्रेड को रीइनफोर्स करके पाम ऑयल जैसा उत्पाद बनाया जा सकता है।
- खोजकर्ताओं का कहना है कि इसका इस्तेमाल बेहतरीन मीट या मछली तैयार करने के लिए भी किया जा सकता है।
प्रतीकात्मक तस्वीर
- अगर चीजें योजना के मुताबिक रहीं, तो दुनिया में प्रोटीन उत्पादन की मांग और आपूर्ति को अनुमानित वक्त से सालों पहले पूरा किया जा सकता है।
- लेकिन, ये उन तमाम सिंथेसाइज्ड खानों की परियोजनाओं में से एक है जो भविष्य में बतौर विकल्प उपलब्ध हो सकते हैं।
- फर्म के सीईओ पासी वैनिक्का ने यूके की क्रैनफील्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है और फिनलैंड की लप्पीनरांटा यूनिवर्सिटी में पढ़ाते हैं। उन्होंने बताया कि ये आइडिया मूल रूप से स्पेस इंडस्ट्री के लिए साल 1960 के दशक में आया था।
- उन्होंने माना कि उनके प्लांट का काम कुछ धीमा चल रहा है लेकिन वो कहते हैं कि इसे 2022 तक तैयार कर लिया जाएगा।
कैसे बनता है हवा से प्रोटीन?
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- सॉलेन बनाने के लिए पानी से इलेक्ट्रोलिसिस के जरिए हाइड्रोजन को अलग किया जाता है। हाइड्रोजन, हवा से ली गई कार्बन डाइऑक्साइड और खनिज पदार्थ बैक्टीरिया को खिलाए जाते हैं, जिससे प्रोटीन बनता है।
- वो कहते हैं कि सबसे अहम फैक्टर है बिजली की कीमत। फर्म को उम्मीद है कि जैसे-जैसे नवीकरणीय ऊर्जा के स्रोत मिलेंगे, इसकी कीमत कम होती जाएगी।
- इस तकनीक की प्रगति देखकर पर्यावरण कैंपेनर जॉर्ज मॉनबिओ ने भी सराहना की है। जॉर्ज धरती पर भविष्य को लेकर चिंता जताते हैं, लेकिन वो यह भी कहते हैं कि सौर ऊर्जा की मदद से बनने वाले खाने से उन्हें उम्मीद है।
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भविष्य के लिए उम्मीद?
- उन्होंने कहा, ''खाद्य उत्पादन दुनिया को भीषण नुकसान पहुंचा रहा है। मछली पकड़ना और खेती बाड़ी मुख्य तौर पर जैव विविधता और वन्य जीवों के विलुप्त होने का सबसे बड़ा कारण हैं। खेती बाड़ी जलवायु परिवर्तन भी बड़ी वजह है।''
- ''लेकिन नाउम्मीदी के इस दौर में खेतीबाड़ी रहित खाद्य पदार्थ वो संभावनाएं पैदा कर रहे हैं जिनसे न सिर्फ लोगों को बल्कि धरती को भी बचाया जा सकता है। प्लांट बेस्ड फूड का रुख करके हम प्रजातियों और जगहों को भी बचा सकते हैं।''
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