स्वामी विवेकानन्द की जयंती 12 जनवरी को हर साल राष्ट्रीय युवा दिवस (National Youth Day) के रूप में मनाया जाता है। आज से 157 साल पहले 1863 में 12 जनवरी को कोलकाता में विवेकानंद का जन्म हुआ था। तब उनका नाम नरेंद्रनाथ दत्त रखा गया था। विवेकानंद ने दुनिया को भारत की युवा शक्ति का परिचय दिया और हमेशा युवाओं को उनकी शक्ति का एहसास कराया। वह देश के सभी युवाओं के लिए प्रेरणा रहे हैं। इस युवा दिवस के मौके पर हम आपको ऐसे ही कुछ युवाओं के बारे में जिनकी कहानी हर किसी के लिए प्रेरणा है। इन युवाओं के विचार और प्रेरणादायक संघर्ष आपमें नई ऊर्जा भर देंगे।
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National Youth Day: कहानी उन युवाओं की, जो आपको भी सपने पूरे करने का हौसला देंगे
Sat, 11 Jan 2020 05:21 PM IST
Mohit Mudgal
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
Published by: Mohit Mudgal
Updated Sat, 11 Jan 2020 05:21 PM IST
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आयशा चौधरी
आयशा चौधरी
- फोटो : Amar Ujala
- आयशा चौधरी साल 1996 में गुरुग्राम में इनका जन्म ऑटो इम्यून डिफिशिएंसी डिसऑर्डर के साथ हुआ था। जिसके कारण महज छह महीने की उम्र में उनका बोन मैरो ट्रांसप्लांट करना पड़ा था। लेकिन उनकी परेशानी यहीं खत्म नहीं हुई। इस ट्रांसप्लांट के बाद आयशा को पल्मनरी फाइब्रोसिस (Pulmonary Fibrosis) नामक गंभीर बीमारी हो गई।
- इस बीमारी के कारण आयशा के फेफड़ों में ऐसी कोशिकाएं विकसित होने लगीं, जिससे आयशा को सांस लेने में दिक्कत होने लगी। इन कोशिकाओं ने त्वचा को सख्त और मोटा कर दिया, जिससे आयशा के फेफड़ों तक ऑक्सीजन ठीक से पहुंच ही नहीं पा रही थी।
- बेहद छोटी उम्र में आयशा जिंदगी और मौत को करीब से देख रही थी। फिर आयशा की मां ने उनका ध्यान किताबों की तरह आकर्षित किया। एक इंटरव्यू में आयशा की मां ने बताया है कि उसे हमेशा लिखना पसंद था। फरवरी 2014 की बात है जब वह बिस्तर पर पड़ी थी। मैंने उसे ह्यू प्राथर की एक किताब दी और कहा कि इस किताब की लाखों प्रतियां बिक चुकी हैं। इस पर आयशा ने जवाब दिया - मैं ह्यू प्राथर से बेहतर लिख सकती हूं।
- महज 18 साल की उम्र में आयशा लेखिका बन गईं। उनकी किताब 'माय लिटिल एपिफैनीज' (My Little Epiphanies) को साल 2015 में जयपुर लिटरेरी फेस्ट में रिलीज किया गया था। लेकिन अपनी किताब की सफलता देखने के लिए ज्यादा दिनों तक वह जीवित नहीं रह सकीं।
- 2014 तक आयशा के फेफड़ों के ऑक्सीजन लेने की क्षमता 35 फीसदी थी, जो 2015 में 20 फीसदी रह गई। 24 जनवरी 2015 को आयशा की मृत्यु हो गई।
ओपरा विनफ्रे
ओपरा विनफ्रे
- फोटो : Amar Ujala
- ओपरा विनफ्रे एक अमेरिकी मीडिया उद्योजक, अभिनेत्री, निर्माता व लिपिकार हैं। उनका टॉक शो बेहद लोकप्रिय हुआ। शो को कई पुरस्कार मिले और इतिहास का सबसे ज्यादा रेटिंग वाला टीवी शो बन गया था। एक समय में ओपरा दुनिया की अकेली अश्वेत महिला अरबपति थीं। आज भी वह विश्व की सबसे प्रभावशाली महिलाओं में से एक हैं।
- ओपरा विनफ्रे कहती हैं कि एक काम करिए जो आपको लगता है आप नहीं कर सकते। असफल होइए। फिर से कोशिश करिए। दूसरी बार बेहतर कीजिए। जो लोग कभी ठोकर नहीं खाते, वह वे होते हैं जिन्होंने कभी ऊंचाई की चढ़ाई न की हो। ये आपका पल है, इसे पूरी तरह अपना बनाइए।
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मलाला यूसुफजई
मलाला यूसुफजई
- फोटो : Amar Ujala
- मलाला युसुफजई का जन्म 12 जुलाई 1997 को हुआ। मलाला को बच्चों के अधिकारों की कार्यकर्ता होने के लिए जाना जाता है। वह पाकिस्तान के खैबर-पख्तूनख्वा प्रांत के स्वात जिले में स्थित मिंगोरा शहर में रहती थी।
- 13 साल की उम्र में ही वह तहरीक-ए-तालिबान शासन के अत्याचारों के बारे में किसी और नाम से बीबीसी के लिए ब्लॉगिंग द्वारा स्वात के लोगों में नायिका बन गई। अक्तूबर 2012 में मात्र 14 साल की आयु में अपने उदारवादी प्रयासों के कारण वे आतंकवादियों के हमले का शिकार बनी, जिससे वे बुरी तरह घायल हो गई और अंतर्राष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में आ गई।
- वर्ष 2009 में न्यूयार्क टाइम्स ने मलाला पर एक फिल्म भी बनाई थी। स्वात में तालिबान का आतंक और महिलाओं की शिक्षा पर प्रतिबंध विषय पर बनी इस फिल्म के दौरान मलाला खुद को रोक नहीं पाई और कैमरे के सामने ही रोने लगी।
- अक्टूबर 2012 में स्कूल से लौटते वक्त उन पर आतंकियों ने हमला किया जिसमें वे बुरी तरह घायल हो गई। इस हमले की जिम्मेदारी तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) ने ली। बाद में इलाज के लिए उन्हें ब्रिटेन ले जाया गया जहां डॉक्टरों के अथक प्रयासों के बाद उन्हें बचा लिया गया।
- मलाला को साल 2011 अंतर्राष्ट्रीय बाल शांति पुरस्कार के लिए नामांकन किया गया। इसके साथ ही उन्हें अंतर्राष्ट्रीय बाल शांति पुरस्कार (2013), साखारफ (सखारोव) पुरस्कार (2013), मैक्सिको का समानता पुरस्कार (2013), संयुक्त राष्ट्र का 2013 मानवाधिकार सम्मान (ह्यूमन राइट अवॉर्ड), नोबेल पुरस्कार(2014)
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सौम्या शर्मा
सौम्या शर्मा
- फोटो : Social media
- सौम्या शर्मा ने राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, दिल्ली (National Law University - NLU Delhi) से कानून की पढ़ाई की है।
- उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा पहली बार 2017 में दी। एनएलयू से पढ़ाई पूरी होने के तुरंत बाद। तब सौम्या की उम्र 22 साल थी।
- उन्होंने प्रारंभिक परीक्षा पास कर ली। लेकिन मुख्य परीक्षा से करीह एक हफ्ते पहले से उन्हें बुखार हो गया।
- सौम्या बताती हैं कि पूरे सप्ताह मेरा बुखार नहीं उतरा। परीक्षा के दिन भी तापमान 102 से नीचे नहीं जा रहा था। कभी-कभी तो 103 डिग्री तक पहुंच रहा था। मुझे दिन में तीन बार स्लाइन ड्रिप चढ़ाई जा रही थी। यहां तक कि परीक्षा के बीच के ब्रेक में भी मुझे ड्रिप चढ़ी थी।
- बता दें कि सौम्या की सुनने की क्षमता भी काफी कमजोर है। वह हीयरिंग एड की मदद के बिना ठीक से सुन नहीं पातीं। लेकिन सौम्या ने इसका फायदा यूपीएससी परीक्षा में नहीं उठाया। उन्होंने सामान्य श्रेणी के तहत आवेदन किया था।
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