Pariksha Pe Charcha Highlights: देश के लिए शुक्रवार, एक अप्रैल, 2022 का दिन बेहद खास रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने बहुप्रतीक्षित कार्यक्रम परीक्षा पे चर्चा को संबोधित किया। दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में यह कार्यक्रम आयोजित हुआ और इसमें करीब 1000 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। इस दौरान पीएम मोदी ने छात्रों, शिक्षकों और अभिवावकों के विभिन्न प्रश्नों का उत्तर दिया। पीएम ने अपने संबोधन में बोर्ड परीक्षा, नई शिक्षा नीति से लेकर बालिकाओं के विकास समेत कई मुद्दों पर चर्चा की। इन्हीं बातों का हाइलाइट हम आपके लिए लेकर आए हैं इस खबर में।
Pariksha Pe Charcha Highlights: बोर्ड परीक्षा, नई शिक्षा नीति से लेकर बालिकाओं के विकास तक, जानें पीएम ने किन विषयों पर की चर्चा
Pariksha Pe Charcha Highlights: नई शिक्षा नीति और इससे जुड़े सवाल पर पीएम मोदी ने बताया कि इसे न्यू नहीं नेशनल एजुकेशन पॉलिसी कहना चाहिए। 2014 से ही हम नई नेशनल एजुकेशन पॉलिसी के काम पर लगे थे।
परीक्षा के समय घबराहट और तनाव से कैसे निपटे?
पीएम मोदी ने कहा कि मन में तय कर लीजिए कि परीक्षा जीवन का सहज हिस्सा है। हमारी विकास यात्रा के ये छोटे-छोटे पड़ाव हैं। इस पड़ाव से पहले भी हम गुजर चुके हैं। पहले भी हम कई बार परीक्षा दे चुके हैं। जब ये विश्वास पैदा हो जाता है तो आने वाले एक्जाम के लिए ये अनुभव आपकी ताकत बन जाता हैं। तनाव को पनपने मत दीजिए। अपनी सामान्य दिनचर्या को ही जारी रखें।
क्या ऑनलाइन शिक्षा चुनौतिपूर्ण है?
आइए परीक्षा को भी एक पर्व बना दें: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी #ParikshaPeCharcha
इस मुद्दे पर सवाल के जवाब में पीएम मोदी ने सवाल किया कि जब आप ऑनलाइन पढ़ाई करते हैं तो क्या आप सच में पढ़ाई करते हैं, या reel देखते हैं? दोष ऑनलाइन या ऑफलाइन का नहीं है। क्लासरूम में भी कई बार आपका शरीर क्लासरूम में होगा, आपकी आंखें टीचर की तरफ होंगी, लेकिन कान में एक भी बात नहीं जाती होगी, क्योंकि आपका दिमाग कहीं और होगा। ऑनलाइन शिक्षा को समस्या नहीं बल्कि अवसर मानना चाहिए। माध्यम नहीं बल्कि मन समस्या है। दिन भर में कुछ पल ऐसे निकालिए, जब आप ऑनलाइन भी नहीं होंगे, ऑफलाइन भी नहीं होंगे बल्कि इनरलाइन होंगे।
नई शिक्षा नीति पर भी हुई चर्चा
नई शिक्षा नीति और इससे जुड़े सवाल पर पीएम मोदी ने बताया कि इसे न्यू नहीं नेशनल एजुकेशन पॉलिसी कहना चाहिए। 2014 से ही हम नई नेशनल एजुकेशन पॉलिसी के काम पर लगे थे। हिंदुस्तान के हर कोने में इस काम के लिए इस विषय पर ब्रेनस्टॉर्मिंग हुआ। उससे जो ड्राफ्ट तैयार हुआ उसे फिर लोगों के बीच भेजा गया, उस पर 15-20 लाख इनपुट आए। इतने व्यापक प्रयास के बाद नई शिक्षा नीति आई है। नई शिक्षा नीति को देश के नागरिकों, विद्यार्थियों, अध्यापकों ने बनाया है और देश के भविष्य के लिए बनाया है। हिंदुस्तान के हर तबके में इसका पुरजोर स्वागत हुआ है। पीएम ने कहा कि हमें 21वीं सदी के अनुकूल अपनी सारी व्यवस्थाओं और सारी नीतियों को ढालना चाहिए। अगर हम अपने आपको इन्वॉल्व नहीं करेंगे, तो हम ठहर जाएंगे और पिछड़ जाएंगे।
परिजनों-शिक्षकों के डर पर भी बोले पीएम
छात्राओं ने पीएम मोदी से सवाल किया की क्या परीक्षा को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। घरवालों और शिक्षकों से डरें या फिर इसे त्योहार की तरह मनाना चाहिए? इस पर पीएम मोदी ने कहा कि मैं सबसे पहले परिजनों से और शिक्षकों से ये कहना चाहूंगा कि आप अपने सपने, जिन्हें आप पूरा नहीं कर पाए, उन्हें आप बच्चों पर डालने का प्रयास न करें। हमारे बच्चों के विकास में ये सब बहुत चिंता का विषय है। हर बच्चे की अपनी सामर्थ होती है। परिजनों, शिक्षकों के तराजू में वो फिट हो या न हो, लेकिन ईश्वर ने उसे किसी न किसी विशेष ताकत के साथ भेजा है। हमें उन चीजों को स्वीकार करना है, जो हमारे भीतर सहज रूप से है।

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