मेट्रो लाखों लोगों की जिंदगी आसान बना रही है। दिल्ली के अलावा अब अलग-अलग शहरों में भी लोग एक जगह से दूसरे जगह जाने के लिए मेट्रो को सस्ता और टिकाऊ साधन मान रहे हैं। मेट्रो में सफर करने वाले लोगों के चेहरे बदल सकते हैं पर मेट्रो के अंदर सफर के दौरान एक आवाज पूरे समय हमारे साथ रहती है। एक लड़के और एक लड़की की वह आवाज अंतिम स्टेशन तक लगातार हमारे साथ चलती है। पर क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर यह आवाज किसकी है? यहां हम आपको उन दो शख्सों के बारे में बता रहे हैं जो मेट्रों में बोलते हैं कि 'दरवाजे दाईं तरफ खुलेंगे। इनके बारे में पढ़ते हैं आगे...
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'दरवाजे दाईं तरफ खुलेंगे'.. किसकी है मेट्रो में गूंजती ये आवाज
Fri, 03 Jan 2020 12:16 PM IST
Garima Garg
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
Published by: Garima Garg
Updated Fri, 03 Jan 2020 12:16 PM IST
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शम्मी नारंग और रिनी सिमोन खन्ना
- फोटो : social media
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शम्मी नारंग
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शम्मी नारंग
ये हैं शम्मी नारंग। उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि है कि वह दूरदर्शन में एक लाख उम्मीदवारों में से चुने गए थे और 1970-80 के दशक के दौरान वह दूरदर्शन का एक प्रसिद्ध चेहरा हुआ करते थे। आज भी वह एक लोकप्रिय और सफल वॉयस आर्टिस्ट हैं।
ये हैं शम्मी नारंग। उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि है कि वह दूरदर्शन में एक लाख उम्मीदवारों में से चुने गए थे और 1970-80 के दशक के दौरान वह दूरदर्शन का एक प्रसिद्ध चेहरा हुआ करते थे। आज भी वह एक लोकप्रिय और सफल वॉयस आर्टिस्ट हैं।
शम्मी नारंग
- फोटो : social media
आपको जानकर हैरानी होगी कि दिल्ली मेट्रो, रैपिड मेट्रो रेल गुड़गांव, मुंबई मेट्रो, बैंगलोर मेट्रो, हैदराबाद मेट्रो रेल और जयपुर मेट्रो में जिसकी आवाज सुनाई देती है, वह शम्मी नारंग ही हैं। कुछ लोगों का मानना है कि मेट्रो में गूजने वाली आवाज के पीछे कोई कोई इंसान नहीं बल्कि टेक्नोलॉजी है। पर बता दें कि अनाउंसमेंट के पीछे कोई तकनीकी आवाज नहीं है।
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शम्मी नारंग
- फोटो : Social media
रिनी सिमोन खन्ना-
जब आप मेट्रो का सफर करते हैं तो उस दौरान एक लड़की की आवाज भी सुनते हैं। वे हैं रिनी सिमोन खन्ना। 1985-2001 तक दूरदर्शन में न्यूज रीडर के पद पर काम करने वाली रिनी को 9 अलग-अलग स्कूलों में पढ़ाई करनी पड़ी। इसके अलावा उन्होंने वॉइस ओवर आर्टिस्ट और एंकरिंग के पद पर भी काम किया है। अलग-अलग स्कूलों में पढ़ने के पीछे का कारण था उनके पिता। चूकि उनके पिता भारतीय वायु सेना में थे इसलिए रिनी को अलग-अलग विद्यालयों में दाखिला लेना पड़ा।
जब आप मेट्रो का सफर करते हैं तो उस दौरान एक लड़की की आवाज भी सुनते हैं। वे हैं रिनी सिमोन खन्ना। 1985-2001 तक दूरदर्शन में न्यूज रीडर के पद पर काम करने वाली रिनी को 9 अलग-अलग स्कूलों में पढ़ाई करनी पड़ी। इसके अलावा उन्होंने वॉइस ओवर आर्टिस्ट और एंकरिंग के पद पर भी काम किया है। अलग-अलग स्कूलों में पढ़ने के पीछे का कारण था उनके पिता। चूकि उनके पिता भारतीय वायु सेना में थे इसलिए रिनी को अलग-अलग विद्यालयों में दाखिला लेना पड़ा।
आखिर कैसे हुआ इन दोनों का सिलेक्शन?
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शम्मी नारंग
- फोटो : social media
सूत्रों के मुताबिक शम्मी नारंग ने बताया कि जब मेट्रो का ट्रायल चल रहा था तो उस वक्त डीएमआरसी की एक मीटिंग चल रही थी, जहां डीएमआरसी के चैयरमेन श्रीधरन उपस्थित थे। उस दौरान चैयरमेन ने मेरी और रिनी की आवाज का जिक्र किया था। तब हमारी आवाज का ट्रायल हुआ और सबको हमारी आवाज बहुत पसंद आई। दिल्ली गुड़गांव और नोएडा हमारे हिस्से में दे दिए गए। एक इंटरव्यू में शम्मी ने कहा कि मेट्रों ने हमारी आवाज को अमर कर दिया है। मतलब जब तक मेट्रो रहेगी तब तक हमारी आवाज भी रहेगी।
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