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Actor Adah Sharma speaks about her role in the movie Bastar The Naxal Story at Vande Veeram Song Launch
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Adah Sharma: हर बेटी को सीखने चाहिए आत्मरक्षा के कौशल, ‘बस्तर द नक्सल स्टोरी’ शहीदों को हमारा सलाम
फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ में जबरिया धर्म परिवर्तन के खिलाफ आवाज उठाने के बाद अदा शर्मा अब एक ऐसे पुलिस अधिकारी का किरदार फिल्म ‘बस्तर द नक्सल स्टोरी’ में निभाने जा रही हैं, जिसे अपनी ही सरकार से मदद नहीं मिलती है।
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अदा शर्मा
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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मार्शल आर्ट्स में निपुण अदाकारा अदा शर्मा की अगली फिल्म ‘बस्तर द नक्सल स्टोरी’ एक ऐसे विषय पर बनी फिल्म है जिसकी तरफ मुख्यधारा के सिनेमा का ध्यान कम ही गया है। यह सर्वविदित तथ्य है कि बीते पांच से छह दशकों में नक्सली हमलों में मारे गए सुरक्षाकर्मियों की संख्या भारत-पाकिस्तान युद्धों में मारे गए फौजियों से कहीं ज्यादा रही है। फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ में जबरिया धर्म परिवर्तन के खिलाफ आवाज उठाने के बाद अदा शर्मा अब एक ऐसे पुलिस अधिकारी का किरदार फिल्म ‘बस्तर द नक्सल स्टोरी’ में निभाने जा रही हैं, जिसे अपनी ही सरकार से मदद नहीं मिलती है। अदा शर्मा के मुताबिक, इस किरदार को निभाने के लिए उन्हें इतनी अधिक मेहनत करनी पड़ी है कि वह अब भी इसका दर्द महसूस कर रही हैं।
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बस्तर द नक्सल स्टोरी टीम
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अदा शर्मा की गिनती हिंदी सिनेमा की उन चंद अभिनेत्रियों में होती है जो शास्त्रीय नृत्य और युद्धकौशल कलाओं में समान रूप से निपुण हैं। फिल्म ‘बस्तर द नक्सल स्टोरी’ के पहले गाने वंदे वीरम के लॉन्च पर ‘अमर उजाला’ के प्रश्नों के उत्तर देते हुए अदा शर्मा ने कहा, ‘देश की हर बेटी को आत्मरक्षा के लिए मार्शल आर्ट्स (युद्ध कौशल) की कलाएं सीखनी ही चाहिए। मैंने इसका प्रशिक्षण बहुत शुरू में ही ले लिया था और ये कला मुझे अभिनय की तमाम दूसरी कलाओं में मदद करती है। अपने ही करतब से खुद को चोट न लगने की बात भी ये कलाएं सिखाती हैं। फिल्म ‘बस्तर द नक्सल स्टोरी’ में आईजी नीरजा माधवन का किरदार करने में मुझे इससे काफी मदद मिली।’
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इंदिरा तिवारी, अदा शर्मा
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
खुद को आईजी नीरजा माधवन के किरदार के लिए तैयार करने की खातिर अदा शर्मा ने फिल्म की शूटिंग शुरू होने से पहले काफी शोध किया। वह बताती हैं, ‘मैंने इस किरदार को करने से पहले इसकी देह भाषा और मनोदशा को समझा। ये एक ऐसा किरदार है जिसकी प्रेरणा कई असली अफसरों से ली गई है। मैं इस बारे में और जानकारी के लिए छत्तीसगढ़ गई। बस्तर में काम करने वाले और वहां तैनात रहे पुलिस अफसरों से मिली और उनकी कार्यप्रणाली को समझा। फिल्म में इस किरदार को निभाते समय मैंने जो बंदूकें संभाली हैं, वह बहुत ही वजनी रखी गईं ताकि परदे पर उनका असर असली जैसा लगे और ये सब करने में बहुत मेहनत भी लगी।’
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बस्तर द नक्सल स्टोरी टीम
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
फिल्म ‘बस्तर द नक्सल स्टोरी’ के एक्शन दृश्यों की शूटिंग का क्या उन पर शारीरिक और मानसिक प्रभाव भी पड़ा है? इस बारे में अदा शर्मा कहती हैं, ‘फिल्म के निर्देशक सुदीप्तो सेन ने इस फिल्म को एक एक्शन फिल्म की तरह ही रचा है। लोग मुझसे अक्सर एक हॉरर फिल्म की मांग करते रहे हैं, मेरा कहना है कि फिल्म ‘बस्तर द नक्सल स्टोरी’ जैसा हॉरर आपने हाल फिलहाल में बड़े परदे पर नहीं देखा होगा। इस फिल्म की शूटिंग के लिए मैंने जो वजनी बंदूकें उठाई हैं, उसके चलते मेरी रीढ़ ही हड़्डी अब भी दुखती है और इसके चलते मैं हील्स वाली सैंडल तक नहीं पहन पा रही हूं। मैं शूटिंग के बाद से सिर्फ चप्पलों में हूं।’
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बस्तर द नक्सल स्टोरी टीम
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अदा शर्मा ने फिल्म के गाने वंदे वीरम का जिक्र करते हुए नक्सली हमलों में शहीद हुए सुरक्षाकर्मियों व पुलिसकर्मियों के परिजनों के साहस को सलाम किया। अदा ने कहा, ‘फिल्म ‘बस्तर द नक्सल स्टोरी’ उन सभी शहीदों का हमारा सैल्यूट है जिन्होंने देश के एक हिस्से में कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी। उनके घरवालों पर जो बीती, उसे मैंने खुद इन परिजनों से मिलकर समझा है। ये लोग हमारे देश की थाती हैं और इनके हौसले और साहस को सलाम करने के लिए बनी है फिल्म ‘बस्तर द नक्सल स्टोरी’।’
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