Angry Young Men: 'खाने-पहनने को कुछ नहीं था, स्टेशन पर सोते थे', शुरुआती दिनों को याद कर भावुक हुए जावेद अख्तर
जावेद अख्तर फिल्म निर्माता गुरु दत्त या राज कपूर के अधीन सहायक निर्देशक के रूप में काम करने के सपने लेकर बॉम्बे आए थे। जावेद ने उस समय को याद करते हुए कहा, "उस समय मैं उन निर्देशकों का बहुत प्रशंसक था। मुझे यकीन था कि मैं भी कुछ ही समय में निर्देशक बन जाऊंगा।" हालांकि, शहर में उनके शुरुआती दिनों की सच्चाई सिनेमा की चकाचौंध भरी दुनिया से बहुत दूर थी।
जावेद ने बताया, "मैं अपने पिता के घर में ठीक पांच दिन रहा और फिर मैं अपने आप ही चला गया।" उन्होंने आगे बताया रहने के लिए कोई ठिकाना न होने के कारण वह दोस्तों के साथ रहते थे। रेलवे स्टेशनों, पार्कों, स्टूडियो परिसरों और बेंचों पर सोते थे। जीवनयापन के लिए संघर्ष बहुत कठिन था और उन्होंने वह कठिन दौर अच्छे से जीया है।
यही नहीं, उन्होंने आगे बताया, "मेरी आखिरी पैंट और एकमात्र पैंट इस हद तक फट गई थी कि उसे अब और नहीं पहना जा सकता था। और मेरे पास कोई और पैंट नहीं थी।" उन्होंने आगे बताया कि 15 साल की उम्र में अपनी मौसी का घर छोड़ने के बाद, उन्होंने कभी अपने परिवार से मदद नहीं मांगी, बल्कि खुद ही सब कुछ करने का फैसला लिया।
उस मुश्किल समय को याद करते हुए जावेद रो पड़े और बताया कि किस तरह चीजों अभाव के अनुभव ने उन पर गहरा असर छोड़ा है। उन्होंने कहा, "अगर आप अपने जीवन में भोजन या नींद से वंचित रहे हैं तो यह आप पर एक गहरा असर छोड़ता है, जिसे आप कभी नहीं भूल पाएंगे। आज भी जब भी वे आलीशान होटलों में ठहरते हैं, तो उन्हें अपने शुरुआती दिनों की याद आती है।"
