बात इसी महीने के पहले शनिवार की है। अंधेरी पश्चिम में कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी के पास नए नए बने सिन्टा टॉवर स्थित वेदा कुनबा थियेटर में शेक्सपियर के मशहूर नाटक ओथेलो के हिंदी अनुकूलन का मंचन हो रहा है। नाटक शुरू होने में अभी थोड़ा समय है। एक सजी धजी सी युवती स्टेज से नीचे उतर कर दर्शकों की कतारों में बैठे साथियों से बातें कर रही है। पूछ रही है कि सब कुछ ठीक ठाक से तैयार हुआ कि नहीं। मंच पर जाकर शायद वह अपने कदमों को दृश्य के भूगोल के हिसाब से नाप भी रही हैं। किसी नाटक में अभिनय करने से पहले की ऐसी तैयारी तो करीब करीब सारे कलाकारों में ही दिखती है लेकिन इस युवती का समर्पण अलग स्तर का है।
Apna Adda 14: वकालत की पढ़ाई पूरी कर बनी इयागो की एमीलिया, गुवाहाटी की प्राची का सिर्फ दो साल में चमका नाम
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नाटक शुरू होते ही दर्शकों को अपनी लय के साथ लेने की कोशिश करता है और इसमें सबसे ज्यादा जिस कलाकार के साथ दर्शक जुड़ाव महसूस करते हैं वह हैं, इयागो की पत्नी एमीलिया के किरदार में प्राची पटवारी। दर्शकों की खूब तालियां पाने वाली प्राची का अभिनय की दुनिया से अभी दो साल पहले तक दूर दूर तक कोई वास्ता ही नहीं था। कथक सीखते सीखते एक दिन उनकी गुरु रेनू शर्मा ने अपनी कक्षा की सारी युवतियों को फिल्म ‘लव आजकल’ की जरूरत के बारे में समझाया और इसी फिल्म के सेट पर पहली बार नर्तकी के रूप में पहली बार कैमरे से सामने होने पर प्राची को समझ आई वह दुनिया जिसका हिस्सा बनकर उन्हें लगा कि बचपन से वह यही तो एक सपना देखती आई हैं।
प्राची के परिवार में दूर दूर तक किसी का मनोरंजन से कोई नाता नहीं रहा है। पिता पुरुषोत्तम पटवारी गुवाहाटी, असम में वकील हैं। माता रमा पटवारी ने भी वकालत की है लेकिन अब वह दवाइयों के वितरण का कारोबार संभालती हैं। माता-पिता वकील तो बिटिया का भी उसी तरफ रुझान तो बना ही होगा? पूछने पर प्राची के चेहरे पर एक चमक सी दिखती है, ‘हां, मैंने अपने माता पिता का मन रखने के लिए एलएलबी की है, लेकिन मुझे वकील कभी बनना ही नहीं था। मैंने स्नातक करने के लिए दिल्ली में ही आवेदन किया था, लेकिन वहां प्रवेश नहीं मिला तो मैं मुंबई आ गई। सोफिया कॉलेज में मन लगाकर पढ़ाई ही कर रही थी कि कॉलेज में दूसरे छात्रों को देखकर पहली बार महसूस हुआ कि मनोरंजन जगत ऐसा भी कोई स्वप्नलोक नहीं है जिस तक पहुंचा न जा सके। ये सच है कि गुवाहाटी जैसे शहर में ये सब युवतियां सोचती भी नहीं हैं।’
फिर गाड़ी आगे कैसे बढ़ी? पूछने पर प्राची बताती हैं, ‘मैंने मशहूर कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा का एक विज्ञापन देखा था। बस यूं ही अपना परिचय वीडियो शूट करके उन्हें भेज दिया। और, चौंकाने की बारी मेरी तब आई जब उनका फोन आ गया और उन्होंने मुझे बुला भी लिया। बात एक चॉकलेट के विज्ञापन से शुरू हुई। फिर उनके नाट्य उत्सव खिड़कियां तक पहुंची। मुंबई में एक नाटक करने के बाद उनके साथ राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के भारंगम तक पहुंचकर भी मैंने नाटक किया। फिर अभिनय की बारीकियां समझने के लिए अनुपम खेर के संस्थान की कार्यशालाओं में भी हिस्सा लिया।’
और, इस सारी तैयारी की असली दमक प्राची पटवारी ने दिखाई नाटक ‘ओथेलो’ के वेदा कुनबा थियेटर में हुए हिंदी अनुकूलन में। मुंबई आने के बाद से प्राची का ये तीसरा नाटक है और बस तीन नाटकों ने ही उनके अभिनय के चर्चे पूरे शहर में कर दिए हैं। बीते शनिवार हुए ‘अपना अड्डा’ कार्यक्रम में भी स्वतंत्र फिल्म (इंडी फिल्म) निर्माता अक्षय भगवानजी ने उन्हें एक नैसर्गिक प्रतिभा वाली अभिनेत्री बताया। अक्षय की फिल्म ‘मैं लड़ेगा’ की इन दिनों काफी तारीफ हो रही है और वह अब अपनी अगली फिल्म की तैयारियों में व्यस्त हो चुके हैं। प्राची मानती हैं कि हिंदी फिल्म जगत में एक अच्छा मौका पाना, किसी इंजीनियरिंग कॉलेज या मेडिकल कॉलेज मे प्रवेश के लिए सीट पाने से कहीं ज्यादा मुश्किल है। लेकिन, वह ये भी कहती हैं, ‘सही दिशा निर्देश, सही संपर्क और सही रास्ता हर उम्मीदवार को सफलता दिलाता जरूर है।’