हिंदी सिनेमा के शौकीनों ने जिस पहले सितारे के पोस्टर अपने घरों में लगाने शुरू किए, उसका नाम है शम्मी कपूर। और, देश के इस पहले पोस्टर ब्वॉय को सुपरस्टार बनाने वाले फिल्ममेकर का नाम है, शक्ति सामंत। देहरादून में पढ़े और कलकत्ता में कढ़े शक्ति हीरो बनने के चक्कर में कई नामी निर्देशकों के असिस्टेंट डायेरक्टर भी बने, लेकिन किसे पता था कि जो खुद हीरो नहीं बन पाया, वो आगे चलकर खुद सिनेमा को इतने सुपरस्टार देगा। उनकी फिल्म आराधना में एक कमाल के डायरेक्टर ने एक्टिंग की और कमाल ये भी कि ये डायरेक्टर भी मुंबई हीरो बनने ही पहुंचा। चलिए आज आपको बताते शक्ति सामंत की 10 ऐसी फिल्में जिनमें से तमाम आपने भी देखी होंगी लेकिन शायद इसके डायरेक्टर के नाम पर इतना गौर नहीं किया होगा।
इस डायरेक्टर ने बनाया राजेश खन्ना को पहला सुपरस्टार और शम्मी कपूर को दिलाया पोस्टर ब्वॉय का तमगा
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इंस्पेक्टर (1956)
साल 1955 में बहू के बाद शक्ति सामंत की इंस्पेक्टर दूसरी फिल्म थी। यह थ्रिलर जॉनर की फिल्म थी। फिल्म में अशोक कुमार, गीता बाली और प्राण मुख्य किरदारों में दिखे। पूरी फिल्म की कहानी एक कत्ल के इर्द गिर्द घूमती है जिसे सुलझाने की जिम्मेदारी इंस्पेक्टर श्याम (अशोक कुमार) को मिलती है। यह शक्ति सामंत के शुरुआती दिनों की फिल्म थी जिसके बाद वह इंडस्ट्री में एक काबिल निर्देशक के रूप में पहचाने जाने लगे।
हावड़ा ब्रिज (1958)
इस फिल्म में अशोक कुमार और मधुबाला ने साथ काम किया और इसी फिल्म से शक्ति सामंत ने बॉक्स ऑफिस पर सिक्का जमा दिया। फिल्म में ओपी नय्यर ने आशा भोसले से कमाल के गाने गवाए जो लोगों के दिलों पर छा गए। फिल्म का गाना मेरा नाम चिन चिन चू काफी पसंद किया गया जिसे सलाम बॉम्बे फिल्म में फिर से इस्तेमाल किया गया। फिल्म में अशोक कुमार और चमन पुरी भाइयों के किरदार में हैं। उनके पिता का रंगून में सफल व्यापार है। लेकिन तभी एक भाई (चमन) अचानक से गायब हो जाता है और फिल्म की कहानी रंगून से कलकत्ता पहुंच जाती है।
चाइना टाउन (1962)
अशोक कुमार जैसे सुपरस्टार के साथ काम करने के बाद शक्ति सामंत ने इस फिल्म में शम्मी कपूर को साथ लिया। फिल्म में उन्होंने डबल रोल निभाया। शकीला के साथ हेलन भी नजर आईं। शम्मी कपूर, शेखर नामक एक गायक के रोल में हैं जो अपनी विधवा मां के साथ दार्जिलिंग में रहता है। वह रीता (शकीला) से प्यार करने लगता है जो अमीर परिवार से ताल्लुक रखती है। रीता के पिता दोनों के रिश्ते से खुश नहीं होते हैं जिसके बाद दोनों की जिंदगी में कई अनूठे मोड़ आते हैं। फिल्म में मोहम्मद रफी द्वारा गाया गाना बार बार देखो काफी पसंद किया गया।
कश्मीर की कली (1964)
इस फिल्म के साथ ही शम्मी कपूर और शक्ति सामंत का कॉम्बिनेशन हिट साबित हो गया था। यह शर्मिला टैगोर की डेब्यू हिंदी फिल्म थी। फिल्म में शम्मी कपूर एक अमीर परिवार के बेटे होते हैं जो मां के द्वारा शादी का दबाव बनाने के कारण कुछ दिनों के लिए घर से दूर चले जाते हैं। वह कश्मीर पहुंच जाते हैं जहां उनकी मुलाकात शर्मिला टैगोर से होती है जिसके बाद दोनों एक दूसरे से प्यार करने लगते हैं और शादी करने का निश्चय भी कर लेते हैं लेकिन दोनों की जिंदगी में एक एक करके कुछ मुश्किलें भी आती हैं जिससे कहानी में नया मोड़ आ जाता है। फिल्म का गाना ये चांद सा रोशन चेहरा काफी पंसद किया गया था।