बॉलीवुड सुपरस्टार आमिर खान आज अपना 57वां जन्मदिन मना रहे हैं। उनके बर्थडे पर देशभर से उन्हें शुभकामनाएं मिल रही हैं। अपने करियर में कई जबरदस्त फिल्में देने वाले अमिर ने महज आठ साल की उम्र में ही एक्टिंग की दुनिया में कदम रख दिया था। साल 1973 में आई फिल्म 'यादों की बारात' में उन्होंने छोटा सा किरदार निभाया था। यह फिल्म उनके चाचा नासिर हुसैन ने बनाई थी। हालांकि, बतौर लीड एक्टर उन्होंने अपना एक्टिंग डेब्यू 'कयामत से कयामत तक' से किया था। यह फिल्म उस समय की सबसे बड़ी हिट साबित हुई थी। इस फिल्म की रिलीज के बाद आमिर रातोंरात स्टार बन गए थे। किसी भी फिल्म में काम करने से पहले आमिर उसके किरदार में पूरी तरह से डूब जाते हैं। यही वजह है कि फिल्म इंडस्ट्री में उन्हें मिस्टर परफेक्शनिस्ट के नाम से भी जाना जाता है। आज उनके जन्मदिन के मौके पर हम आपको उनसे जुड़ी पांच ऐसी बातें बताने जा रहे हैं जिनसे आज भी कई लोग अंजान हैं।
आमिर खान का 57वां बर्थडेः एक्टर से जुड़ी पांच ऐसी बातें जिसे जानकर हैरान रह जाएंगे आप
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पिता नहीं चाहते थे बेटे को एक्टर बनाना
आमिर खान अपनी एक्टिंग के दम पर बॉलीवुड पर राज करते हैं, लेकिन बहुत कम लोगों को ये बात पता होगी कि उनके पिता कभी नहीं चाहते थे कि वह एक्टर बने। अवन्तर नाम के एक थिएटर समूह में दो साल तक काम करने के बाद उन्होंने अभिनय को करियर के रूप में चुना था। अपनी पहली शॉर्ट फिल्म में उन्होंने एक्टिंग के साथ-साथ असिस्टेंट डायरेक्टर, स्पॉटबॉय के रूप में भी काम किया था। इस शॉर्ट फिल्म में उनके दोस्त आदित्य भट्टाचार्य ने भी काम किया था।
टेनिस प्लेयर बनना चाहते थे आमिर
एक्टिंग से पहले आमिर एक टेनिस खिलाड़ी बनना चाहता थे। स्कूल के दिनों में वह काफी अच्छा टेनिस खेला करते थे। उन्होंने अपने स्कूल के लिए कई राज्य स्तरीय लॉन टेनिस चैंपियनशिप खेली थी। रोजर फेडरर उनके पसंदीदा टेनिस खिलाड़ी हैं।
पहली फिल्म के प्रमोशन के लिए चिपकाए पोस्टर्स
फिल्म 'कयामत से कयामत तक' को आज भी लोग काफी पसंद करते हैं। लेकिन बहुत कम लोगों को पता होगा कि फिल्म का बजट कम होने की वजह से आमिर और एक्टर राज जुत्शी इसके प्रमोशन के लिए बसों और ऑटो पर फिल्मों के पोस्टर चिपकाते थे। इस दौरान वह लोगों को बताते भी थे कि उन्होंने इस फिल्म में लीड रोल प्ले किया है।
अवॉर्ड शो से बनाते हैं दूरी
आमिर अवॉर्ड शो से काफी दूरी बनाकर रखते हैं। कहा जाता है कि साल 1990 में 'घायल' के लिए सनी देओल को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार मिलने के बाद से उनका नजरिया बदल गया और उन्होंने ऐसे इवेंट से परहेज शुरू कर दिया। अब, आमिर ऑस्कर को छोड़कर किसी भी अवॉर्ड शो पर विश्वास नहीं करते हैं।