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इस अभिनेत्री ने मजबूरी में किया फिल्मों में काम, जवाहरलाल नेहरू से मिला था विशेष पुरस्कार
Wed, 08 Jan 2020 08:12 AM IST
भावना शर्मा
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: भावना शर्मा
Updated Wed, 08 Jan 2020 08:12 AM IST
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बॉलीवुड की दिग्गज एक्ट्रेस नंदा का जन्म 8 जनवरी 1939 को हुआ था। नंदा अपने दौर की बेहद खूबसूरत और लाजवाब अदाकारा थीं। जब बॉलीवुड में नंदा ने काम करना शुरू किया था तो उनकी छवि 'छोटी बहन' वाली बन गई थी। क्योंकि पांच साल की उम्र से ही उन्होंने हीरो की छोटी बहन के रोल करने शुरू कर दिए थे । लेकिन बाद में उन्होंने अपनी पहचान बदली और हीरोइन बनीं । नंदा ने फिल्म 'जब-जब फूल खिले', 'गुमनाम' और 'प्रेम रोग' जैसी हिट फिल्मों में काम किया है।
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फिल्मों में उनकी एंट्री की कहानी बड़ी ही दिलचस्प है। साल 1944 में वो पांच साल की थीं। एक दिन जब वो स्कूल से लौटीं तो उनके पिता ने कहा कि कल तैयार रहना। फिल्म के लिए तुम्हारी शूटिंग है। इसके लिए तुम्हारे बाल काटने होंगे। बता दें कि नंदा के पिता विनायक दामोदर कर्नाटकी मराठी फिल्मों के सफल अभिनेता और निर्देशक थे। बाल काटने की बात सुनकर नंदा नाराज हो गईं। उन्होंने कहा, 'मुझे कोई शूटिंग नहीं करनी।' बड़ी मुश्किल से मां के समझाने पर वो शूटिंग पर जाने को राजी हुईं।
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वहां उनके बाल लड़कों की तरह छोटे-छोटे काट दिए गए। इस फिल्म का नाम था 'मंदिर'। इसके निर्देशक नंदा के पिता दामोदर ही थे। फिल्म पूरी होती इससे पहले ही नंदा के पिता का निधन हो गया। घर की आर्थिक हालत बिगड़ने के चलते नंदा के छोटे कंधों पर जिम्मेदारी का बोझ आ गया। मजबूरी में उन्होंने फिल्मों में अभिनय करने का फैसला लिया। चेहरे की सादगी और मासूमियत को उन्होंने अपने अभिनय की ताकत बनाई । वो रेडियो और स्टेज पर भी काम करने लगीं।
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नन्हे कंधों पर परिवार की जिम्मेदारी उठाए हुए नंदा महज 10 साल की उम्र में ही हीरोइन बन गईं। लेकिन हिन्दी सिनेमा की नहीं बल्कि मराठी सिनेमा की। दिनकर पाटिल की निर्देशित फिल्म ‘कुलदेवता’ के लिए नंदा को पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने विशेष पुरस्कार से नवाजा था। नंदा ने कुल 8 गुजराती फिल्मों में काम किया। हिंदी में नंदा ने बतौर हीरोइन 1957 में अपने चाचा वी शांता राम की फिल्म 'तूफान और दिया' में काम किया था। 1959 में नंदा ने फिल्म 'छोटी बहन' में राजेंद्र कुमार की अंधी बहन का किरदार निभाया था। उनका अभिनय दर्शकों को बहुत पसंद आया।
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उस दौरान लोगों ने नंदा को सैकड़ों राखियां भेजी थीं। इसी साल राजेंद्र कुमार के साथ उनकी फिल्म 'धूल का फूल' सुपरहिट रही। इस फिल्म ने नंदा को बुलंदियों पर पहुंचा दिया। बहन के रोल उनका पीछा नहीं छोड़ रहे थे। नंदा एक बार फिर 1960 की फिल्म काला बाजार में देव आनंद की बहन बनीं। नंदा ने सबसे ज्यादा 9 फिल्में शशिकपूर के साथ कीं। उन्होंने उनके साथ 1961 में ‘चार दीवारी’ और 1962 में ‘मेंहदी लगी मेरे हाथ’ जैसी फिल्में कीं लेकिन शशिकपूर के साथ सुपरहिट फिल्म रही ‘जब जब फूल खिले’। कई हिट फिल्में देने के बावजूद नंदा की अभिनय प्रतिभा का सही इस्तेमाल कम ही किया गया।