हिंदी सिनेमा के दिग्गज निर्माता-निर्देशक यश चोपड़ा का जन्मदिन 27 सितंबर को होता है। उन्होंने बॉलीवुड को कई सदाबहार फिल्में दी हैं। यश चोपड़ा की फिल्मों को हिंदी सिनेमा में खास योगदार के तौर पर देखा जाता रहा है। यश चोपड़ा के जन्मदिन के साथ ही आज यश राज फिल्म्स ने भी 50 साल पूरे कर लिए हैं। वहीं पिता के जन्मदिन पर आदित्य चोपड़ा भावुक हो गए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट साझा करते हुए बताया है कि यश चोपड़ा द्वारा यश राज फिल्म्स की शुरुआत कैसे हुई थी।
एक छोटे कमरे से यश राज ने शुरू किया था अपना फिल्मी सफर, फिर इस तरह हासिल किया बड़ा मुकाम
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यश राज फिल्म्स के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर आदित्य चोपड़ा ने एक नोट साझा किया है। इस नोट में उन्होंने लिखा है, '1970 में, मेरे पिता यश चोपड़ा ने अपने भाई श्री. बीआर चोपड़ा की छत्र-छाया की सुरक्षा को त्याग कर अपनी खुद की कंपनी बनाई। उस समय तक, वह बीआर फिल्म्स के केवल एक मुलाजिम थे और उनके पास अपना कोई सरमाया नहीं था। वह नहीं जानते थे कि एक कारोबार कैसे चलाया जाता है। उन्हें इस बात की भी खबर नहीं थी कि एक कंपनी चलाने के लिए किन चीजों की जरूरत पड़ती है। उस समय यदि उनके पास कुछ था, तो अपनी प्रतिभा और कड़ी मेहनत पर दृढ़ विश्वास और आत्म-निर्भर बनने का एक ख्वाब।'
नोट में आगे लिखा है, 'एक रचनात्मक व्यक्ति के उसी संकल्प ने यश राज फिल्स को जन्म दिया। राजकमल स्टूडियो के मालिक श्री वी. शांताराम ने उन्हें उनके दफ्तर के लिए अपने स्टूडियो में एक छोटा सा कमरा दे दिया। तब मेरे पिताजी को यह नहीं मालूम था कि उस छोटे से कमरे में शुरू की गई वह छोटी सी कंपनी एक दिन भारतीय फिल्म इंडस्ट्री की सबसे बड़ी फिल्म कंपनी बन जाएगी। 1995 में, जब यश राज फिल्म्स (YRF) ने अपने 25वें वर्ष में कदम रखा, तो मेरी पहली फिल्म 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे' रिलीज हुई। उस फिल्म की ऐतिहासिक सफलता ने मेरे अंदर वह आत्म-विश्वास जगाया कि मैं जुनून से भरे अपने उन आइडियाज को परवाज दूं जो मैंने यश राज फिल्म्स के भविष्य के लिए सोच रखे थे।
आदित्य चोपड़ा नोट में आगे लिखते हैं, 'मेरे प्रति मेरे पिता के असीम प्यार के अलावा, मेरी फिल्म की चमत्कारिक सफलता के कारण अब उन्हें मेरे विचारों पर भी बहुत विश्वास था। मैंने अंतर्राष्ट्रीय कॉर्पोरेट स्टूडियोज के भारत आने और हमारे कारोबार पर कब्जा जमा लेने की बात को पहले ही भांप लिया था। मैं चाहता था कि हम उनके आने से पहले ही एक ऐसा निश्चित स्केल प्राप्त कर लें जिसकी सहायता से अपनी स्वतंत्रता को कायम रखा जा सके। मेरे पिता ने अपनी पारंपरिक मानसिकता के विपरीत बड़ी बहादुरी से मेरी सभी साहसिक पहलों की सराहना की। और 10 वर्ष की एक छोटी अवधि में, हम एक फिल्म प्रोडक्शन हाउस से भारत के पहले पूरी तरह से एकीकृत स्वतंत्र फिल्म स्टूडियो बन गए।'
उन्होंने आगे लिखा, 'पिछले पांच दशकों के दौरान, यश राज फिल्म्स मूल रूप से एक ऐसी कंपनी रही है जिसकी जड़ें पारंपरिक मूल्यों में नीहित हैं और उसका व्यापारिक दृष्टिकोण शुद्धतावादी है। लेकिन इसके साथ ही यह भविष्य की ओर देखने वाली एक ऐसी कंपनी भी है, जो वर्तमान समय की प्रचलित टेक्नोलोजी और इनोवेशन को अपनाने के लिए लगातार प्रयास करती रहती है। परंपरा और आधुनिकता का यह सही संतुलन यश राज फिल्म्स को सही मायनों में परिभाषित करता है। आज, यश राज फिल्म्स 50वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। इसलिए, इस नोट को लिखते समय, मैं यह जानने का प्रयास कर रहा हूं कि आखिर इन 50 वर्षों की कामयाबी का राज क्या है? क्या यह यश चोपड़ा की रचनात्मक प्रतिभा है? क्या यह उनके 25 साल के जिद्दी बेटे का साहसिक विजन है? या ऐसा बस क़िस्मत से हो गया है? इनमें से कोई भी कारण नहीं है, इस कामयाबी का कारण हैं... लोग, वो लोग जिन्होंने पिछले 50 वर्षों में यश राज फिल्म्स की हर फिल्म में काम किया।
50 years of celebrating movies, 50 years of entertaining you. On this occasion #AdityaChopra pens down a heartfelt note. #YRF50 pic.twitter.com/Pfj182ylvy