Akshay Kumar: चार बार फ्लॉप हुए अक्षय की एक और कोशिश, 'हेरा-फेरी 3' नहीं इस बायोपिक से कर रहे वापसी की तैयारी
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केंद्रीय मंत्री ने जसवंत सिंह गिल को किया याद
दरअसल, केंद्रीय कोयला और खान मंत्री प्रहलाद जोशी ने दिवंगत इंजीनियर जसवंत सिंह गिल को याद करते हुए ट्वीट किया, 'स्वर्गीय सरदार जसवंत सिंह गिल जी को 1989 में बाढ़ग्रस्त कोयले की खदान से 65 श्रमिकों को बचाने में अहम भूमिका निभाने के लिए हम याद करते हैं। हमें हमारे कोल वॉरियर्स पर गर्व है'।
अक्षय ने दिया जवाब
Grateful to you @JoshiPralhad ji, for recalling India’s first coal mine rescue mission - this day 33yrs ago.
इस ट्वीट के जवाब में अक्षय कुमार ने मंत्री का आभार व्यक्त करते हुए लिखा 'आपका बहुत आभार प्रल्हाद जोशी जी, आपने एक सच्चे हीरो को याद किया'। अक्षय ने आगे लिखा ' मेरा यह सौभाग्य है कि मैं गिल जी का किरदार अपने फिल्म में निभा रहा हूं'।
मेरा सौभाग्य है कि मैं #SardarJaswantSinghGill जी का किरदार अपनी फ़िल्म में निभा रहा हूँ. It’s a story like no other!@easterncoal
जारी हो चुका है अक्षय का फर्स्ट लुक
बता दें कि अक्षय कुमार के साथ राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म 'रुस्तम' में काम करने वाले निर्देशक टीनू सुरेश देसाई इस फिल्म का डायरेक्शन करने वाले हैं। वहीं, वाशु भगनानी इस फिल्म को प्रोड्यूस करने वाले हैं। फिल्म के लिए उत्साहित वाशु भगनानी ने लिखा, 'यह हमारा सौभाग्य है कि स्वर्गीय इंजीनियर जसवंत सिंह गिल जी कि कहानी को एक फिल्म के रूप में लोगों तक पहुंचाने का हमें मौका मिला है'। बता दें कि कैप्सूल गिल से अक्षय कुमार का फर्स्ट लुक पोस्टर भी सामने आ चुका है, जिसमें वह सरदार जी के गेटअप में नजर आ रहे हैं।
कौन थे जसवंत सिंह गिल, जिन पर बन रही है फिल्म
22 नवंबर, 1939 को अमृतसर के सथियाला में जन्मे, जसवंत सिंह गिल ने अपनी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई खालसा स्कूल से की थी और 1959 में खालसा कॉलेज से स्नातक किया। जसवंत सिंह गिल पश्चिम बंगाल के रानीगंज में एक कोयला खदान में इंजीनियर के रूप में कार्यरत थे। 16 नवंबर, 1989 के उस दुर्भाग्यपूर्ण दिन पर ईस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड की महावीर कोलियरी में खदान कर्मी विस्फोट करके कोयले की दीवारों को तोड़ रहे थे, इस प्रक्रिया में जैसे ही बगल की भूमिगत जल तालिका में दरार पड़ी, पानी अंदर घुसा और खदान में बाढ़ की स्थिति बन गई। बहादुर जसवंत सिंह गिल ने हिम्मत न हारते हुए पूरे शौर्य के साथ बचाव कार्य आरंभ कर दिया। उन्होंने कोयला खदान में फंसे खनिकों को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।