हर एक्टर की चाहत अपने करियर में उस मुकाम पर पहुंचने की होती है जहां वह अपने किरदार के नाम से पहचाना जाए। कुछ कलाकारों की पूरी जिंदगी इस सफलता को हासिल करने में निकल जाती है। जब तक वह कलाकार शोहरत के उस शिखर तक नहीं पहुंचता है तब तक वह गुमनाम ही रहता है लेकिन जिंदगी के जिस मोड़ पर भी उसे यह मुकाम नसीब होता है उसी क्षण से वह स्टार बन जाता है। गुड्डू भैया यानी अली फजल ऐसे ही स्टार हैं।
इंटरव्यू में बोले अली फजल, 'एक-एक सीढ़ी चढ़कर इस मुकाम पर पहुंचा हूं'
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आप मुंबई पढ़ाई के सिलसिले में आए थे तो एक्टिंग की तरफ रुझान कैसे हो गया?
बचपन से ही मेरी अंग्रेजी अच्छी थी। तो दोस्तों ने मुझे नाटक और वाद-विवाद प्रतियोगिता में भाग लेने की सलाह दी। वहीं से सिलसिला शुरू हुआ। परफॉर्मेंस के बाद जब लोगों की प्रशंसा मिलने लगी तो मैं और भी मोटिवेट हुआ। मुंबई मैं पढ़ाई करने आया था। पढ़ाई और नाटक के दौरान कॉलेज के दूसरे साल में मुझे अपनी पहली फिल्म मिली थी। हालांकि वह कभी रिलीज नहीं हुई। फिर मैंने कॉलेज के तीसरे साल में 3 इडियट्स की और वहीं से सिलसिला शुरू हो गया।
आपको असल शोहरत मिर्जापुर से ही मिली। क्या इससे पहले की फिल्में चुनने में आपसे कोई चूक हुई?
मैं इस इंडस्ट्री का नहीं हूं। मैं यहां किसी को जानता नहीं था। मैं एक-एक सीढ़ी चढ़कर ही आगे बढ़ सकता था और मैंने वही किया। लोग तुंरत सफल होना चाहते हैं। लेकिन वे यह भूल चुके हैं की डेमोक्रेटिक तरीका क्या होता है। उस समय मुझे भी बहुत गुस्सा आता था कि मैं मामूली फिल्म कर रहा हूं लेकिन मुंबई में गुजारा करने के लिए पैसे भी कमाने थे। मुंबई में सफलता पाना बहुत चुनौतीपूर्ण है। अब जब मैं अपने गुजरे कल को देखता हूं तो एहसास होता है कि मैंने जो किया वह सही था उसी की जरूरत थी।
क्या गुड्डू भैया जैसे नकारात्मक किरदार समाज में युवाओं को गलत काम करने के लिए उकसा रहे हैं?
हमारे यहां यही परेशानी है। कुछ भी करने से लोग भड़क जाते हैं। ऐसी बात कहने वाले ऐसे लोग होते हैं जो सामने कुछ होते हैं और पीठ पीछे कुछ और। जब हम ऐसे हॉलीवुड शोज देखते हैं तो हम उनकी तारीफ करते हैं। वहां उन्हें कुछ भी गलत नहीं लगता है। फिल्म में हम सिर्फ एक किरदार अदा करते हैं। हमारे बारे में गलत सोच बनाने से पहले यह भी देखिए कि असल दुनिया में कैसे रहते हैं। मिर्जापुर के बाद हमें ऐसे भी फोन आए जिसमें लोगों ने बोला कि हमने तो फिल्म में कम दिखाया है। एक बार 5 साल के कुछ बच्चों ने बंदूक के साथ सोशल मीडिया पर गुड्डू भईया लिखते हुए पोस्ट कर दिया। यह मुझे बहुत बुरा लगा। मैंने अपनी ओर से कोशिश की, कि वह ऐसा ना करें। लेकिन यह दिक्कत मेरी नहीं है उनके मां-बाप की है जिन्होंने इसे स्वीकृति दी है। लेकिन आरोप हम कलाकारों पर आ जाता है।
निजी जिंदगी में आप मिर्जापुर के गुड्डू भैया जैसे हैं या फिर फुकरे के जफर जैसे हैं।
मुझे कॉमेडी पहुत पंसद है। मेरे अनुसार जिंदगी कॉमेडी ही है। मैं हर चीज में कॉमेडी ढूंढ सकता हूं। मुझे नहीं लगता है कि निजी जिंदगी में मैं जैसा हूं वैसा कैरेक्टर मैंने प्ले किया है हालांकि कह सकते हैं कि मेरा शख्सियत का एक हिस्सा फुकरे के जफर जैसा है तो कहीं एक हिस्सा मिर्जापुर के गुड्डू जैसा।