ये उन दिनों की बात है जब मुंबई का नाम बंबई ही था और ये दौर 1940 से 50 के दशक का। बंबई में में हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के इतिहास का निर्माण हो रहा था। इस दौरान ही यहां कई बड़े फिल्म स्टूडियो का भी उदय हुआ। ‘स्टूडियोज ऑफ बॉम्बे’ नामक इस श्रृंखला में हम आपको हिंदी सिनेमा की नींव रखने वाले स्टूडियो के इतिहास और उनके मौजूदा हालात की जानकारी दे रहे हैं। शुरुआत हमने की थी बॉम्बे टाकीज से। इसके बाद हमने आपको फिल्मिस्तान और फिल्मालय स्टूडियो के बारे में बताया। इस सीरीज की चौथी कड़ी में आज बारी है महबूब स्टूडियो की। इस स्टूडियो का निर्माण 1954 में महबूब खान ने किया। वही महबूब खान जिन्होंने ‘मदर इंडिया’ जैसी कालजयी फिल्म बनाई। ‘गाइड’, ‘अंदाज’, ‘कागज के फूल’ और ‘औरत’ जैसी कई सदाबहार फिल्मों की शूटिंग यहीं हुई। नरगिस और राज कपूर का ये पसंदीदा स्टूडियो हुआ करता था और अब इसके चाहने वालों में सलमान खान का नंबर वन पर आता है। तो शुरू करते हैं आज की कहानी, लेकिन महबूब स्टूडियो का इतिहास जानने से पहले हमको जानना होगा इस स्टूडियो के जनक महबूब खान के बारे में। वही महबूब खान जो 16 साल की उम्र में घर छोड़ कर मुंबई भाग आए थे।
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सन 1906 में गुजरात के बिलमोड़ा जिले में महबूब खान का जन्म हुआ। महबूब के पिता पुलिस कांस्टेबल थे लेकिन उन्हें पढ़ाई का मौका नहीं मिला। बचपन से ही उनके मन में सिनेमा के प्रति प्रेम और मनोरंजन जगत से जुड़ी चीजों की ललक ने ही शायद उन्हें इतना बड़ा नाम दिया। महबूब बचपन से ही अभिनेता बनना चाहते थे। शायद इसीलिए 16 साल की कच्ची उम्र में ही घर से भाग कर बंबई चल दिए। बंबई में उन्हें कुछ काम मिलता इसके पहले ही महबूब के पिता ने उन्हें वापस गांव बुला लिए। उनके दिमाग से सिनेमा का भूत उतारने के लिय उनके पिता ने उनकी शादी करवा दी। लेकिन, एक दिन वक्त की सुई फिर महबूब के तरफ मुड़ी और उनको मिला फिल्मों में घोड़ा सप्लाई करने वाला एक व्यक्ति। इस व्यक्ति का नाम था नूर मोहम्मद जिसने महबूब के मन के बुझे हुए सपने को फिर रौशनी दी और उन्हें उन्हे दोबारा मुंबई लेकर आया। और यहीं से शुरू हुआ महबूब खान का असली फिल्मी सफर।
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लंबे समय तक इंडस्ट्री का हिस्सा रहने के बाद महबूब खान को अब खुद का स्टूडियो बनाना था। स्टूडियो के लिए महबूब खान बंबई में कोई ऐसी जगह चाहते थे जहां फिल्मी सितारों का भी बसेरा हो। और उन्होंने बांद्रा की हिल रोड पर समंदर के किनारे ये जगह तलाश ली। 1951 में उन्होंने यहां 20 हजार वर्ग फिट जमीन खरीदी। 1954 में यह स्टूडियो बन कर तैयार हो गया। इस स्टूडियो में पांच बड़े शूटिंग फ्लोर बनाए गए थे। महबूब स्टूडियो भारत का पहला हॉलीवुड स्टाइल स्टूडियो है। हॉलीवुड के प्रशंसक होने के बावजूद भी महबूब खान की फिल्मों में आपको हमेशा देश की वास्तविक छवि देखने को मिलती है।
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महबूब स्टूडियो, नाम ही काफी है
महबूब स्टूडियो देश की आर्थिक राजधानी मुंबई की सबसे प्राइम लोकेशन में से एक बांद्रा के हिल रोड पर स्थित है। इस स्टूडियो तक पहुंचने के लिए आपको बांद्रा स्टेशन पर वेस्ट की ओर बाहर आना होगा। स्टेशन से स्टूडियो लगभग दो किलो मीटर दूर है। यहां तक पहुंचने के लिए 211 नंबर की बस या ऑटो लगातार मिलते रहते हैं। महबूब स्टूडियो अपने आपमें एक ऐसा लैंड मार्क है जिसको नए से पुराने ऑटो और टैक्सी वाले तक सभी जानते हैं। गेट पर पहुंचते ही महबूब स्टूडियो लिखा दिखाई देता है। महबूब स्टूडियो में बिना काम अंदर जाने के अनुमति नहीं है। और न ही इस स्टूडियो की सैर करने की अनुमति है।
महबूब स्टूडियो के पड़ोसी सितारे
महबूब स्टूडियो के आस पास कई बड़े अभिनेता और अभिनेत्रियां रह चुके हैं और कई आज भी रहते हैं। इन सबमें सबसे बड़ा नाम है शाहरुख खान का। उनका घर मन्नत यहीं पास में ही है। इसके अलावा चंद कदमों की दूरी पर ही सलमान खान अपने पूरे परिवार के साथ गैलेक्सी अपार्टमेंट में रहते हैं। इनके अलावा यहां सैफ अली खान, शबाना आजमी और जॉन अब्राहम जैसे कई बड़े अभिनेता भी आसपास ही रहते हैं। यह स्टूडियो समंदर से सिर्फ 500 मीटर की दूरी पर बसा है।