बॉलीवुड की ज्यादातर फिल्मों की कहानी एक ही नियम पर चलती है। एक हीरो होगा, जो हीरोइन से प्यार करता होगा और विलेन हीरोइन को परेशान करेगा। जब तक हीरो से उसकी पिटाई नहीं होगी, तब तक दर्शकों को कहानी में मजा नहीं आता। खूंखार खलनायकों का यह दौर पुराने जमाने से चलता आ रहा है। इस इंडस्ट्री में ऐसे कई कलाकार आए हैं, जिन्होंने खलनायक की भूमिका से दर्शकों की तारीफें बटोरी है। उनके जाने के बाद आज भी उनकी फिल्मों ने उन्हें अमर किया हुआ है। आज के इस लेख में हम आपको एक ऐसी ही शख्सियत से रूबरू कराने जा रहे हैं, जिन्होंने अपने संघर्ष से इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाई है।
Amjad Khan: अमजद खान को पूरी जिंदगी रहा इस बात का मलाल, पिता की यह आखिरी इच्छा पूरी नहीं कर पाए थे अभिनेता
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यहां से पचास-पचास कोस दूर गांव में, जब बच्चा रात को रोता है, तो मां कहती है बेटे सो जा, सो जा नहीं तो गब्बर आ जाएगा'... शोले का एक यह डायलॉग आज भी दर्शकों की जुबान पर है और यही वजह है कि फिल्म में गब्बर की भूमिका निभाने वाले अमजद खान आज भी अपनी फिल्मों के जरिए फैंस के दिलों में जिंदा हैं। चलिए जानते हैं अभिनेता की जिंदगी से जुड़े कुछ दिलचस्प किस्से।
अमजद खान का जन्म 12 नवंबर 1940 को पेशावर में हुआ था। अभिनेता एक फिल्मी परिवार से ताल्लुक रखते थे। अमजद को बचपन से ही अभिनय का काफी शौक था। अभिनय के प्रति अपने रुझान को देखते हुए उन्होंने महज 17 साल की उम्र में ही 'अब दिल्ली दूर नहीं' (1957) में काम किया था। इंडस्ट्री में हर कोई हीरो बनने का सपना सजाए आता है, लेकिन अमजद खान बॉलीवुड के वह हीरो बन गए, जिन्हें उनकी खलनायकी के लिए पसंद किया जाता था।
हर हंसते-खेलते आदमी के पीछे एक बड़ा दर्द छुपा होता है। यही हाल अमजद खान का भी था। उनकी जिंदगी में एक ऐसा गम था, जिससे वह कभी नहीं उबर पाए थे। अमजद खान चाहते थे कि उनके पिता जयंत फिल्म ‘शोले’ में उनका काम देखें, लेकिन ‘शोले’ की रिलीज से पहले उनके पिता का निधन हो गया। बता दें कि ‘शोले’ 15 अगस्त 1975 को रिलीज हुई थी। वहीं, अभिनेता के पिता की मौत दो जून 1975 को हो गया था।
अमजद खान चाहते थे कि उनके पिता जयंत फिल्म ‘शोले’ में उनका काम देखें, किस्मत को यह मंजूर नहीं था। ‘शोले’ 15 अगस्त 1975 को रिलीज हुई थी। इससे ढाई महीने पहले दो जून 1975 को उनके पिता जयंत का निधन हो गया। अमजद खान की यह तमन्ना हमेशा अधूरी ही रही। इस गम को लेकर वह ताउम्र जीते रहे। वहीं, अमजद खान अपने आखिरी दिनों में बेहद तकलीफ में रहे थे। एक्सीडेंट से उनकी 13 पसलियां टूट गई थी। व्हील चेयर में लंबे वक्त तक रहने के कारण उनका वजन भी काफी बढ़ गया था। बढ़ते वजन के कारण वह कोमा में भी चले गए पर वापस आ गए थे।