EXCLUSIVE मुलाकात में अनिल कपूर का खुलासा, इसलिए फिल्म ‘मशाल’ के सेट पर हुई दिलीप कुमार से टेंशन
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आप दो पीढ़ियों के हीरो हैं। हमने ‘तेजाब’, ‘राम लखन’ जैसी फिल्में देखीं, आज की पीढ़ी ‘एके वर्सेज एके’ में आपको बतौर हीरो देख रही है, कितना कठिन किरदार रहा खुद को ही पर्दे पर पेश करना?
मेरी शुरू से और सबसे पहली खोज तो यही रहती है कि मुझे ऐसा किरदार मिले जो मैंने पहले किया न हो। जब मुझे पता चलता है कि ये किरदार मैंने कभी किया नहीं है या इस किस्म की कहानी या पटकथा पर पहले मैंने काम नहीं किया है तो मेरी दिलचस्पी ऐसी पिक्चर में तुरंत बढ़ जाती है। फिर मैं देखता हूं फिल्म का निर्देशक कौन है? क्या होता है कि कभी कभी बहुत किरदार आते हैं। अलग तरह की पटकथाएं भी आती हैं। लेकिन, उन्हें लेकर आए निर्देशक पर मुझे भरोसा नहीं होता। तो मैं वे फिल्में नहीं करता। ऐसा भी हुआ है कि मेरे पास फिल्मों की बेहतरीन पटकथाएं आईं, लेकिन वे फिल्में सेट पर जाकर खराब हो गईं।
यानी कि जैसी कहानी सुनाई गई वैसी फिल्म बन नहीं पाई..
सिनेमा निर्देशक का माध्यम है। फर्ज कीजिए कि मेरे पास बहुत बेहतरीन पटकथा आई। लेकिन वह निर्देशक इस पर फिल्म कैसे बनाता है। कैसे शूटिंग के दौरान दृश्यों को ओके करता है? क्या वह मुझे समझा पाता है और फिर शूटिंग के बाद कैसे वह सारे दृश्यों को जोड़कर फिल्म बनाता है। तो क्या होता है कि अभिनेता कितना भी अच्छा हो, काम कितना ही अच्छा हो लेकिन निर्देशक अच्छा न हो तो कभी भी पर्दे पर वह जादू आ नहीं सकेगा।
और, आपको तो तमाम तमाम बड़े निर्देशकों का साथ मिला है। उन निर्देशकों ने अनिल कपूर को अक्सर एक आम इंसान के रूप में पर्दे पर पेश किया, इस बार चुनौती एक सुपरस्टार को सुपरस्टार के तौर पर पर्दे पर पेश करने की रही..
आपने बिल्कुल सही कहा। मेरे करियर में मुझे अच्छे लेखकों और अच्छे निर्देशकों का बहुत अच्छा साथ मिला। जावेद (अख्तर) साब ने मेरे लिए इतने अच्छे अच्छे किरदार लिखे। ‘मशाल’ हो, ‘मेरी जंग’ हो या ‘मिस्टर इंडिया’ को ले लें। लेकिन, यहां निर्देशक थे शेखर कपूर। अगर वह निर्देशक नहीं होते और लेखक वही होते तो भी उसमें उतना जादू नहीं होता। यश चोपड़ा ने ‘मशाल’ में जादू किया। ‘मेरी जंग’ में सुभाष घई ने यही किया। फिर, फिर अमरीश पुरी थे मेरे सामने। दिलीप साब थे, द ग्रेट युसूफ साब, ‘एके वर्सेज एके’ में अनुराग कश्यप हैं। तो आपका साथी कलाकार कौन है? कौन निर्देशित कर रहा है? ये सारी चीजें जब सही हो जाती हैं तो फिल्म में एक जादू आ जाता है।
जैसा कि ‘एके वर्सेज एके’ में जिक्र आता है तो क्या दिलीप कुमार ने वाकई आपका चेहरा पकड़कर अपनी तरफ किया था और कहा था, ‘मेरी आंखों में देख..’?
ये किस्सा काफी हद तक सच्चा है। ऐसा हुआ था और शायद वह भी मेरी परीक्षा ले रहे थे, ऐसा मुझे लगता है। जब ये हो रहा था तो सेट पर काफी टेंशन हो गई थी और शूटिंग रुक गई थी लेकिन मैं डटा रहा। उन्होंने यश जी से बात की और यश जी ने मुझसे बात की। यशजी ने मुझे कहा कि जब युसूफ साब आएं तो उनकी तरफ देखो। लेकिन मेरा तर्क था कि मैं देखूंगा लेकिन मैं इतनी जल्दी नहीं देखूंगा क्योंकि मेरा किरदार एक गुंडा आदमी का है। हालांकि, शूटिंग के बाद फिर बाहर हमारी बात हुई औऱ उनको मेरा काम इतना पसंद आया कि उन्होंने कम से कम 50 लोगों से मेरे बारे में बात की और मेरे नाम की सिफारिश की। मैं उनके साथ ‘शक्ति’, ‘कर्मा’ और ‘मशाल’ में साथ काम किया और मैं खुद को उन गिनती के भाग्यशाली अभिनेताओं में मानता हूं जिन्होंने महान दिलीप कुमार के साथ तीन बार काम किया।