हिंदी सिनेमा में आजकल भीतरी-बाहरी की बहस अपने चरम पर है। इस बहस को कई फिल्मी सितारे अपने अनुभवों से आगे बढ़ा रहे हैं। उन कलाकारों में से एक हैं अनु कपूर। अनु कपूर ने कुछ दिन पहले ही सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करके अपने प्रशंसकों को यह जानकारी दी कि उन्हें भारतीय सिनेमा में कदम रखे हुए 38 साल बीत चुके हैं। इन 38 सालों का अनुभव उन्होंने एक इंटरव्यू में बयां किया है।
अनु कपूर को याद आए संघर्ष के दिन, शाहरुख, सलमान और ऋतिक बनने का सपना देखने वालों को दी ये सलाह
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अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए अनु कपूर ने बताया, 'मैंने चाय की दुकान भी चलाई है और दुकान पर भजिया भी तले हैं। इसके अलावा भी मैंने बहुत से काम किए हैं। इसलिए, मेरी जिंदगी में कठिनाइयां कोई नई बात नहीं है। जब मैंने फिल्म इंडस्ट्री में काम करना शुरू किया था तब मैंने जाना कि संघर्ष का असली मतलब क्या होता है? हालांकि, किसी भी इंसान में इतनी ताकत नहीं है कि वह किसी हुनरमंद को अनदेखा कर सके। अगर वह ऐसा करते हैं तो इसमें उनका ही घाटा होता है। यही कारण है कि कठिन परिश्रम करने वाले लोग ही सफलता पाते हैं।'
अनु कपूर ने बताया कि उन्होंने कभी भी पैसा, प्रसिद्धि और काम पाने के लिए लालच नहीं दिखाया। वे कहते हैं, 'दुख बांटने से दिल थोड़ा हल्का हो जाता है और सच बांटने से हौसला बढ़ जाता है। इसी में मैं विश्वास करता हूं। परेशानियां तो सभी का रास्ता रोकती हैं लेकिन उनको पार करके सफलता पाना ही असली कामयाबी है। मैं अभी भी अपने आप को एक संघर्षरत कलाकार ही समझता हूं। हर कोई मुकद्दर का सिकंदर नहीं बन पाता। लेकिन, जब आप बड़े बन जाते हैं तो उसका श्रेय लेने के लिए सभी लोग आगे आ जाते हैं।'
फिल्म इंडस्ट्री में आकर शाहरुख खान, सलमान खान और ऋतिक रोशन जैसा बनने का सपना देखने वाले कलाकारों को अनु कपूर सलाह देते हैं, 'इतिहास गवाह है कि जिसने भी किसी भी कलाकार की नकल करने की कोशिश की है वह महज एक नकलची बनकर रह जाता है।'
आगे अनु कपूर कहते हैं, 'अगर आपको लगता है कि आपके अंदर हुनर है तो आप खुद अपने हुनर को दर्शकों के सामने लाइए। नकल करना थोड़ी देर के लिए तो सही है लेकिन दर्शकों को लंबे समय तक पसंद नहीं आ सकता।' अनु कपूर ओटीटी पर रिलीज होने वाली विद्युत जामवाल की फिल्म 'खुदा हाफिज' में एक अहम भूमिका निभाते हुए नजर आने वाले हैं।
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