पाकिस्तानी अभिनेताओं के चयन से नाखुश थे एआर रहमान, '99 सॉन्ग्स' के इवेंट में किया खुलासा
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नई तकनीक का इस्तेमाल
इस फिल्म में ए. आर. रहमान ने संगीत को जीवंत करने के लिए डॉल्बी एटमॉस तकनीक का इस्तेमाल किया है। इस तकनीक का इस्तेमाल करने वाले रहमान इंडस्ट्री के पहले कलाकार हैं। इसके सहारे लोगों का अनुभव और भी शानदार हो जाता है और वे संगीत के और करीब हो जाते हैं। दुनियाभर में कलाकार तेजी से इस तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। रहमान का कहना है कि यह कलाकार और दर्शकों के रिश्ते को और भी मजबूत करता है। इसके साथ लोग वास्तव में वाद्य यंत्रों और स्वरों को अलग-अलग अनुभव कर सकते हैं।
कलाकारों ने लिया संगीत का कठिन प्रशिक्षण
इस फिल्म के जरिए सिनेमा जगत में डेब्यू करने वाले एहान भट्ट ने कहा कि उन्हें कॉस्टिंग निर्देशक मुकेश छाबड़ा के जरिए रहमान की फिल्म में मौका मिला। इस फिल्म के लिए उन्होंने संगीत का एक साल का प्रशिक्षण लिया था। इसके लिए वह चेन्नई में ए. आर.रहमान के पास गए थे। इस फिल्म में उन्होंने तीन साल की मेहनत की है। वहीं ए. आर. रहमान के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि वह उनके आदर्श हैं। संगीत में महारथ के अलावा वह बहुत ही अच्छे इंसान भी हैं जो सभी से एक समान बात करते हैं। फिल्म के निर्देशक विश्वेश कृष्णमूर्ति ने कहा कि जब किसी फिल्म के साथ ए. आर. रहमान जुड़े हों तब आपको उसके संगीत को पूरी तरह से असल रखना होता है। इस वजह से फिल्म के हीरो के साथ ही सहायक कलाकारों को भी संगीत का कड़ा प्रशिक्षण दिया गया।
सही समय पर आई फिल्म
रहमान ने समारोह के दौरान एक बार फिर से रीमिक्स गानों पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछले कुछ समय से लगातार रीमिक्स गानों का निर्माण हो रहा है। यह अच्छा है लेकिन सीमा से अधिक निर्माण घातक है। यह साल इस म्यूजिकल फिल्म के लिए एकदम मुफीद है। इस फिल्म में हमने 15 ट्रैक रखे हैं। गौरतलब है कि उन्होंने कुछ दिनों पूर्व रीमिक्स गानों पर कटाक्ष किया था।
रहमान को प्रोत्साहित करने पहुंचे फिल्मकार
'99 सॉन्ग्स' रहमान की लेखक और निर्माता के तौर पर पहली फिल्म है। रहमान ने खुद भी अपना सबसे मुश्किल प्रोजेक्ट करार दिया है। उन्होंने बताया भी कि कई बार लेखक के तौर पर किया गया काम निर्माता के नजरिए से पसंद नहीं आता था तो कई बार निर्माता के नजरिए से लेखक रजामंद नहीं रहता था। कुछ बार तो ऐसा भी हुआ कि दोनों के ही ख्यालात से निर्देशक से इत्तेफाक नहीं रखा। फिल्म में कलात्मक और वित्तीय, दोनों ही पक्षों का ख्याल रखना था। रहमान के लिए यह फिल्म कितनी खास है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनकी इस नई पारी का गवाह बनने के लिए फिल्मकार बोनी कपूर, आनंद एल. राय, और मुकेश छाबड़ा जैसी हस्तियां पहुंची थी।