‘बाहुबली’ के निर्देशक एस.एस. राजामौली 25 मार्च को सिनेमाघरों में अपनी अगली फिल्म ‘आरआरआर’ रिलीज करने जा रहे हैं। अजय देवगन, आलिया भट्ट, एन.टी.रामा राव जूनियर और राम चरण अभिनीत इस फिल्म का दुनिया भर में प्रमोशन किया जा रहा है। इसी सिलसिले में आरआरआर की स्टार कास्ट रविवार को दिल्ली पहुंची थी। यूं तो कार्यक्रम 4:30 बजे आयोजित किया गया था। लेकिन आलिया भट्ट, एन टी रामा राव जूनियर, राम चरण और एस.एस. राजामौली नई दिल्ली के पीवीआर प्लाजा में दो घंटे देरी से पहुंचे। हालांकि इस दौरान फिल्म की स्टारकास्ट ने आरआरआर से जुड़े की सवालों के जवाब भी दिए। इस खास मौके पर आमिर खान भी RRR की टीम के साथ नजर आए।
RRR: एसएस राजामौली ने जाहिर की चिंता, कहा- 'फ्रिक थी कि आलिया के आने के बाद मैं इन दो लड़कों को कैसे कंट्रोल करूंगा'
आलिया, बॉलीवुड इंडस्ट्री में 10 साल पूरे करने के बाद अब आप साउथ फिल्म इंडस्ट्री में भी अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहीं हैं। पहली बार तेलुगू फिल्म और साउथ के सुपरस्टार्स के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा? शूटिंग के दौरान का सबसे यादगार किस्से हमारे दर्शकों को बताएं।
इस सवाल के जवाब में आलिया ने कहा, "जी हां, ये मेरी पहली साउथ फिल्म है। मुझे बहुत खुशी है कि मैं एस.एस. राजामौली की छोटी-सी दुनिया का हिस्सा बन पाई। राजामौली सर बहुत अच्छे निर्देशक हैं। वह तब तक पैकअप नहीं बोलते हैं जब तक उन्हें उनके मनमुताबिक शॉट नहीं मिल जाता। हम अपने पात्र को समझें यह सुनिश्चित करने के लिए वह शॉट्स के बीच-बीच में हमें कहानियां सुनाते थे। हमारे पात्रों के बारे में हमें बताते थे। यही मेरे लिए सबसे यादगार पल हुआ करते थे।"
आरआरआर की घोषणा 2018 में हो गई थी। 550 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म को फ्लोर से बड़े पर्दे तक का सफर तय करने में चार साल का वक्त लग गया। इस बीच महामारी ने भी हमें काफी प्रभावित किया। ऐसे में आपके लिए इन चार सालों में सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण चीज क्या रही?
एस.एस.राजामौली कहते हैं, "फिल्म की कास्टिंग के बाद से ही मेरी सिर्फ एक ही चिंता थी, वो ये कि आलिया के सेट पर आने के बाद मैं इन दो बदमाश लड़कों - एन टी रामा राव जूनियर और राम चरण को कैसे कंट्रोल करूंगा। (सब हंसने लगे) लेकिन शूटिंग के दौरान समझ आया कि इन दोनों की मस्ती की वजह से ही सेट का माहौल इतना पॉजिटिव हुआ करता था।" वहीं आलिया भट्ट ने जवाब देते हुए कहा, "मेरे लिए सबसे मुश्किल और मजेदार चीज तेलुगु सीखना था।" जब यही सवाल राम चरण से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि इस फिल्म में हमने बहुत मुश्किल-मुश्किल एक्शन सीन्स के लिए 60-65 शॉट्स दिए हैं। लेकिन इससे ज्यादा चुनौतीपूर्ण काम इन्हें (एस.एस. राजामौली) संतुष्ट करना था। राजामौली उन निर्देशकों में से एक हैं जिन्हें 99 फीसदी नहीं बल्कि 100 फीसदी चाहिए होता है। और वो तब तक रीटेक करवाते रहेंगे जब तक उनकी सोच कैमरे में कैद नहीं हो जाती।
आलिया, एस.एस. राजामौली और संजय लीला भंसाली दोनों की ही फिल्में काफी बड़े बजट की होती हैं। आप दोनों के साथ एक ही समय में काम कर रहीं थीं। आरआरआर के प्रिंसिपल फोटोग्राफी का काम शुरू होने के एक साल बाद ही गंगूबाई की प्रिंसिपल फोटोग्राफी भी शुरू हो गई थी। दोनों ही फिल्मों में आपका किरदार अहम, लेकिन अलग था। ऐसे में आपने दोनों ही फिल्मों में अपना 100 फीसदी देने के लिए क्या किया?
मैं हर फिल्म और फिल्मकार के साथ काम करने के तरीके में बदलाव करती हूं। मुझे ऐसा लगता है कि हम बस एक जरिया है, फिल्ममेकर की कल्पना को आप तक पहुंचाने का। इसलिए मैं वही करती हूं, जो फिल्ममेकर चाहते हैं। यदि वो कहेंगे कि तीन महीने तक घर पर बैठकर रिसर्च करो तो मैं वो भी करने के लिए तैयार रहती हूं। यही मेरा काम करने का तरीका है।
एस.एस. राजामौली ने अपनी फिल्म बाहुबली से पैन इंडिया फिल्मों के लिए एक नया रास्ता खोल दिया है। बाहुबली के बाद अब कई सारी पैन इंडिया फिल्म बन रहीं हैं। आपके हिसाब से पैन इंडिया फिल्म ने भारतीय सिनेमा के खेल को कैसे बदला है?
मुझे नहीं पता कि भारतीय सिनेमा कैसे काम करता है। मैं सिर्फ इस बात पर ध्यान देता हूं कि मेरी फिल्में ज्यादा-से-ज्यादा दर्शकों तक पहुंचे। अपने पूरे करियर के दौरान मैंने एक ही बात सीखी, फिल्म में जितने स्ट्रांग इमोशंस होंगे उतने ज्यादा लोग इससे अपने आपको कनेक्ट कर पाएंगे।
