हिंदी और बंगाली सिनेमा के जाने-माने पटकथा लेखक और निर्देशक बासु चटर्जी ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत बासु भट्टाचार्य का सहायक बनकर की। बासु भट्टाचार्य और ऋषिकेश मुखर्जी की फिल्मों की तरह बासु चटर्जी की फिल्में भी हल्के मूड वाली मध्यमवर्गीय परिवार की कहानियां होती थीं। वह अपनी फिल्मों में शादी और प्रेम संबंधों पर ज्यादा जोर देते थे। इसके अलावा उनकी फिल्में सामाजिक और नैतिक मुद्दों पर भी बातचीत करती थीं। आज जब वह 93 वर्ष इस पृथ्वी पर बिताने के बाद दुनिया छोड़ चुके हैं तो हम उनकी कुछ यादगार फिल्मों के बारे में बताते हैं। ये फिल्में लोगों के जेहन में उनके काम को हमेशा ताजा रखेंगी।
जीवन का सार हैं बासु चटर्जी की ये 10 मुस्कुराती गुदगुदाती फिल्में, हर फिल्म बनी अपने समय का सबक
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सारा आकाश (1969)
इस फिल्म के साथ बासु चटर्जी ने फिल्मों में निर्माण और निर्देशन की शुरुआत की थी। फिल्म की कहानी राजेंद्र यादव के लिखे उपन्यास 'सारा आकाश' पर आधारित है। शुरुआत करने के लिहाज से बासु की यह फिल्म सुपरहिट साबित हुई। इस फिल्म में राकेश पांडे, मधु चक्रवर्ती, नंदिता ठाकुर, एके हंगल और दीना पाठक मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म की कहानी में आगरा का एक संयुक्त परिवार दर्शाया गया है जो शादी होकर आने वाले एक नए जोड़े का स्वागत करता है। इसके बाद इस घर में तकरार शुरू होती है। शादी के बंधन में बंधने वाले दोनों ही लोग घरेलू जिंदगी जीने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं थे। अंत में शादी खत्म हो जाती है। इस फिल्म की पटकथा खुद बासु चटर्जी ने ही लिखी थी। इसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ पटकथा लेखक के फिल्मफेयर पुरस्कार से नवाजा गया था।
रजनीगंधा (1974)
मनु भंडारी की लिखी एक शॉर्ट स्टोरी 'यही सच है' पर आधारित इस फिल्म में अमोल पालेकर, विद्या सिन्हा और दिनेश ठाकुर ने मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं। अमोल पालेकर के लिए यह पहली हिंदी फिल्म रही है जबकि विद्या सिन्हा को इस फिल्म से पहचान मिलनी शुरू हुई। बाद में इन दोनों ही कलाकारों ने बासु चटर्जी के साथ कई फिल्मों में काम किया। बासु ने अपने निर्देशन में इस फिल्म के जरिए शहरों में रहने वाले मध्यमवर्गीय परिवारों की कहानी को करीब से दिखाया है। इस फिल्म के लिए बासु को सर्वश्रेष्ठ फिल्म के लिए फिल्मफेयर क्रिटिक्स अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था।
छोटी सी बात (1976)
बीआर चोपड़ा के निर्माण और बासु चटर्जी के निर्देशन में बनी इस फिल्म को 70 के दशक की सबसे बेहतरीन कॉमेडी फिल्मों में से एक माना जाता है। बासु चटर्जी ने इस फिल्म की पटकथा को भी लिखा। इसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ पटकथा लेखक के फिल्मफेयर अवॉर्ड से भी नवाजा गया। अमोल पालेकर, विद्या सिन्हा, अशोक कुमार, धर्मेंद्र, हेमा मालिनी और असरानी जैसे बड़े कलाकार इस फिल्म के पात्रों में शामिल थे इसलिए यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर भी हिट रही। बासु की इस फिल्म के बाद अमोल पालेकर ने फिल्म इंडस्ट्री में असाधारण कॉमिक हुनर वाले कलाकार के रूप में खुद को स्थापित कर लिया था।
चितचोर (1976)
बासु चटर्जी के लेखन और निर्देशन में बनी इस रोमांटिक म्यूजिकल फिल्म को राजश्री प्रोडक्शन के बैनर तले ताराचंद बड़जात्या ने इसका निर्माण किया है। यह फिल्म सुबोध घोष की एक बंगाली कहानी पर आधारित है। अमोल पालेकर और जरीना वहाब की इस फिल्म के हिट साबित होने पर इसे बाद में तेलुगू और मलयालम में भी रीमेक किया गया। फिल्म के बेहतरीन निर्देशन के लिए बासु चटर्जी को फिल्मफेयर अवॉर्ड के लिए नामित किया गया था। वर्ष 2003 में आई सूरज बड़जात्या के निर्देशन में बनी फिल्म 'मैं प्रेम की दीवानी हूं' भी इसी फिल्म की रीमेक है जिसमें अभिषेक बच्चन, ऋतिक रोशन और करीना कपूर मुख्य भूमिकाओं में हैं।