बंबई (अब मुंबई) के हिंदी सिनेमा ने एक दौर वह भी देखा है, जब एक साथ दर्जन भर सितारों की फिल्में बॉक्स ऑफिस पर एक ही साल सिल्वर जुबली मनाया करती थीं। सिनेमा तब ज्यादा लोकतांत्रिक हुआ करता था। निर्माताओँ की हनक और धमक दोनों अपने शबाब पर थी और सिनेमा में कॉरपोरेट की दखलंदाजी तब इतनी हावी नहीं थी। ये दौर अमिताभ बच्चन की ‘सुहाग’ और ‘मिस्टर नटवर लाल’ जैसी फिल्मों का था। ऋषि कपूर भी अपनी ‘सरगम’ जैसी फिल्मों से जमाने में अपना जलवा बरकरार रखे हुए थे। मिडिल क्लास इंसान अमोल पालेकर की ‘गोलमाल’ देखकर मनोरंजन कर रहा था। और, इसी बीच आया एक नया हीरो जिसने चवन्नी क्लास यानी कि फर्स्ट क्लास में बैठने वाले दर्शकों का दिल जीतना शुरू कर दिया। साल 1979 के जून में रिलीज हुई फिल्म ‘सुरक्षा’ उसके करियर की पहली ब्लॉकबस्टर फिल्म रही, इस फिल्म ने रातोंरात मिथुन को स्टार बना दिया और इस फिल्म की रिलीज के ठीक बाद आईं फिल्मों में ‘प्रेम विवाह’ और ‘भयानक’ को भी अच्छी चर्चा मिली। इसी साल मिथुन की एक और सुपरहिट फिल्म ‘तराना’ भी रिलीज हुई। ‘सुरक्षा’, ‘भयानक’ और ‘तराना’ तीनों में मिथुन के साथ हीरोइन बनना मंजूर किया अपनी पहली ही फिल्म ‘लैला मजनू’ से सुपरस्टार बन गईं रंजीता कौर ने। इन दोनों की जोड़ी की फिल्म ‘भयानक’ ही हमारे आज के बाइस्कोप की फिल्म है।
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मिथुन और रंजीता की हिट जोड़ी
फिल्म ‘भयानक’ अपने समय के समय से आगे की हॉरर फिल्म है। उस दौर में रामसे बंधुओं का बोलबाला था, और तब रक्तपिपासु नरपिशाचों पर फिल्म बनाना ही दूर की कौड़ी था। इसके बावजूद निर्देशक एस यू सैयद ने इस पर काम किया और ये अनोखी फिल्म बनाई। यश चोपड़ा की फिल्म ‘इत्तेफाक़’ में सिनेमैटोग्राफर केजी के असिस्टेंट रहे सैयद ने अपनी पहली फिल्म राकेश रोशन और रीना रॉय के साथ बनाई, जिसका नाम था ‘गूंज’। दूसरी फिल्म में ही उन्हें मिथुन और रंजीता मिल गए। रंजीता ने ये फिल्म मिथुन के कहने पर की, इससे पहले दोनों ‘सुरक्षा’ के लिए साथकाम कर चुके थे। रंजीता उन दिनों मिथुन से बड़ी स्टार हुआ करती थीं। पुणे फिल्म इंस्टीट्यूट से एक्टिंग का कोर्स करने निकलीं रंजीता की पहली ही फिल्म ‘लैला मजनू’ सुपर डुपर हिट रही थी। अबरार अलवी की लिखी इस फिल्म ने रंजीता को शोहरत भी दी, इज्जत भी दी और खूब पैसा भी दिया। लेकिन, चूंकि वह किसी फिल्मी खानदान से नहीं थीं और न ही उनका कोई गॉडफादर था तो पहली फिल्म में ऋषि कपूर के साथ जोड़ी बनाने के बावजूद उन्होंने आगे मिथुन के साथ अपना करियर सुरक्षित समझा। दोनों की जोड़ी हिंदी सिनेमा की हिट जोड़ियों में मानी जाती है।
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कहानी हवेली में छुपे रहस्य की
फिल्म ‘भयानक’ की कहानी आम मसाला फिल्मों की तरह ही शुरू होती है जिसमें एक खूबसूरत युवती को कुछ गुंडे छेड़ रहे होते हैं और हीरो आकर उसे बचा लेता है। बस यहां मामला एक कब्रिस्तान के बाहर से शुरू होता है। हीरो पुलिस अफसर है, लेकिन सादी वर्दी में गुंडों की धुलाई करता है और हीरोइन का दिल जीत लेता है। कहानी आगे बढ़ती है, युवती अनाथ है। जल्द ही दोनों शादी कर लेते हैं और अपनी नई जिंदगी शुरू करने का मन बना लेते हैं। जीवन करवट लेता है। पुलिस अफसर का तबादला दूसरे शहर में होता है। उसकी पत्नी को तार मिलता है कि उसे खुद इस दूसरे शहर अकेले आना होगा। वह अकेले सफर करने का हौसला तो करती है लेकिन ये सफर बहुत भयानक होने वाला है। तमाम राज धीरे धीरे हवा में उड़ने वाले हैं। पारलौकिक शक्तियां राह का रोड़ा बनने वाली है और खुलने वाला है रहस्य इस शहर के वीरान इलाकों का। और, शहर की सबसे चर्चित हवेली का।
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दिन के उजाले का हॉरर
फिल्म ‘भयानक’ की कहानी में एक्शन है, इमोशन है, ड्रामा है और ड्रैकुला है। सन 79 में जब अंग्रेजी फिल्मों को देख पाना हिंदी सिनेमा के दर्शकों के लिए इतना आसान नहीं था, एक लीक से हटकर फिल्म बनाना और इसके लिए उस वक्त के दो उभरते सितारों को राजी कर लेना बड़ा काम था। फिल्म की पूरी शूटिंग ऐसे इलाकों में की गई है, जहां वाकई दिन में जाते हुए डर लग सकता है। हिंदी फिल्मों का हॉरर तब तक आम तौर पर रात के अंधेरे में ही शबाब पर आता था, लेकिन एस यू सैयद ने इस कहानी को अधिकतर दिन के उजाले में रखा है। यही करतब फिल्म के लिए दर्शकों को आकर्षित करने में सफल भी रहे। फिल्म में मिथुन को पुलिस अफसर के रोल में देखना अपने आप में कौतुहल जगाने वाला रहा और उन्होंने अपने किरदार के लिए अपना हेयर स्टाइल वगैरह भी कोई खास नहीं बदला। रंजीता और मिथुन का करिश्मा उनके चाहने वालों के अलावा हॉरर फिल्मों के शौकीनों के लिए भी एक अलग ही अनुभव वाला रहा।
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मिथुन की पहली हॉरर फिल्म
हिंदी सिनेमा के दर्शकों के लिए हॉरर शुरू से एक ऐसा विषय रहा है जिसमें उन्हें स्तरीय फिल्में देखने को कम ही मिली हैं। हाल ही में नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई फिल्म ‘बुलबुल’ ने थोड़ी उम्मीद बंधाई है नहीं तो 1972 में आई फिल्म ‘दो गज जमीन के नीचे’ से रामसे बंधुओं ने हॉरर का जो देसी पौधा हिंदी सिनेमा में रोपा, उसकी छाया के नीचे हिंदी सिनेमा के मुख्यधारा के दर्शकों का आना कम ही हो पाया। सई परांजपे ने 1980 में फिल्म ‘गहराई’ में ये सूरत बदलने की कोशिश की थी और उससे पहले रिलीज हुई थी फिल्म ‘भयानक’। रामसे बंधु इससे पहले दो और फिल्में ‘अंधेरा’ और ‘दरवाजा’ रिलीज कर चुके थे। लेकिन, ‘भयानक’ की रिलीज ने लोगों को कुछ नया सोचने को प्रेरित किया। देखा जाए तो मिथुन चक्रवर्ती ने अपने पूरे करियर में दो ही हॉरर फिल्में की हैं, एक तो ये ‘भयानक’ और दूसरी 1989 में रिलीज हुई राज कुमार कोहली निर्देशित फिल्म ‘बीस साल बाद’ जिसमें वह डिंपल कपाड़िया और मीनाक्षी शेषाद्रि के साथ नजर आए। फिल्म ‘भयानक’ में मिथुन ने अदाकारी का एक और लिटमस टेस्ट पार किया और इसने उनकी अभिनय क्षमता की तरफ भी लोगों, खासकर हिंदी सिनेमा के निर्माताओं को ध्यान खींचा।