भोजपुरी इंडस्ट्री के पहले सुपरस्टार कहे जाने वाले अभिनेता रवि किशन आज अपना 53वां जन्मदिन मना रहे हैं। 17 जुलाई 1971 को उत्तर प्रदेश के जौनपुर में जन्मे रवि किशन ने बेशक भोजपुरी सिनेमा से जाने जाते हैं, लेकिन उन्होंने अपने शानदार काम से साउथ से लेकर बॉलीवुड कलाकारों को भी अपना दीवाना बना दिया। उन्होंने भोजपुरी इंडस्ट्री में 'बांके बिहारी एमएलए', 'गंगा', 'गब्बर', 'बिहारी माफिया', 'चंदू की चमेली' जैसी कई शानदार फिल्मों में काम किया है। वह 'किक 2', 'मैं हूं लकी द रेसर', 'सुप्रीम' जैसी साउथ फिल्मों में भी नजर आए हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने ओटीटी की दुनिया में भी अपने दमदार अंदाज से अलग पहचान बनाई है। अपनी शानदार एक्टिंग के साथ-साथ रवि किशन अपने धांसू डायलॉग्स की वजह सभी फैंस के बीच पसंद किए जाते हैं। फिल्मों में उनके द्वारा बोले गए कई डायलॉग्स फैंस की जुबां पर चढ़े हुए हैं। आइए आपको उनके कुछ डायलॉग बताते हैं।
Ravi Kishan: ‘जिंदगी झंड बा...’ ही नहीं, रवि किशन के इन डायलॉग्स के आगे बॉलीवुड के तीनों खान भी फेल, क्या आपने सुने?
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पहला डायलॉग
रवि किशन ने अपनी फिल्मों में एक से एक डायलॉग बोले हैं। लेकिन उनका सबसे लोकप्रिय डायलॉग 'जिंदगी झंड बा फिर भी घमंड बा' है, जो आज भी बच्चे बच्चे की जुबां पर चढ़ा हुआ है। यह डायलॉग बेशक भोजपुरी फिल्म का है। लेकिन हिंदी फिल्मों को पसंद करने वाले लोग भी यह डायलॉग अक्सर बोलते हुए नजर आ जाते हैं।
दूसरा डायलॉग
रवि किशन ने साल 2011 में फिल्म लूट में काम किया था, जो फैंस के बीच कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाई। हालांकि, फिल्म में रवि किशन की एक्टिंग की काफी तारीफ हुई। इसी फिल्म का एक डायलॉग भी चर्चा में रहा। रवि किशन इस फिल्म में 'मुकर जाने के लिए कातिल ने अच्छा बहाना ढूंढ निकाला है। हर किसी से पूछता है... इसको किसने मार डाला' बोलते दिखे थे, जिसे काफी पसंद किया गया।
तीसरा डायलॉग
बॉलीवुड अभिनेता सनी देओल का डायलॉग 'ये ढाई किलो का हाथ...' आज भी किसी न किसी की जुबां से सुनने को मिल जाता है। लेकिन रवि किशन अपनी फिल्मों में इसका नया वर्जन लेकर आए थे। उनकी फिल्म 'लक्की कबूतर' में डायलॉग 'ये ढाई किलो हाथ नहीं... साढ़े तीन किलो का हाथ है... जिस पर भी पड़ता है ना... वो उठता नहीं उठ जाता है...' खूब पसंद किया गया था।
चौथा डायलॉग
फिल्म 'लूट' में रवि किशन का शायराना अंदाज भी देखने को मिला था। इस फिल्म में रवि किशन शायराना अंदाज में कहते दिखे थे, 'ना जानें बादलों के दरमियां कैसी साजिश हुई... मेरा घर मिट्टी का था , मेरे ही घर बारिश हुई।' यह कहना गलत नहीं होगा कि रवि किशन द्वारा बोली गई ये लाइनें प्यार करने वालों के लिए ही बनी हैं।