दुनिया की सबसे बुजुर्ग शूटर दादियों की कहानी बतलाती फिल्म सांड की आंख का ट्रेलर रिलीज हो ही गया। ट्रेलर रिलीज के मौके पर दोनों ही दादियों के किरदार निभा रही अदाकारएं यानी भूमि पेडनेकर और तापसी पन्नू मौजूद रहीं। सोने पर सुहागा तब हुआ जब कहानी की असली दादी भी यहां पहुंची। हालांकि दादी चंद्रो तोमर किसी कारण वश यहां नहीं आ पाईं, पर प्रकाशी यहां पहुंची। दादी प्रकाशी के चेहरे पर उत्साह और जु़बान पर दोनों अदाकारओं की वाहवाही के अलावा कुछ और नहीं दिखा। वहीं यहां मौजूद दर्शकों को ट्रेलर देखने के बाद यह भी विश्वास हो गया की दोनों ही अभिनेत्रियों ने अपने किरदार बहुत ही उम्दा तरीके से निभाएं हैं।
सांड की आंख के ट्रेलर लॉन्च पर भावुक हुईं तापसी-भूमि, बोलीं- यह फिल्म मां और दादी के नाम
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फिल्म की कहानी दो महिलाओं की है जिन्होंने समाज और समय दोनों से युद्ध किया है। इनकी कहानी सभी के लिए बहुत बड़ी सीख है। ऐसा हम नहीं बल्कि स्टेज पर आते ही भावुक हो गई अभिनेत्री भूमि पेडनेकर कहती हैं। वह आगे कहती हैं " जैसे जैसे हम इनके बारे में और जानें, हमें यह अहसास हुआ कि हम इनके सामने कुछ नहीं हैं। सच कहूं तो चंद्रो दादी और प्रकाशी दादी बॉम्ब डॉट कॉम हैं, मतलब जो साहस, उत्साह और जिंदगी जीने की जो असली चाह होती है, वह इन्हीं के पास है। हमें इनसे बहुत कुछ सीखने को मिला है। "
30 साल की उम्र में 60 साल के इंसान का किरदार निभाना आसान नहीं है, उसके बावजूद दोनों ही अदाकारओं ने उम्दा प्रदर्शन किया है, ऐसा ट्रेलर देखने के बाद साफ है। इस फिल्म को करने के बाद तापसी और भूमि दोनों ही खासा उत्साहित हैं। तापसी कहती हैं " इस सफर के बारे में जितना कहूंगी वह कम है, मुझे लगता है मैं इस विषय पर एक किताब लिख सकती हूं। इसकी शुरूआत ऐसे हुई, मुझे एक ऐसी फिल्म करनी थी, जिस में दो हीरोइन हों और दोनों के किरदार समान हों। मैंने शिबाशीष को कॉल किया और कहा मुझे पता है आपके पास एक कहानी है जिसमें दो हीरोइन हैं। मुझे कहानी को लेकर कुछ नहीं पता था, यह भी नहीं जानती थी कि किरदारों की उमर कितनी होगी। फिर एक मीटिंग हुई, वहां 12 लोग थे और उनमें तुषार भी थे। तुषार से जब मिली उनके फोन के कवर पर भी दादियों की तस्वीर लगी थी। उन्होंने वही तस्वीर दिखाकर कहा की ये हैं जिनका किरदार निभाना है। मुझे यकीन था की मैं तो कर ही नहीं पाउंगी, मुझे ये क्या ही लेंगे। फिर मैने कहानी सुनी, मैं उस बीच कई बार रोई। अगले 10 सेकेंड में सोच लिया की हां मैं ही यह कर रही हूं। मैं जानती हूं कि यह पूरे देश के लिए एक हीरो की कहानी है, पर मैं जब कहानी सुन रही थी, उस वक्त सिर्फ अपनी मां के बारे में ही सोच रही थी। क्योंकि इस फिल्म में उन लोगों की बात हो रही है, जिन्होंने शादी से पहले माता पिता के कहने पर, शादी के बाद पति के कहने पर और फिर बच्चों के कहने पर अपनी जिंदगी व्यतीत की है। कभी खुद के लिए जी ही नहीं। मेरी मां 60 साल की हैं इस वक्त, मैं चाहती हूं मैं उनके लिए एक प्रेरणास्त्रोत बनूं। मैं यह फिल्म अपनी मां के नाम करती हूं और आप सभी से यही आग्रह करूंगी की आप भी अपनी मांओं और दादियों को यह फिल्म जरूर दिखाएं। "