मेरे हिसाब से फिल्म ‘चीनी कम’ हिंदी सिनेमा की उन चंद अंगुलियों पर गिनी जा सकने वाली फिल्मों में से हैं जिनमें किसी निर्देशक ने प्रेम की वह परिभाषा दिखाने की कोशिश की, जिसे अंग्रेजी में ‘सोल मेट्स’ कहते हैं। राज बब्बर और अनीता राज की फिल्म ‘प्रेम गीत’ में जगजीत सिंह को ये गाते सुनकर और बेहतर तरीके से इसे समझा जा सकता है, ‘ना उम्र की सीमा हो, न जन्म का हो बंधन, जब प्यार करे कोई तो देखे केवल मन...!’ तो फिल्म ‘निशब्द’ में जहां रामगोपाल वर्मा चूके थे, निर्देशक आर बालाकृष्णन यानी बाल्की ने उसी को अपने तरकश का अचूक बाण बना लिया। सव्यसाची तो खैर अमिताभ बच्चन शुरू से ही रहे हैं। अर्जुन के 12 नामों में से एक नाम है सव्यसाची जिसका मतलब होता है वह धनुर्धर जो दोनों हाथों से तीर का संधान कर सके। फिल्म ‘चीनी कम’ में अमिताभ बच्चन ने अपने अभिनय का सबसे सरल रूप दिखाया है। आमतौर पर अमिताभ बच्चन अभिनय करते वक्त बहुत संजीदा रहते हैं, लेकिन बाल्की और अमिताभ के बीच यहां राणा प्रताप और चेतक जैसी ट्यूनिंग दिखती। वो श्यामनारायण पाण्डेय की लिखी लाइन याद है ना आपको, ‘जो तनिक हवा से बाग हिली, लेकर सवार उड़ जाता था, राणा की पुतली फिरी नहीं तब तक चेतक मुड़ जाता था...।’
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रिश्तों की अनकही मिठास
एक निर्देशक और एक अभिनेता के बीच वैसे तो ट्यूनिंग कमाल की होनी ही चाहिए। लेकिन, अभिनेता अगर अमिताभ बच्चन हो तो फिर तो निर्देशक भी बस इसी ट्यूनिंग के लिए शरणागत रहता है। अगर आपने अमिताभ बच्चन को कभी कोई स्पीच या कभी किसी सीन का रिहर्सल करते देखा है तो आप इसे आसानी से समझ पाएंगे। राणा और चेतक वाली इस ट्यूनिंग में भी चेतक का समर्पण ज्यादा है। और, अगर अमिताभ बच्चन का अपने काम के प्रति समर्पण बस एक दो बार ही आप देख लें तो आपके जीवन में शर्तिया कुछ न कुछ तो तब्दीली पूरी उमर के लिए आ ही जाएगी। इस फिल्म के ऐसे कम से कम दो किस्से इस बहुत मशहूर रहे हैं। फिल्म ‘चीनी कम’ के नाम में भले मिठास कम दिखती हो, लेकिन इस फिल्म की कसावट बहुत मीठी है, इसकी बुनावट में मिसरी घुली है और इसका तागा तागा तन मन मीठा कर जाता है। लेकिन इस स्वाद को महसूस करने के लिए प्रेम में गूंगा होना ज़रूरी है।
अमिताभ की बेमिसाल अदाकारी
फिल्म ‘चीनी कम’ के जिन दो सीन की मैं बात कर रहा हूं उसमें से पहला तो वो सीन जिसमें लंदन में अपना रेस्तरां स्पाइस सिक्स चलाने वाले बुद्धदेव गुप्ता को गुस्सा होना था। बाल्की ने अमिताभ को सीन समझाया और जैसे ही एक्शन बोला, अमिताभ अपने एंग्री यंग मैन वाले मूड में आ गए। लेकिन बाल्की ने ओके नहीं बोला। अमिताभ झुंझलाए भी थोड़ा सा कि ये क्या बात हुई भाई। बाल्की अमिताभ के पास गए। उनके कान में कुछ फुसफुसाए। और जैसे ही कैमरा रोल हुआ तो इस बार अमिताभ के चेहरे के भाव बदल चुके थे। अमिताभ अपनी पहली फिल्म ‘सात हिंदुस्तानी’ से लेकर पिछली फिल्म ‘गुलाबो सिताबो’ तक निर्देशक के ही एक्टर रहे हैं। उनका अपना सुझाव फिल्म को लेकर होता है लेकिन ज्यादा फेरबदल के पीछे वह कम ही पड़ते हैं। उनको ‘याराना’ का गाना ‘छूकर मेरे मन को किया तूने क्या इशारा..’ भी काफी तेज लगा था। संगीतकार राजेश रोशन के लिए उन्होंने फोन भी किया लेकिन कोलकाता में जो गाना शूट हुआ वह वही रहा हो राजेश रोशन ने बनाया था।
शो मस्ट गो ऑन..!
फिल्म का दूसरा किस्सा थोड़ा भारी मन का है। हुआ यूं कि फिल्म की शूटिंग चल रही थी और खबर आई कि ऋषिकेश मुखर्जी नहीं रहे। बिमल रॉय के नवरत्नों में शामिल रहे ऋषिकेश मुखर्जी का अमिताभ बच्चन के करियर में बड़ा योगदान रहा है और वह उनकी काफी इज्जत भी करते रहे। खबर सुनकर अमिताभ की आंखें नम हो आईं। ये जब हो रहा था तो फिल्म ‘चीनी कम’ का शॉट लगा हुआ था। सौ सवा सौ लोग मौके पर मौजूद थे और अमिताभ को याद आया, शो मस्ट गो ऑन। उन्होंने बाल्की को दम भर रुकने को इशारा किया। एक कोने में गए। अपनी नम आंखों को पोछा। चार, पांच लंबी-लंबी सांसें लीं और खुद को व्यवस्थित कर लिया। इसके बाद वन टेक में उन्होंने अगला शॉट दिया। शॉट खत्म हुआ तो उनके भीतर का सारा दुख सैलाब बनकर बाहर आया तो वह सेट पर ही देर तक बच्चों की तरह रोते रहे। लेकिन, उससे पहले उन्होंने उन सवा सौ लोगों की मेहनत और उनके समय को खराब नहीं होने दिया।
तब्बू के जीवन की अनमोल धरोहर
फिल्म ‘चीनी कम’ के बारे में तब्बू से बात करो तो वह बिल्कुल चहक सी उठती हैं। तब्बू को मैंने उनकी पहली फिल्म ‘हम नौजवान’ से तरक्की करते देखा है। इस फिल्म के बारे में चर्चा करते ही उनकी आवाज वैसे ही बदल जाती है जैसे किसी बच्चे को उसकी मनचाही चीज मिल गई हो। अमिताभ बच्चन के साथ 1999 के वर्ल्ड टूर पर तब्बू भी गईं थीं और तब से उनकी दिली ख्वाहिश रही कि वह अमिताभ बच्चन के साथ एक फिल्म में तो जरूर काम करें। वह बताती हैं, “फिल्म ‘चीनी कम’ बतौर अभिनेत्री तो मेरे दिल के काफी करीब है ही, बतौर इंसान भी मैंने इस फिल्म की शूटिंग के दौरान जो लम्हे जिये। वे मेरी अनमोल धरोहर हैं।”