आज का बाइस्कोप फिल्म ‘चोरों की बारात’ पर है। यही वह फिल्म जिसकी रिलीज होने से कुछ ही महीने पहले मशहूर अभिनेत्री नीतू सिंह कपूर खानदान की बहू यानी नीतू कपूर बनी थीं। ‘चोरों की बारात’ बतौर हीरोइन शूट की गई नीतू सिंह की आखिरी फिल्म है। फिल्म अगर आप ध्यान से देखेंगे तो आपको कई जगह इस बात का एहसास होगा कि वह शत्रुघ्न सिन्हा के करीब आने पर या कहीं कुछ तेजी से करने को लेकर हिचकिचा रही हैं। जैसे कि उस गाने में, ‘तेरी मेरी दोस्ती हो गई, सारी दुनिया से दुश्मनी हो गई…!’ दरअसल तब तक नीतू सिंह अपने होने वाले पति ऋषि कपूर के प्यार में इतनी खो चुकी थीं कि उन्हें किसी के भी पास आने में दिक्कत होती थी। फिल्म ‘चोरों की बारात’ रिलीज होने के बाद कई दूसरी फिल्मों में भी नीतू सिंह नजर आती रहीं लेकिन ये सारी फिल्में उनकी शादी से पहले शूट हो चुकी फिल्में हैं। दिलचस्प बात ये है कि जब फिल्म ‘चोरों की बारात’ रिलीज हुई तब तक नीतू कपूर मां बनने की तैयारियां शुरू कर चुकी थीं और रणबीर कपूर की बडी बहन ऋद्धिमा ने अपनी मां के गर्भ में सांसें लेना शुरू कर दिया था।
Bioscope S2: ऋद्धिमा को गर्भ में लेकर नीतू कपूर ने निकाली चोरों की सबसे बड़ी बारात, हीरो हाशिये पर
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बतौर हीरोइन आखिरी फिल्म
15 सितंबर 1980 को ऋद्धिमा को जन्म देने वाली नीतू कपूर की शादी उसी साल 22 जनवरी 1980 को हुई। यानी कि ऋद्धिमा के जन्म से आठ महीने पहले। फिल्म ‘चोरों की बारात’ की शूटिंग के समय नीतू सिंह ने काफी सावधानियां बरतीं और फिर इसकी शूटिंग खत्म होते ही उन्होंने बतौर हीरोइन पैकअप बोल दिया। ‘चोरों की बारात’ के बाद बतौर हीरोइन नीतू सिंह की पहले ही शूट हो चुकी फिल्में जो अगले दो तीन साल तक रिलीज होती रहीं, उनमें शामिल हैं, टएक और एक ग्यारह’, ‘खून का रिश्ता’, ‘याराना’, ‘वक्त की दीवार’ और ‘चोरनी’।
शूटिंग को बाय बाय
फिल्म ‘चोरों की बारात’ की शूटिंग के बाद शूटिंग को ही बाय बाय बोल देने वाली नीतू कपूर सेकेंड इनिंग्स में फिर सीधे परदे दिखाई दीं इम्तियाज अली की फिल्म ‘लव आज कल’ में अपने पति ऋषि कपूर के साथ साल 2009 में। ऋषि कपूर के साथ ही नीतू सिंह ने ‘दो दूनी चार’ और ‘बेशरम’ भी की। ‘बेशरम’ में इन दोनों के साथ इनका बेटा रणबीर कपूर भी है। बुलबुल चौटाला के किरदार में नीतू कपूर ने फिल्म में खूब रंग जमाया लेकिन अपने भाई अनुराग कश्यप की देखा देखी सेट पर आकर सीन, कहानी, डॉयलॉग बदल देने के चक्कर में इसके निर्देशक अभिनव कश्यप ने वह फिल्म ही नहीं बनाई जो इसके राइटर ने उन्हें दी थी। बताते हैं कि फिल्म ‘बेशरम’ की ओरीजनल कहानी बहुत शानदार थी।
कहानी कमाल की
कहानी फिल्म ‘चोरों की बारात’ की भी कमाल की रही। एक द्वीप पर रहने वाले रईस की बेटी अंजू को शहर में शेखर से इश्क हो जाता है। वह शेखर को अपने साथ इस द्वीप पर लाती है। और, इसी बीच कुछ और लोग भी इस द्वीप पर पहुंच जाते हैं। इन लोगों को अंजू के पिता से अपना पुराना हिसाब चुकता करना है। जब अंजू की जान मुश्किल में फंसती है तो खुलासा होता है कि आखिर शेखर है कौन, और यहां कर क्या रहा है। अपने जमाने के स्टार कलाकार नवीन निश्चल को लेकर ‘चोरों की बारात’ नाम की एक फिल्म लेखक निर्देशक नरेंद्र बेदी ने भी साल 1975 में शुरू की थी लेकिन तब तक अमिताभ बच्चन नए एंग्री यंग मैन बनकर परदे पर आ चुके थे और नवीन निश्चल के करियर को अपनी छांव से ढक चुके थे।
बारात से बारात तक
फिल्म ‘चोरों की बारात’ के पोस्टर पर आपको इसके निर्माता का नाम लिखा मिलेगा सलीम ए कोलकातावाला। ये सलीम ए का मतलब है सलीम अख्तर और ये वही सलीम अख्तर हैं जिन्होंने ही हिंदी सिनेमा में अभिनेत्री रानी मुखर्जी को उनके करियर का पहला ब्रेक दिया। ये फिल्म थी, ‘राजा की आएगी बारात’। और, इस फिल्म में हीरो थे मशहूर अभिनेता अमजद खान के बेटे शादाब खान। फिल्म ‘चोरों की बारात’ में संगीत था लक्ष्मीकांत प्यारेलाल का और गाने लिखे थे आनंद बक्षी ने। फिल्म का एक गाना, ‘आगे आगे दूल्हा, पीछे चोरों की बारात…’, खूब हिट हुआ। दिक्कत इस फिल्म की ये थी कि हरमेश मल्होत्रा ने फिल्म के गाने फिल्माए कहानी के खलनायकों पर और अभिनेता जीवन इन गानों पर वैसा रंग नहीं जमा पाए जैसा प्राण इस तरह के गानों पर जमा दिया करते थे। शत्रुघ्न सिन्हा और नीतू सिंह की केमिस्ट्री तो ठीक थी लेकिन दोनों के बीच का रोमांटिक ट्रैक हरमेश मल्होत्रा अपनी हीरोइन की स्थिति देखते हुए ज्यादा बड़ा नहीं कर पाए और फिल्म पर इसके खलनायक ही इसके नाम के अनुसार ज्यादा हावी रहे।