बीबीसी के एक ऑनलाइन पोल में बीती सदी के महानायक बने अमिताभ बच्चन की फिल्म ‘लावारिस’ ने साल 1981 में कमाल का कलेक्शन किया। लेकिन, आपको शायद जानकर हैरानी हो कि उस साल कलेक्शन के लिहाज से नंबर वन फिल्म थी, दिलीप कुमार, मनोज कुमार, हेमा मालिनी और शशि कपूर की फिल्म ‘क्रांति’। मल्टीस्टारर फिल्म ‘क्रांति’ के बाद मल्टीस्टारर फिल्म ‘नसीब’ नंबर दो पर रही और जीतेंद्र, हेमा मालिनी व परवीन बाबी स्टारर फिल्म ‘मेरी आवाज सुनो’ का इस लिस्ट में तीसरा नंबर रहा। अमिताभ बच्चन की फिल्म प्रकाश मेहरा निर्देशित फिल्म ‘लावारिस’ का नंबर इसके बाद चौथी पायदान पर आता है। इसी साल रिलीज हुईं अमिताभ बच्चन की फिल्में ‘कालिया’ और ‘याराना’ भी हिट रहीं। ये और बात है कि अगले साल हुए फिल्मफेयर पुरस्कारों में एक भी पुरस्कार अमिताभ बच्चन को नहीं मिला। अगर आपने प्रकाश मेहरा की बनाई फिल्में ध्यान से देखी हैं तो आपको समझ आएगा कि वह हर फिल्म में बाप-बेटे के नाजुक रिश्तों का नया दृष्टिकोण जरूर दिखाते थे। ये उनके अपनी निजी जिंदगी के एहसास से निकले किस्से हैं। ‘लावारिस’ की भी यही कहानी है और उनकी आखिरी हिट फिल्म ‘शराबी’ की भी यही कहानी रही। बाइस्कोप में मैं ‘शराबी’ के किस्से पहले ही सुना चुका हूं, आज बात करते हैं, ‘लावारिस’ की जिसने समझाया कि ‘जिसका कोई नहीं उसका तो ...’
Bioscope S2: बीच फिल्म से इसलिए परवीन बाबी की हुई छुट्टी, फोन न उठता तो राखी का भी तय था पैकअप
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जिसका कोई नहीं..
प्रकाश मेहरा निर्देशित फिल्म ‘लावारिस’ कहानी है एक अनाथ हीरा की। रणवीर सिंह को विद्या से प्यार है। विद्या के पेट में हीरा होता है तो उसे रणवीर सिंह उसके हाल पर छोड़ देता है। विद्या जिस बच्चे को जन्म देती है उसे उसका भाई मरा हुआ बता देता है। जिस गंगू को बच्चा ठिकाने लगाने के लिए मिलता है, वह उसे पाल लेता है। हीरा बड़ा होता है और उसे पता चलता है कि वह लावारिस है। उसकी जिंदगी में मोहिनी आती है। और, महेंद्र सिंह से वह दूसरों के लिए पंगा लेने को तैयार होता दिखता है। रणवीर फिर कहानी में लौटता है। हीरा और उसकी पटरियां समांतर होने पाएं उससे पहले महेंद्र फिर कैंची काट देता है। धींगामुश्ती होती है। पकड़ धकड़ होती है। जूतमपैजार और लात-घूंसे चलने के बाद कहानी द एंड के स्टेशन पर पहुंचती है, जहां सब कुछ ठीक ठाक हो ही जाता है।
ऐसे हुई जीनत अमान की एंट्री
फिल्म ‘लावारिस’ में अमिताभ बच्चन तो अपने फुलटू मूड में हैं। जीनत अमान भी अपने करियर में इतनी नमकीन या तो यहां या फिर वहां हुई हैं जहां अमिताभ बच्चन फिल्म ‘पुकार’ में गाना गाते हैं, ‘समंदर में नहाके और भी नमकीन हो गई हो।‘ लेकिन, आपको शायद पता न हो कि जीनत अमान इस फिल्म की सेकंड च्वाइस हीरोइन रहीं। फिल्म में हीरोइन तो पहले प्रकाश मेहरा ने अमिताभ बच्चन की सिफारिश पर परवीन बाबी को ही लिया था। परवीन बाबी का ये वो दौर था जब वह कुछ भी, कहीं भी, किसी के भी सामने बोल देती थीं। उन दिनों ‘स्टारडस्ट’ मैगजीन को दिया गया उनका इंटरव्यू अब तक लोगों को याद है। बताते हैं कि परवीन की बिगड़ती मानसिक दशा और दिशा को देखते हुए ही फिल्म ‘लावारिस’ का पहला शेड्यूल परवीन बाबी के साथ शूट हो जाने के बावजूद उन्हें बाहर कर दिया गया और जीनत अमान को इस फिल्म में लाया गया। प्रकाश मेहरा ने कभी इसकी कोई शिकायत नहीं की क्योंकि जो केमिस्ट्री अमिताभ बच्चन और जीनत की फिल्म के गाने, ‘कब के बिछड़े हुए हम आज कहां आके मिले’ में दिखाई है, वह इससे पहले अमिताभ और रेखा के बीच ही दिखी थी या तो फिल्म ‘सुहाग में या फिर उसके पहले ‘मिस्टर नटवरलाल’ में।
फोन न उठता तो हो जाता राखी का पैकअप
फिल्म ‘लावारिस’ में अमिताभ बच्चन की मां बनी राखी के भी अजीब किस्से हैं शूटिंग के। फिल्म में एक सीन फिल्माया जाना था अमजद खान और राखी के बीच। डायरेक्टर प्रकाश मेहरा सब लाइटिंग वाइटिंग करके लोकेशन पर रेडी टू टेक बैठे हैं, लेकिन राखी हैं कि उनका पता ही नहीं। प्रोडक्शन मैनेजर फोन पर फोन किए जा रहा है और राखी के घर में जो फोन उठा रहा है वो उनसे बात तक नहीं करा रहा। प्रकाश मेहरा का माथा होते होते गरम हो गया। अमजद खान उन दिनों बिजी सितारे थे और बड़ी मुश्किल से उनकी डेट मिली थी। प्रकाश मेहरा ने कहा कि लास्ट फोन मिलाओ, मेरी बात कराओ और इस बार बात न हो तो आज का पैकअप। कल यही सीन किसी दूसरी हीरोइन के साथ करते हैं। प्रकाश मेहरा बोल तो गए पर उनके दिल को धक से ये भी हुआ कि राखी न आईं तो फिर अमिताभ बच्चन की मां का रोल करेगा कौन? क्योंकि खुद राखी तमाम मिन्नतों के बाद इस रोल के लिए तैयार हुई थी और वह भी इसलिए कि अमिताभ बच्चन का वह फिल्म ‘कभी कभी’ दिलाने के लिए एहसान मानती थीं। खैर, फोन मिलाया गया। राखी के घर की घंटी बजी। और इत्तेफाकन खुद राखी ने फोन उठाया। प्रकाश मेहरा की वह आवाज पहचान गईं, छूटते ही बोलीं, ‘बेबी की तबीयत खराब थी सुबह से, तो फोन पर न आ सकी। बस अभी शूटिंग पर पहुंचती हूं।’ प्रकाश मेहरा ने लंबी सांस ली और बात आगे बढ़ी।
हर गाना रहा सुपरहिट
फिल्म ‘लावारिस’ की तमाम बातों में से एक बात ये भी गौर करने लायक है कि इसके गाने सारे सुपरहिट थे। ‘अपनी तो जैसे तैसे, थोड़ी ऐसे या वैसे कट जाएगी’, साल का सुपर डुपर हिट गाना रहा। जीनत अमान के साथ वाला, ‘कब के बिछड़े के’ बारे में मैं जिक्र कर ही चुका हूं। ‘काहे पैसे पे तू इतना गुरूर करे है’ और ‘जिसका कोई नहीं उसका तो खुदा है यारों’, ये दोनों गाने उन दिनों कानपुर में घंटाघर से परेड तक खूब बजा करता था। ‘लावारिस’ की कमाई बॉक्स ऑफिस पर और कमाल होती अगर फिल्म में अमिताभ बच्चन का वो गाना, ‘मेरे अंगने में तुम्हारा क्या काम है’, न होता। साल 81 तक हिंदुस्तान इतना जेंटलमैन नहीं हुआ था। तमाम फैमिली वाले तो फिल्म देखने बस इसी गाने के चलते नहीं गए। ये अलग बात है कि अमिताभ बच्चन के स्टेज शोज में ये गाना खूब हिट रहा। ‘मेरे अंगने में तुम्हारा क्या काम है’, ये गाना पहली बार स्टेज पर अमिताभ बच्चन ने सरप्राइज के तौर पर गाया था। फिल्म में भी ये गाना अमिताभ बच्चन ने ही गाया है। इससे पहले वह फिल्म ‘मिस्टर नटवरलाल’ में ‘मेरे पास आओ मेरे दोस्तों’ जैसा हिट गाना गा ही चुके थे।