मुंबई शहर में कभी वॉचमैन की नौकरी करने वाले नवाजुद्दीन सिद्दीकी को इसी शहर ने बड़ा सितारा बनाया है। सुपरस्टार भी वह बन जाते अगर बीच में वह गणेश गायतोंडे बनने का मोह संभाल पाए होते। नवाजुद्दीन के सितारे धूमिल होने उस घटना से शुरू हुए थे जब चर्चित अभिनेत्री चित्रांगदा सिंह ने उनके साथ शूटिंग कर देने से मना कर दिया था। उनके करीबी कहते हैं कि नवाजुद्दीन की बायोपिक जब भी बनेगी जरूर सुपर हिट होगी। नेटफ्लिक्स की सीरीज ‘सैक्रेड गेम्स’ के बाद भी नवाज अपनी चमक कायम रखने की कोशिश पूरी कर रहे हैं। नवाजुद्दीन सिद्दीकी को करियर के इस मोड़ पर एक बड़ी हिट की जरूरत है। आइए उनके जन्मदिन पर जानते हैं उनके करियर की 10 ऐसी फिल्मों के बारे में जिन्होंने उन्हें बुलंदियों तक ले जाने में खूब मददकी।
Nawazuddin Siddiqui: गणेश गायतोंडे से पहले इन 10 किरदारों ने नवाज को बनाया स्टार, हर किरदार अलहदा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
किरदार : जेठू
फिल्म : देख इंडियन सर्कस (2011)
साल 1999 में पहली बार परदे पर दिखे नवाजुद्दीन के करियर में जिक्र करने लायक पहला रोल इसी फिल्म में आया। मंगेश हदवाले के निर्देशन में बनी इस फिल्म में नवाजुद्दीन का किरदार राजस्थान के एक समुदाय राबड़ी से आता है। उन्हें मिट्टी का बेटा यानी धरतीपुत्र कहा जाता है। यह समुदाय हमेशा एक स्थान से दूसरे स्थान तक यात्राएं करता है। फिल्म में जेठू पने बीवी बच्चों की देखभाल करने वाला और उन्हें प्यार करने वाला इंसान हैं। वह और उसकी पत्नी एक दूसरे से बचपन से प्यार करते हैं और एक दूसरे पर बहुत भरोसा भी करते हैं। इस फिल्म में शानदार अभिनय के लिए नवाजुद्दीन को नेशनल फिल्म अवार्ड्स का स्पेशल जूरी अवॉर्ड दिया गया।
किरदार : तैमूर
फिल्म : तलाश (2012)
इस फिल्म में नवाजुद्दीन का किरदार एक लंगड़े इंसान तैमूर का है। इस साइकोलॉजिकल क्राइम थ्रिलर ड्रामा फिल्म को जानी-मानी निर्देशक रीमा कागती ने फिल्माया है। तैमूर का असल मतलब अरबी भाषा में फौलाद से होता है। इस फिल्म में शानदार अभिनय के लिए नवाज को सर्वश्रेष्ठ सहायक कलाकार के एशियन फिल्म अवार्ड से नवाजा गया।
किरदार : इंस्पेक्टर ए खान
फिल्म : कहानी (2012)
फिल्म के निर्देशक सुजॉय घोष ने यह किरदार जानबूझकर शारीरिक तौर पर एकदम दुबला पतला लेकिन दिमाग से बहुत होशियार, देशभक्ति से परिपूर्ण और वफादार बनाया। एक आईबी ऑफिसर होने के बावजूद वह एक सस्ती सिगरेट का सेवन करता है। यह फिल्म नवाजुद्दीन के लिए एक बहुत बड़ा मौका रही। इससे पहले वह 12 साल तक छोटे-मोटे किरदारों के साथ संघर्ष करते रहे। इस फिल्म के बाद वह हिंदी सिनेमा के सबसे व्यस्त कलाकारों में से एक हो गए।
किरदार : फैजल खान
फिल्म : गैंग्स ऑफ वासेपुर (2012)
नवाजुद्दीन के फिल्मी करियर की दो भागों में बनी ये फिल्म सबसे ज्यादा चर्चित रही। फिल्म निर्देशक अनुराग कश्यप ने इसके रिलीज होने के वक्त बड़ी बड़ी डींगें भले हांकी हो लेकिन फिल्म बनाने वाली कंपनी के खातों में ये दोनों फिल्में घाटे का सौदा रहीं। हां, इन फिल्मों ने नवाजुद्दीन की ऐसी ब्रांडिंग कर दी कि इस छवि से बाहर निकलने की उनकी हर कोशिश कम पड़ती जा रही है। नवाजुद्दीन ने इस फिल्म में ऋचा चड्ढा के बेटे का किरदार निभाया है। पूरी फिल्म में नवाज ऋचा को बुढ़िया कह कर बुलाते हैं। लेकिन, हकीकत में जिस समय यह फिल्म आई थी, उस समय ऋचा चड्ढा की उम्र सिर्फ 25 साल थी। ऋचा चड्ढा को आज भी ये फिल्म करने का अफसोस है।