खूबसूरत और हुनरमंद अभिनेत्री जीनत अमान अपने समय की सबसे लोकप्रिय अभिनेत्रियों में से एक हैं। 70 और 80 के दशक में उन्होंने फिल्मी पर्दे पर वह काम कर दिखाया जो उस समय की अभिनेत्रियों की सोच से भी दूर था। फिल्मों में कदम रखने के बाद जीनत ने महिलाओं के लिए बनीं सारी रूढिवादिताएं तोड़ीं और अपनी एक अलग पहचान बनाई। जीनत ने हिंदी फिल्मों में तो कीर्तिमान हासिल कर लिया लेकिन उनकी जिंदगी कभी सुखद नहीं रही। आइए, उनके जन्मदिन पर उनके जीवन की कुछ रोचक बातें बताते हैं।
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पिता से ऐसे मिला 'अमान' उपनाम
जीनत अमान का जन्म 19 नवंबर 1951 को बॉम्बे (मुंबई) में हुआ। उनकी माता एक महाराष्ट्रियन ब्राह्मण थीं और उनके पिता अमानुल्लाह खान भोपाल के राजसी परिवार से थे। अमानुल्लाह खान ने दूसरे लेखकों के साथ मिलकर 'मुगल-ए-आजम' और 'पाकीजा' जैसी फिल्मों की पटकथाएं में लिखी हैं। एक लेखक के रूप में उन्होंने अपना नाम 'अमान' रख रखा था। जीनत अमान का असली नाम तो जीनत खान है लेकिन फिल्मों में कदम रखने से पहले जीनत ने अपने पिता का यह लेखक वाला उपनाम अपने नाम के साथ जोड़ लिया था।
भारत के साथ जर्मनी की भी नागरिकता
जीनत अमान को परेशानियों ने तो शुरुआत से ही घेर लिया था। उस समय वह बहुत छोटी थीं तब उनके माता-पिता का किन्हीं कारणों से तलाक हो गया। इसके बाद जीनत अपनी मां के साथ ही रहने लगीं। उस वक्त जीनत कोई 13 साल की रही होंगी जब उनके पिता चल बसे। इसके बाद उनकी मां ने हेंज नाम के एक जर्मन आदमी से शादी कर ली। जीनत और उनकी मां दोनों जर्मनी चली गए और इसी के साथ इन दोनों को जर्मनी की नागरिकता भी मिल गई। जीनत के पास अब भारत के अलावा जर्मनी की भी नागरिकता है।
ठीक से नहीं हुई पढ़ाई
जीनत अमान का बचपन ही उथल पुथल से भरा रहा इसलिए उनकी शिक्षा-दीक्षा भी अलग-अलग जगहों पर हुई। शुरुआती जीवन जीनत का देश में ही बीता इसलिए उनकी प्राथमिक शिक्षा मुंबई के पास पंचगनी में ही हुई। इसके बाद वह मां के साथ विदेश चली गईं तब उन्हें पढ़ने के लिए यूनिवर्सिटी आफ साउदर्न कैलिफोर्निया, लॉस एंजेलिस भेजा गया। जीनत वहां अपनी स्नातक की पढ़ाई पूरी करने गईं। हालांकि, उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की ही नहीं।
जीवन की आपाधापी में बनीं पत्रकार
जीनत अमान बचपन से ही अलग-अलग जगहों पर रही हैं इसलिए वह अपने भविष्य के बारे में कुछ सोच ही नहीं पाईं। उन्हें अपने बचपन में पता ही नहीं था कि आखिर बड़े होकर उन्हें करना क्या है? एक बात जरूर थी कि अपनी पारिवारिक दिक्कतों के बावजूद उन्होंने अलग-अलग जगहों की संस्कृति और रीति-रिवाज देखे। जिससे वह दुनियादारी समझने लगी थीं। अपनी स्नातक की पढ़ाई पूरी नहीं कर पाने के बावजूद वह देश वापस लौटी और फेमिना मैगजीन के लिए लिखने का काम करने लगीं। एक तरह से देखा जाए तो जीनत ने अपनी पहली नौकरी एक पत्रकार के तौर पर शुरू की।
