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फिल्मी होली का सफर: 'होली आई रे कन्हाई' से 'बलम पिचकारी' तक

Thu, 24 Mar 2016 09:36 AM IST
बीबीसी हिन्दी
बीबीसी हिन्दी Updated Thu, 24 Mar 2016 09:36 AM IST
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Bollywood Holi: from mother india to ye jawani hai diwani
बॉलीवुड होली
होली में रंग-गुलाल, मिठाई - गुझिया और बॉलीवुड गानों का एक अलग ही स्थान होता है। इन बॉलीवुड गानों के अब तक के सफर पर एक नजर। हिंदी सिनेमा जगत की पहली होलियों में नाम आता है, 50 के दशक में आई पहली टेक्नीकलर फिल्म 'आन' का। इसमें दिलीप कुमार और निम्मी होली खेलते और झूमते नजर आ रहे हैं। इसके बाद साल 1958 में आई फिल्म 'मदर इंडिया' की 'होली आई रे कन्हाई' का पड़ाव। इस गीत को 50 के दशक की मशहूर गायिका शमशाद बेगम ने गाया था।

फिल्मी होली का सफर: 'होली आई रे कन्हाई' से 'बलम पिचकारी' तक

Bollywood Holi: from mother india to ye jawani hai diwani
बॉलीवुड होली
होली के रंग में एक और रंग वी शांताराम ने अपनी फिल्म 'नवरंग' में भी उकेरा है। साल1959 में आई इस फिल्म में महिपाल और संध्या मुख्य भूमिका में हैं। महिपाल, दिवाकर नाम के कवि की भूमिका में हैं। इस गाने में संध्या महिला और पुरुष की दोहरी भूमिका मंच पर 'जा रे हट नटखट' गाते हुए नाच रही हैं।

फिल्मी होली का सफर: 'होली आई रे कन्हाई' से 'बलम पिचकारी' तक

Bollywood Holi: from mother india to ye jawani hai diwani
सत्तर के दशक में भी कुछ होली के गीत सदाबहार की सूची में हैं। पहला नाम है साल 1960 में आई फिल्म 'कोहिनूर' का 'तन रंग लो जी आज मन रंग लो'। इसके बाद फिल्म 'गोदान' और 'फूल और पत्थर' में भी होली के गाने थे। साल 1970 में दो फिल्में आईं, जिनके गाने आज भी होली के अवसर पर सुनाई दे जाते हैं। पहला है राजेश खन्ना और आशा पारेख की फिल्म 'कटी पतंग'।
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फिल्मी होली का सफर: 'होली आई रे कन्हाई' से 'बलम पिचकारी' तक

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होली
एक विधवा माधवी (आशा पारेख) सामाजिक कुप्रथाओं के चलते होली नहीं खेलती है। लेकिन कमल (राजेश खन्ना) होली पर माधवी को न छोड़ने का ऐलान करते हुए गाते हैं, 'आज न छोड़ेंगे हमजोली'। इसके बाद आया अस्सी का दशक जब 'होली, कब है होली।।?' और 'बुरा ना मानो होली है' सरीखे डायलॉग मिले। इस दशक में सबसे ज्यादा रंगो के पर्व को भुनाया गया।
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होली
साल 1973 आई वहीदा रहमान और धर्मेन्द्र की फिल्म 'फागुन' का गाना 'फागुन आयो रे' और इसी साल आई 'नमक हराम' का गाना 'नदिया से दरिया' भी होली के सफर के अहम पड़ाव है। आर डी बर्मन के कम्पोजीशन में तैयार इस गाने को किशोर कुमार ने गया है। इसे रेखा और राजेश खन्ना पर फिल्माया गया।
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