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अमर उजाला से खास मुलाकात में बोले जाकिर खान, 'हिंदी सिनेमा में लेखक की कोई हैसियत नहीं है'

Thu, 04 Jul 2019 08:04 AM IST
भावना शर्मा एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: भावना शर्मा Updated Thu, 04 Jul 2019 08:04 AM IST
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comedian zakir khan exclusive interview with amar ujala
zakir khan - फोटो : social media
सिनेमा और टेलीविजन की कैद से आजाद हो चुकी मनोरंजन की दुनिया ने डिजिटल के दम पर तमाम नए सितारे दिए हैं। इन सितारों के बीच जो नाम सबसे ज्यादा तेजी और सबसे ज्यादा तेज के साथ चमका, वह हैं जाकिर खान। देश के बेस्ट स्टैंड अप कॉमेडियन का खिताब जीतने के सात साल बाद वह प्राइम वीडियो के सुपरहिट शो कॉमिकस्तान के दूसरे सीजन के जज बने हैं। 
comedian zakir khan exclusive interview with amar ujala
zakir khan - फोटो : social media
रेडियो पर इंटर्नशिप से शुरुआत से लेकर देश के करोड़ों युवाओं के बीच मशहूर हो जाना, सफर काफी दिलचस्प रहा आपका?
सही कहूं तो ऐसा कभी महसूस नहीं हुआ कि मैं मशहूर हो गया हूं। हम जहां से आते हैं, हमारी एक छोटी सी दुनिया है। जब हम उस दुनिया में मशहूर हो जाएं बस वही हमारी सबसे बड़ी खुशी होती है। जब 50 लोग सुनते थे,  तब भी वैसा ही लगता था और आज जब पांच हज़ार लोग सुनते हैं तो भी ज्यादा फर्क महसूस नहीं होता। हर क्रिएटिव इंसान को मेहनत लगातार करनी चाहिए, जिस दिन आपको लगा कि आप बड़े आदमी बन गए हैं आपका काम खराब होना शुरू हो जाएगा।
comedian zakir khan exclusive interview with amar ujala
zakir khan - फोटो : social media
कॉमिकस्तान के पहले सीजन में खुद को कितना मिस किया?
दुखती रग पर हाथ रख दिया आपने। उस सीजन के दौरान हर एपीसोड देखते वक्त मैं यही सोचता था कि मैं वहां क्यों नहीं हूं। ये सब रोज सोशल मीडिया पर फोटो डालते और मैं सोचता कि ये हो क्या रहा है। तो दूसरे सीजन में जज बनने का जैसे ही पहला मौका आया, मैंने दोनों हाथों से इसे लपक लिया।
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comedian zakir khan exclusive interview with amar ujala
zakir khan - फोटो : social media
एक स्टैंड अप कॉमेडियन को किस बात से परहेज करना चाहिए?
कहानियां सुनाना भारतीय परंपरा का हिस्सा है। आप बस अपनी कहानी कहो। ज़रूरी नहीं है कि उसके साथ आप कुछ जबर्दस्ती के चुटकुले डालो ही। हम तीन चार दोस्त हैं। अंकित चड्ढा जैसा किस्सेबाज दूसरा मुझे मिला नहीं। दानिश हैं, जॉनी हैं, हसन हैं। बस हम सबने एक दूसरे को किस्से कहानियां सुनाकर ही एक दूसरे से ये सब सीखा है।
 
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Zakir Khan - फोटो : social media
आप मुंबई फिल्म लेखक बनने आए थे, वह सपना अब भी बाकी है?
हिंदी सिनेमा में लेखक की कोई हैसियत नहीं है। लाख वह अपने लिखे पर इतराता रहे। लेकिन एक बार कहानी फिल्म बनाने वालों के हाथ में गई तो फिर उन लोगों के नाम से ही फिल्म जानी जाती है। 10 साल पहले मैं फिल्म राइटर  ही बनने निकला था। तब लोग मुझ पर हंसते थे। अब मेरा स्टैंड अप का काम सही चल रहा है। मैं इसी में खुश हूं। कभी किसी ने एक्टिंग का ऑफर दिया तो जरूर करूंगा।
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