फिल्म कमांडो 3 की कामयाबी का लुत्फ उठा रहे फिल्म निर्देशक आदित्य दत्त के लिए कोरोना काल तमाम दिक्कतों के अलावा कुछ अच्छे तोहेफे भी लेकर आया है। आदित्य को महीनों बाद अपने परिवार के साथ रहने का मौका मिला है और सबसे बड़ी बात ये है कि वह अपने बेटे के साथ खूब वक्त बिता पा रहे हैं।
लॉकडाउन में बच्चों के साथ कैसे गुजारें वक्त, सीखिए डायरेक्टर आदित्य दत्त और उनकी पत्नी चांदनी से
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला से बातें करते हुए आदित्य ने बताया कि इस वक्त का उपयोग वह अपने बेटे को सिनेमा के बेसिक्स सिखाने में कर रह रहे हैं।आदित्य दत्त ने सिनेमा के शुरुआती तौर तरीके विशेष फिल्म्स में मशहूर निर्देशक महेश भट्ट की शागिर्दी में सीखे हैं। घर पर फिल्मी माहौल होने के बावजूद अपना करियर शुरू करने से पहले आदित्य ने काफी वक्त खुद को तराशने में लगाया है।
वह कहते हैं, “मैंने अपने बेटे केहिल को लॉक डाउन के दौरान काफी करीब से देखा। आम दिनों में तो ऐसा होता था कि वह सुबह स्कूल चला जाता है और जब दोपहर को लौटता है तब तक मैं दफ्तर चला जाता हूं। शाम को भी खेल कूद और पढ़ाई के बाद वह सो जाता हैं और हम साथ में इतना वक्त कभी बिता ही नहीं पाए। अब कम से कम वह मेरे साथ और मैं उसके साथ होने का एहसास तो महसूस कर पाता हूं।”
आदित्य और कैहिल की इन दिनों सिनेमा और उसके संगीत को लेकर भी खूब बैठकी होती है। नौ साल के कैहिल ने पिछले कुछ दिनों में रिलीज हुई तमाम रीमिक्स गाने सुनने के बाद ही ये जाना कि इनके ओरीजनल गाने तो उनके पितामह ने लिखे हैं। आदित्य बताते हैं, “डैडी के लिखे गाने (आदित्य अपने नाना आनंद बक्षी को डैडी ही बुलाते थे) मसलन गली गली क्यूं फिरता है या फिर आंख मारे ओ लड़की आंख मारे और पैसा ये पैसा, ये सब कैहिल ने लॉकडाउन के दौरान ही सुने और फिर इनके ओरीजनल भी ढूंढकर सुने। अब उसे महसूस हो रहा है कि संगीत में ओरीजनल क्या होता है और रीमिक्स किसे कहते हैं?”
फिल्मों को लेकर आदित्य अपने बेटे के लिए क्या सुझाते हैं, इस सवाल पर आदित्य बताते हैं, “ये काम मैं और मेरी पत्नी चांदनी दोनों मिलकर करते हैं। वह आज के जमाने का बच्चा है और जिस उम्र में हम बुद्धू हुआ करते थे, वह बहुत शार्प है। वह अभी से जर्नलिस्ट वाले मोड में कभी भी आ जाता है। घर पर काम करने वालों का इंटरव्यू लेता रहता है। हम चाहते हैं कि लॉकडाउन में उसे ज्यादा बंधन में न रखा जाए लेकिन ये भी ख्याल रखते हैं कि वह एकदम ही काबू से बाहर न हो जाए। ये बहुत मुश्किल समय है और इसके लिए हम उसे मिस्टर इंडिया या मासूम जैसी फिल्में दिखाते हैं। वह समझता है चीजों को और लगातार इतने दिन घर में रहने के बाद भी वह बिल्कुल परेशान नहीं करता। मुझे लगता है कि ऐसे समय में हमें बच्चों का दोस्त बनकर ही ज्यादा रहना चाहिए।”
पढ़ें: इन गायकों ने घर बैठे दी परफॉर्मेंस, कोरोना के लिए काम कर रहे लोगों का बढ़ाया उत्साह