एक फ्राइडे ने बदल दी मिथुन की किस्मत
संडे बाइस्कोप: पब्लिक ने मिथुन से मिलने को तोड़ दिए थे शीशे, साथ में पांच और फिल्मों के दिलचस्प किस्से
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मिथुन ने कर दी होती हां तो..
एक सुंदर सा दिखने वाला युवक। किसी दूसरे के घर में रहने आया है। संगीत का पुजारी है। गाता अच्छा है। जिस घर में वह रहता है उसके मालिक की बेटी उस पर फिदा है। प्यार वह भी करता है। दोनों साथ जीने मरने की कसमें खाने का सपना पूरा कर पाएं उससे पहले घर के मालिक को इसका पता चल जाता है। सिंगर घर छोड़ने पर मजबूर होता है। बेटी की शादी उसकी मरजी के बगैर कहीं और हो जाती है। सुहागरात को प्रेम कहानी का खुलासा होता है तो पति अपनी ही पत्नी को उसके प्रेमी से मिलवाने की ठान लेता है। आप कहेंगे ये तो सलमान खान और ऐश्वर्या राय की फिल्म हम दिल दे चुके सनम की कहानी है, मैं कहूंगा ये 37 साल पहले रिलीज हुई फिल्म वो 7 दिन की भी कहानी है तो शायद आप हैरान रह जाएं।
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इस वजह से पहेली को नहीं मिला ऑस्कर में नॉमिनेशन
बतौर एक्टर तीन बैक टू बैक सुपरहिट फिल्मों से डेब्यू करने वाले अमोल पालेकर डायरेक्टर भी कमाल के रहे हैं। पहेली उन्हीं की निर्देशित फिल्म है। अमोल पालेकर ने शाहरुख को बहुत सकुचाते हुए इस फिल्म की कहानी सुनाई और शाहरुख ने उनसे पूछा था कि क्या वह इस फिल्म में अभिनय करने के साथ साथ इसे प्रोड्यूस भी कर सकते हैं। शाहरुख उन दिनों नए निर्देशकों की तलाश में थे, जिनके साथ वह यश चोपड़ा, आदित्य चोपड़ा और करण जौहर से आगे का सिनेमा बना सकें। ये उन दिनों की बात है जब शाहरुख अपने पुराने दोस्तों अजीज मिर्जा और जूही चावला की पार्टनरशिप वाली कंपनी ड्रीम्ज अनलिमिटेड बंद कर चुके थे। अपनी नई कंपनी रेड चिलीज एंटरटेनमेंट शुरू कर चुके थे और फराह खान की बतौर निर्देशक पहली फिल्म मैं हूं ना से करोड़ों का मुनाफा बटोर चुके थे।
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जब डांस मास्टर ने अमिताभ के नाचने पर किया कमेंट
नवीन निश्चल पूना फिल्म इंस्टीट्यूट के गोल्ड मेडलिस्ट थे और उन्हें इसका बहुत गुमान भी था। पहली फिल्म रेखा के साथ थी, सावन भादो। फिल्म सुपरहिट हुई और नवीन निश्चल के पैर जमीन पर नहीं टिक सके। वह खुद को सबसे बड़ा सुपरस्टार समझने लगे। उनकी शोहरत का आलम ये था कि देव आनंद के परिवार में उनका रिश्ता हुआ। फिल्ममेकर शेखर कपूर की बहन नीलू उनकी पहली पत्नी थीं। नवीन निश्चल और योगिता बाली को लेकर बनी फिल्म परवाना के समय अमिताभ बच्चन की हैसियत हिंदी सिनेमा में स्ट्रगलर जैसी तो नहीं थी लेकिन उनके भीतर के अभिनेता को तब तक कम लोग ही पहचान पाए थे। फिल्म परवाना के एक गाने में पियानो पर थिरकती अमिताभ की उंगलियों के बीच उनकी कनपटी की नसों के उठने बैठने पर अगर किसी निर्देशक का ध्यान गया होता तो समझ आया होता कि एंग्री यंगमैन तो इस इंसान के भीतर न जाने कब से कुलबुला रहा था।
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असल है अमिताभ के मर कर जी उठने का सीन
अमिताभ की अपनी कंपनी एबीसीएल (अमिताभ बच्चन कॉरपोरेशन लिमिटेड) की प्लानिंग के हिसाब से फिल्म मेजर साब ही उनकी पांच साल के लंबे ब्रेक के बाद रिलीज होने वाली ‘कमबैक’ फिल्म होनी थी लेकिन होनी ने उनकी कमबैक कराई एक फ्लॉप फिल्म मृत्युदाता से। इन दोनों फिल्मों के निर्माता भी अमिताभ बच्चन ही थे। ये वो समय था जब अमिताभ बच्चन की किस्मत शायद उनसे रूठी हुई थी, वो जो कुछ कर रहे थे, उसका परिणाम उल्टा हो रहा था और यही वह दौर है जब अमिताभ बच्चन को उनके किसी भरोसे के सलाहकार ने मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता आयोजित कराने की सलाह दे दे दी थी। इस प्रतियोगिता के दो साल बाद रिलीज हुई फिल्म मेजर साब ही हमारे आज के बाइस्कोप की फिल्म है।
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