राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। कांग्रेस पर तीखा वार करते हुए प्रधानमंत्री ने ख्यात शायर मजरूह सुल्तानपुरी का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पं. नेहरू के पीएम कार्यकाल में मजरूह सुल्तानपुरी को एक कविता लिखने पर जेल भेज दिया गया था।
Majrooh Sultanpuri: कांग्रेस पर पीएम मोदी का तंज, कहा- एक कविता लिखने पर पंडित नेहरू ने मजरूह सुल्तानपुरी को भेज दिया था जेल
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कौन थे मजरूह सुल्तानपुरी?
मजरूह सुल्तानपुरी एक भारतीय उर्दू शायर, हिंदी फिल्मों के प्रसिद्ध गीतकार और आंदोलनकारी थे। उनका नाम 20वीं सदी के उर्दू साहित्य जगत के बेहतरीन शायरों में गिना जाता है।
क्या था मामला?
हिंदुस्तान की आजादी के कुछ समय बाद की बात है। बंबई में मजदूरों की एक हड़ताल में मजरूह सुल्तानपुरी ने एक ऐसी कविता पढ़ी कि नेहरू सरकार आग-बबूला हो गई। तत्कालीन गवर्नर मोरार जी देसाई ने मजरूह सुल्तानपुरी को ऑर्थर रोड जेल में डाल दिया। मजरूह सुल्तानपुरी को अपनी कविता के लिए माफी मांगने को कहा गया, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। जिसकी वजह से मजरूह सुल्तानपुरी को दो सालों तक जेल में ही रहना पड़ा।
मन में ज़हर डॉलर के बसा के,
फिरती है भारत की अहिंसा।
खादी की केंचुल को पहनकर,
ये केंचुल लहराने न पाए।
ये भी है हिटलर का चेला,
मार लो साथी जाने न पाए।
कॉमनवेल्थ का दास है नेहरू,
मार लो साथी जाने न पाए।
जेल से लिखते रहे गीत
सजा के दौरान मज़रूह को बेटी हुई। परिवार आर्थिक तंगी से गुजरने लगा। जिसकी वजह से मजरूह साहब ने जेल से ही कुछ फिल्मों के लिए गीत लिखना शुरू कर दिया। 1951-52 के दौर में मजरूह जेल से बाहर आए और तब से लेकर 2000 तक मुसलसल फिल्मी गीत लिखते रहे। 24 मई 2000 को मुंबई में उनका देहांत हो गया था।