भारतीय सिनेमा के जन्मदाता कहे जाने वाले दादासाहेब फाल्के के नाम पर देश में सिनेमा के क्षेत्र में कई पुरस्कार समारोह आयोजित होते हैं। इनमें से एक पुरस्कार देश की केंद्र सरकार देती है जो वर्ष 1969 से चला रहा है। इस पुरस्कार समारोह की देखा देखी दादासाहेब फाल्के के नाम पर तमाम दूसरे पुरस्कार समारोह शुरू हो गए हैं जिसमें कोई छह साल पहले शुरू हुआ दादासाहेब फाल्के इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल पुरस्कार भी शामिल है। इस पुरस्कार को दादासाहेब फाल्के के पोते चंद्रशेखर पुसलकर का आशीर्वाद मिला हुआ है, वह चाहते हैं कि इस पुरस्कार को छोड़ फाल्के के नाम पर बंटने वाले दूसरे सारे पुरस्कार बंद कराने के लिए सरकार को कुछ करना चाहिए।
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दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड
- फोटो : soci
दादासाहेब फाल्के इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल पुरस्कार समारोह का आयोजन 20 फरवरी को मुंबई में होने जा रहा है। इसके लिए बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया जिसमें दादासाहेब फाल्के के पोते चंद्रशेखर ने भी हिस्सा लिया। चंद्रशेखर इस पुरस्कार समारोह की जूरी के अध्यक्ष भी हैं। इस मौके पर उन्होंने अपनी दुविधा को जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें बिल्कुल अच्छा नहीं लगता जब उनके दादाजी के नाम पर फर्जी लोगों को फर्जी पुरस्कार बांटे जाते हैं। उनका कहना है कि सरकार को इसके लिए कुछ करना चाहिए।
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दादासाहेब फाल्के
- फोटो : फाइल
चंद्रशेखर ने अपने बयान में कहा, 'दादासाहेब फाल्के के नाम पर ऐसे ही पुरस्कार मिल जाना बहुत गंदा लगता है। मैंने सुना है कि उनके नाम पर देश में छह से सात पुरस्कार चलते हैं। लेकिन, यह बहुत गलत है। मैं उन पुरस्कार समारोह में जाता भी नहीं। वह मेरे घर पर आते हैं लेकिन मैं इसके लिए कर भी क्या सकता हूं? लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार के रूप में केंद्र सरकार दशकों से दादासाहेब फाल्के पुरस्कार देती आई है। और अब मैं दादासाहेब फाल्के इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल पुरस्कार का भी समर्थन करता हूं। हम सब को करना चाहिए। मुझे लगता है कि एक केंद्र सरकार से और एक एनजीओ से दादासाहेब फाल्के के नाम पर मिलने वाले पुरस्कार काफी हैं। बाकी सब को बंद कर देना चाहिए।'
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दादासाहेब फाल्के
- फोटो : फाइल
इसी दौरान चंद्रशेखर ने अपने दादाजी पर एक बायोपिक बनने की भी इच्छा जताई। उन्होंने कहा कि दादासाहेब फाल्के ने भारतीय सिनेमा को जन्म दिया तो कम से कम उनके ऊपर एक बायोपिक तो बननी ही चाहिए। उन्होंने बताया कि वह कई बार इस मुद्दे को उठा चुके हैं लेकिन कोई भी फिल्मकार इस पर अमल नहीं करता। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में फिल्म निर्माता दीपशिखा देशमुख और विकास गुप्ता भी मौजूद रहे जिनसे चंद्रशेखर ने कहा कि वह उनकी बात को गंभीरता से लें और इसके बारे में कुछ सोचें। मौके पर मौजूद दिग्गज अभिनेता के के मेनन से भी इस बारे में आग्रह किया गया।
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दादासाहेब फाल्के
- फोटो : फाइल
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में दादासाहेब फाल्के इंटरनेशनल फिल्म पुरस्कार के संस्थापक अनिल मिश्रा भी मौजूद रहे जिन्होंने फिल्म निर्माताओं से अपने देश में ही रह कर अपनी फिल्मों की शूटिंग पूरी करने की बात कही। सामने मौजूद रहीं निर्माता दीपशिखा देशमुख से अनिल मिश्रा ने विनती की कि वह अपनी फिल्मों की शूटिंग देश में ही करें क्योंकि यहां भी खूबसूरती कुछ कम नहीं। ज्ञात है कि अभिनेता अक्षय कुमार की फिल्म 'बेलबॉटम' की शूटिंग स्कॉटलैंड में हुई है जिसके कई निर्माताओं में से एक निर्माता दीपशिखा देशमुख भी हैं।