यशराज फिल्म्स के बैनर तले बनी प्रतिष्ठित फिल्म 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे' ने अपनी रिलीज के 25 साल मंगलवार को पूरे कर लिए। यहां मुबंई के मराठा मंदिर सिनेमाघर में ये फिल्म साल 1995 से लगी हुई है। एक गार्ड है जो हर सात दिन में हफ्तों की गिनती बदल देता है। अभी तो खैर कोरोना का संक्रमण है, लेकिन वैसे भी आसपास के लोगों की ज्यादा दिलचस्पी इस फिल्म में बची नहीं है।
25 Years Of DDLJ: जिस थिएटर में 25 साल से चल रही ‘डीडीएलजे’ वहां दिखा ऐसा सन्नाटा, अमर उजाला से पड़ोसी बोले...
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मुंबई सेंट्रल स्टेशन के करीब ही है वह मशहूर मराठा मंदिर, जहां निर्देशक आदित्य चोपड़ा की फिल्म 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे' ने मंगलवार को रिलीज के 25 साल बाद भी लगे रहने का रिकॉर्ड बनाया। लेकिन, आसपास दौड़ते भागते लोगों से इस फिल्म के बारे में दो पल रुककर बात करने का वक्त भी मुश्किल से ही मिला। थिएटर के मैनेजर मनोज देसाई खुद इस बारे में कोई बात नहीं करना चाहते और न ही उनके कर्मचारियों को कुछ बोलने की अनुमति है। 'डीडीएलजे' का बोर्ड लगा हुआ है। उसके हफ्तों की गिनती बदलते रहने के लिए संतोष नाम का सुरक्षाकर्मी भी तैनात है। वह ये काम पिछले 10 साल से कर रहे हैं। जब उनसे यह पूछा गया कि हफ्ते बदलना तो ठीक है लेकिन 'डीडीएलजे' देखने वाले हफ्ते में औसतन लोग कितने आते होंगे? तो जवाब मिला दो सौ से ढाई सौ।
पड़ोस में ही रोशन नाम के चाय वाले हैं जो सालों से इस सिनेमाघर के बगल में ही चाय बेचते हैं। उनके मुताबिक थिएटर में फिल्म देखने तो बहुत लोग आते हैं लेकिन 'डीडीएलजे' के मैटिनी शो के दौरान सालों से भीड़ नहीं देखी। रोशन बताते हैं कि छह-सात लोगों के आने पर हर रोज शो का चलता रहा है। किसी किसी दिन तो वो भी नहीं जुटते फिर भी शो चलता है। टिकट 20 रुपये की थी तो कभी कभी समय बिताने के लिए भी लोग चले आते हैं। फिलहाल कोरोना की वजह से सब बंद है।
मराठा मंदिर और फिल्म 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे' से जुड़ाव को लेकर ‘अमर उजाला’ ने आसपास रहने वाले लोगों से भी बात की। पता चला कि जब फिल्म ने यहां 10 साल पूरे किए थे तब खुद शाहरुख और काजोल अपने चाहने वालों से मिलने यहां आए थे। सिनेमाघर के आसपास रहने वाले लोगों को याद भी नहीं कि अंतिम बार उन्होंने इस सिनेमाघर में फिल्म कब देखी होगी? पढ़ाई के साथ साथ एक अदद नौकरी भी पा चुके औदुद ने बचपन में 'डीडीएलजे' मराठा मंदिर में ही देखी। कभी काम से वक्त मिला तो वह इस फिल्म को एक बार फिर से सिनेमाघर में देखना चाहते हैं हालांकि आखिरी फिल्म इस सिनेमाघर में अंतिम उन्होंने कौन सी देखी थी, उन्हें याद नहीं।
सकीना नौ-10 साल की रही होंगी, जब उन्होंने पहली बार 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे' फिल्म देखी। टीवी पर वह इसे अब भी देख लेती हैं लेकिन 'डीडीएलजे' में अब कोई खास ज्यादा दिलचस्पी उन्हें है नहीं। फिल्म संवाद 'जा सिमरन जी ले अपनी जिंदगी' उन्हें अच्छे से याद है। मराठा मंदिर के पड़ोस में ही रावजी चवण रहते हैं जिन्होंने मराठा मंदिर में खूब फिल्में देखी हैं। 11-12 साल पहले 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे' भी देखी लेकिन उन्हें कुछ खास पसंद नहीं आई। उनका मानना है कि 'दीवार', 'मुगल-ए-आजम', 'शोले' जैसी फिल्म अगर साल भर भी सिनेमाघर में चलती हैं तो लोग याद रखते हैं। लेकिन, 'डीडीएलजे' में लोगों को दिलचस्पी नहीं बची है।