निर्माता, निर्देशक अनिल शर्मा की जी स्टूडियोज के साथ बनी फिल्म 'गदर 2' के ट्रेलर का काउंटडाउन शुरू हो चुका है। साउथ सिनेमा की तर्ज पर इन दिनों हिंदी फिल्में भी डब होकर पैन इंडिया स्तर पर रिलीज हो रही हैं। ऐसे में कयास इस बात के लगाए जा रहे थे कि क्या 'गदर 2' भी हिंदी के अलावा तमिल, तेलुगू, कन्नड़ और मलयालम में डब होकर एक साथ रिलीज होगी। इस बारे में अनिल शर्मा ने अपनी फिल्म को लेकर तो स्थिति साफ की ही, साथ ही ये कहकर भी नया धमाका कर दिया कि शाहरुख खान की फिल्म ‘पठान’ का कारोबार साउथ में उतना हुआ नहीं जितना कि बताया जा रहा है।
Gadar 2: अनिल शर्मा ने फिल्म ‘पठान’ पर साधा निशाना, बोले, साउथ में फिल्म ने कमाए सिर्फ सवा करोड़ रुपये
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निर्माता, निर्देशक अनिल शर्मा का मानना है कि हिंदी फिल्में साउथ की भाषाओं में डब होकर हिट नहीं हो सकती। वह कहते हैं, 'शाहरुख खान की फिल्म 'पठान' हिंदी के साथ -साथ साउथ में भी डब होकर पैन इंडिया स्तर पर रिलीज हुई थी, लेकिन उस फिल्म का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन सिर्फ सवा करोड़ रुपए हुआ। इससे ज्यादा तो खर्चे फिल्म के रिलीज करने में लग जाते हैं। इसलिए मैं 'गदर 2' को हिंदी के अलावा दूसरी भाषाओँ में डब करके रिलीज करने के पक्ष में नहीं हूं।'
अनिल शर्मा का ये कहना कि शाहरुख खान की फिल्म ‘पठान’ ने साउथ में सिर्फ सवा करोड़ रुपये का कारोबार किया, चौंकाने वाला है। ट्रेड में प्रचलित आंकड़ों के अनुसार नौ हफ्तों तक सिनेमाघरों में लगी रही फिल्म ‘पठान’ ने घरेलू बॉक्स ऑफिस पर कुल 543.09 करोड़ रुपये का बिजनेस किया। इन आंकडों के मुताबिक फिल्म ने हिंदी में 524.53 करोड़ रुपये, तेलुगू में 12.76 करोड़ रुपये और तमिल में 5.8 करोड़ रुपये कमाए हैं।
अनिल शर्मा कहते हैं, 'लॉकडाउन के दौरान गोल्डमाइंस फिल्म्स ने साउथ की डब फिल्में टीवी पर खूब चलाई और दर्शक वहां की फिल्में देखकर काफी प्रभावित हुए। वहां की फिल्में ज्यादातर मास ओरिएंटेड होती है, जिसे दर्शकों ने खूब पसंद किया। इसलिए जब वहां की फिल्में सिनेमाघरों में पैन इंडिया स्तर पर रिलीज होती हैं, तो दर्शक उससे आसानी से जुट जाते हैं। हमारे साथ ऐसा नहीं हुआ कि कोई हमारी फिल्मों को डब करके साउथ में चलाए, अगर कोविड में ऐसा हुआ होता तो हमारी फिल्में भी वहां पसंद की जाती।’
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अनिल शर्मा ये भी मानते हैं कि अगर फिल्में अच्छी हो तो दर्शक उसे सिनेमाघरों में देखने जाते हैं, भले ही टिकट की कीमत ज्यादा क्यों न हो? निर्देशक क्रिस्टोफर नोलन की फिल्म 'ओपेनहाइमर' के टिकट दो हजार रुपये तक में बिके हैं। अनिल शर्मा कहते हैं, 'इससे दर्शकों को कोई फर्क नहीं पड़ता है कि टिकट रेट कम हैं या ज्यादा। आखिर में 'केजीएफ' जैसी फिल्में भी तो दर्शक महंगे टिकट खरीदकर देखने आए ही थे। अगर आपकी फिल्म अच्छी होगी तो दर्शक आपकी फिल्म सिनेमाघरों में देखने आएंगे। इस बात से उनको कोई फर्क नहीं पड़ता है कि टिकट रेट कम हैं या ज्यादा हैं। हमारे यहां हर वर्ग के दर्शक हैं। इसलिए एक निर्देशक की बहुत बड़ी जिम्मेदारी होती है कि अच्छा सिनेमा बनाए।'