भारतीय सिनेमा की पहली पढ़ी लिखी अभिनेत्री दुर्गा खोटे को दर्शकों की एक पीढ़ी ने शक्ति के रूप में देखा, दूसरी ने आदर्श पत्नी माना और तीसरी पीढ़ी ने उन्हें परदे पर आदर्श माता के रूप में अपनाया। जरा रुकिये, सिलसिला चौथी पीढ़ी तक जारी रहा और इस पीढ़ी ने उन्हें आदर्श दादी की तरह स्वीकार किया। स्टूडियो सिस्टम (मासिक वेतन पर फिल्मों में काम करने का अनुबंध) नाता तोड़ कर फ्रीलांस अभिनेत्री के तौर पर काम करने वाली दुर्गा खोटे भारतीय सिनेमा की पहली अभिनेत्री हैं। दुर्गा खोटे का फिल्मी सफर बहुत ही प्रेरणा दायक रहा है। उनकी पुण्य तिथि पर आएए जानते हैं, उनके जीवन से जुड़े 10 खास किस्से...
Durga Khote: मिलिए बॉलीवुड की पहली बागी हीरोइन से, स्पॉट दादा को बचाने के लिए भिड़ गईं दहाड़ते शेर से
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फिल्म 'मुगल -ए -आजम' में सलीम की मां जोधबाई की भूमिका निभाने वाली अभिनेत्री दुर्गा खोटे की कम उम्र में ही शादी हो गई थी। उनकी वैवाहिक जिंदगी बहुत अच्छी चल रही थी लेकिन अचानक ही उनके पति का निधन हो गया। उस समय दुर्गा खोटे की उम्र महज 26 साल की थी। पति के निधन से दुर्गा खोटे को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा, और ना चाहते हुए भी फिल्मों में काम करना पड़ा। उनकी पहली फिल्म रीलीज हुई तो लोगों ने कड़ी निंदा की। साथ ही उनकी फिल्म भी फ्लॉप रही। लोगों की आलोचना और पहली ही फिल्म फ्लॉप होने पर उन्होंने फिल्मी दुनिया से दूरी बना ली।
वी शांताराम के कहने पर दोबारा दुर्गा खोटे ने इंडस्ट्री में कदम रखा और पांच दशकों तक इस इंडस्ट्री का हिस्सा बनी रही, फिल्मों में काम करने के दौरान उन्होंने खुद का बेटा भी खोया और फिल्म इंडस्ट्री में मां भी बनी। दुर्गा खोटे ने अपनी निडरता के जरिए फिल्म इंडस्ट्री की पहली फ्रीलांस करने वाली अभिनेत्री बनी । यह दादा साहब फाल्के पुरस्कार हासिल करने वाली चौथी अभिनेत्री हैं।
दुर्गा खोटे का जन्म 14 जनवरी 1905 को एक ब्राह्मण परिवार में गोवा में हुआ था। बचपन में उनका नाम वीटा लाड था। उनके पिता का नाम पांडुरंग शामराव लाड और उनकी माता का नाम मंजुलाबाई था। उनके पिता उस जमाने के जाने माने वकील थी। गोवा से उनका परिवार मुंबई (बॉम्बे) शिफ्ट हो गया। वह अमीर खानदान से ताल्लुक रखती थी। और, जिस समय महिलाओ को पढ़ने नहीं दिया जाता था उस समय उन्होंने मुंबई के कैथेड्रल हाई स्कूल प्रारंभिक शिक्षा और सेंट जेवियर्स कॉलेज से ग्रेजुएशन किया।
जब दुर्गा खोटे कॉलेज में पढ़ाई कर रही थी तभी उनके परिवार वालों ने उनकी शादी एक अमीर खानदान में विश्वनाथ खोटे से कर दी। उनके पति पेशे से मकैनिकल इंजीयर थे । दोनों का वैवाहिक जीवन बहुत अच्छा चल रहा था। दोनो के दो बेटे भी हुए, लेकिन दुर्गा खोटे की यह खुशी ज्यादा दिनों तक नहीं टिकी। पति के गुजर जाने के बाद उनका और उनके बच्चों का पालन उनके ससुर ने किया, लेकिन कुछ ही दिनों के बाद ससुर का भी निधन हो गया । इसके बाद परिवार के कुछ लोगों ने दुर्गा खोटे की मदद की, लेकिन उनको लगा कि वह दूसरों पर आश्रित नहीं रह सकती हैं।