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लोगों को याद आया देश का पहला ड्राइव इन थिएटर, बांद्रा ईस्ट में हर शाम लगता था गाड़ियों का मेला

अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई Published by: shrilata biswas Updated Sat, 09 May 2020 01:34 PM IST
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during lockdown People remembered country first drive in theater
ड्राइव इन थिएटर - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

कोई 30 साल पहले तक लोकल ट्रेन में चर्चगेट से बोरीवली की तरफ सफर करने वाले अगर बांद्रा स्टेशन होकर गुजरते तो स्टेशन आने से पहले ही उनकी निगाहें दाहिनी तरफ मुड़ने लगती थीं। बांद्रा ईस्ट में उन दिनों हुआ करता था देश का इकलौता ड्राइव इन थिएटर। जिसके बड़े से मैदान में लोग अपनी गाड़ियां खड़ी कर उन्हीं में बैठे सामने लगे बड़े से पर्दे पर फिल्में देखा करते। हर गाड़ी एक पोल के पास खड़ी होती, जिसमें सुविधा होती थी अपना हेडफोन लगाने की। हर तरफ सन्नाटा। सामने फिल्म और कानों में चलते गाने और डायलॉग्स।

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ड्राइव इन थिएटर - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

इसके बरसों बाद एक बार फिर से मुंबई में एक नया ड्राइव इन थिएटर बनने जा रहा है। कोरोना वायरस की वजह से हुए लॉकडाउन के बाद देश की मौजूदा स्थिति को देखते हुए सिनेमाघरों के मालिक पोर्टेबल थिएटरों के बाद ड्राइव-इन सिनेमाघरों पर चर्चा भी खूब कर रहे हैं। इस तरह के सिनेमाघरों का जर्मनी, स्पेन, दक्षिण कोरिया, लिथुआनिया और अमेरिका के कुछ हिस्सों में अच्छा प्रदर्शन होता रहा है। हालांकि, लॉकडाउन के समय में भारत में इस तरह के सिनेमाघरों का निर्माण करना बहुत मुश्किल है। 

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भूषण कुमार - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

हिंदी फिल्मों के निर्माता भूषण कुमार का भी मानना है कि भारत में ड्राइव-इन थिएटर का विचार लॉकडाउन के इस समय में तो नहीं किया जा सकता है। यह स्थिति उन सिनेमाघरों के चलने लायक तो बिल्कुल भी नहीं है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

जैसा कि हमने शुरू में ही बताया कि ड्राइव-इन थिएटर का विचार भारत में नया नहीं है। मुंबई का पहला ड्राइव इन थिएटर भले बंद हो चुका हो लेकिन अहमदाबाद, चेन्नई और गुरुग्राम जैसे शहरों में ऐसे ड्राइव-इन थिएटर अब भी हैं। पीवीआर पिक्चर्स के सीईओ कमल ज्ञानचंदानी का मानना है कि देश में ड्राइव-इन थिएटर्स का विचार इतना भी बुरा नहीं है। इन पर काम किया जा सकता है, जब स्थिति थोड़ी सी साधारण हो जाए। वह कहते हैं, 'हम मुंबई में एक ड्राइव-इन थिएटर बनाने पर विचार कर रहे हैं और जल्दी ही हम यह थिएटर बना भी देंगे।'

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

ड्राइव-इन थिएटर्स का अनुभव इस नई पीढ़ी के लिए एकदम अनोखा हो सकता है। इस विचार का विरोध करने वाले कहते हैं कि उचित दूरी बनाए रखते हुए ड्राइव-इन थिएटर के लिए एक बड़ी सी जगह की व्यवस्था करना एक बड़ी चुनौती हो सकती है। कुछ लोगों का यह भी मानना है कि ड्राइव-इन थिएटर्स को बनाने में जितना वक्त लगेगा, इतने में तो हो सकता है कि कोरोना वायरस का इलाज ही मिल जाए।

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